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नीतीश कुमार के नवगठित मंत्रिमंडल में नए चेहरों को मौका मिला या परिवारवाद हावी रहा ?

नीतीश कुमार ने 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. उनके साथ 26 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली.

Bihar Dynasty politics Nepotism in CM Nitish Kumar newly formed cabinet opposition questioned
नीतीश कुमार के नवगठित मंत्रिमंडल में नए चेहरों को मौका मिला या परिवारवाद हावी रहा ? (ANI)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : November 20, 2025 at 8:28 PM IST

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अनामिका रत्ना

नई दिल्ली: बिहार में नीतीश कुमार के नवगठित मंत्रिमंडल पर इस बार विपक्ष परिवारवाद का नाम लेकर हमला बोल रहा है. हालांकि एनडीए ने जातिगत समीकरण को बिठाते हुए राजनीतिक पृष्ठभूमि के नेताओं को जगह तो दी ही है. मगर इस बात का भी ध्यान रखा है कि इन नेताओं के साथ जनाधार है या नहीं. हालांकि विपक्ष ये जरूर हमला कर रहा है कि एनडीए का "परिवारवाद मुक्त बिहार" का नारा सिर्फ भाषणों तक ही सीमित है.

विपक्ष ने आरोप लगाया है कि जिस मंत्रिमंडल को "नया बिहार" और "परिवारवाद के खिलाफ क्रांतिकारी कदम" बताया जा रहा है, उसमें आधे से ज्यादा मंत्री या तो किसी पूर्व नेता के बेटे-बेटियां हैं, या बहू-दामाद, या फिर करीबी रिश्तेदार.

नवगठित नीतीश कैबिनेट में "नए चेहरे"

  • संतोष सुमन मांझी – केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के पुत्र
  • सम्राट चौधरी– पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी के पुत्र
  • दीपक प्रकाश – पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं मौजूदा राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र
  • श्रेयसी सिंह – पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की पुत्री, मां पुतुल कुमारी भी सांसद रह चुकी हैं
  • रमा निषाद – पूर्व केंद्रीय मंत्री कैप्टन जय नारायण निषाद की बहू और पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी
  • विजय चौधरी – पूर्व विधायक जगदीश प्रसाद चौधरी के पुत्र
  • अशोक चौधरी – पूर्व मंत्री महावीर चौधरी के बेटे
  • नितिन नवीन – पूर्व मंत्री नवीन किशोर सिन्हा के पुत्र
  • सुनील कुमार – पूर्व मंत्री चंद्रिका राम के बेटे और पूर्व विधायक अनिल कुमार के भाई
  • लेसी सिंह – समता पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष दिवंगत भूटन सिंह की पत्नी

इन 10 नामों में से ज्यादातर मंत्री या तो किसी पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व सांसद या पूर्व विधायक के सीधे वारिस हैं. इन नामों को लेकर विपक्ष को एनडीए पर हमला बोलने का मौका मिल गया है.

अगर जातिगत समीकरण की बात करें तो भाजपा ने जातिगत समीकरण का ध्यान मंत्रिमंडल में वोटों के बंटवारे को ध्यान में रखकर किया है, जिससे एनडीए के तमाम वोटबैंक को नेतृत्व मिल सके और संतुलन परफेक्ट बैठ सके.

नीतीश कुमार के नवगठित मंत्रिमंडल में, यदि परिवारवाद है भी तो जनाधार और जातिगत समीकरण में संतुलन बिठाते हुए ऐसे नेताओं को भी जगह दी गई है जो सिर्फ अपने परिवार की वजह से नहीं बल्कि खुद के जनाधार की वजह से भी पार्टी में टिके हुए हैं.

हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार, ये बात कहते रहे हैं कि परिवारवाद पार्टी में नहीं होना चाहिए लेकिन परिवार की वजह से मेहनती और जनाधार वाले नेता पीछे ना रह जाएं, इस बात का भी ध्यान रखकर पार्टी को आगे बढ़ना है. मगर बिहार के विपक्षी पार्टियां आरजेडी और कांग्रेस नए मंत्रिमंडल में परिवारवाद का आरोप लगाते हुए उसे एजेंडा बनाने की कोशिश में जुटी हैं.

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