बेहया, झुमका, मौसम वैज्ञानिक.. बिहार में 'पेड़ वाले बाबा' के गार्डन में है अजब गजब पौधों की भरमार
5 गमलों से ढाई हजार गमलों तक का सफर, जानिए बिहार के नरेंद्र सिंह उर्फ 'पेड़ वाले बाबा' की दिलचस्प कहानी.

Published : December 29, 2025 at 3:02 PM IST
रिपोर्ट- पंकज श्रीवास्तव
छपरा: बिहार के छपरा के नरेंद्र सिंह ने अपने घर के छत और बारामदे में गार्डन बनाया है. उनके घर में एक दो नहीं बल्कि 2000 से 2500 पौथे हैं. यहां आपको एक से बढ़कर एक फल, सब्जियां और फूल देखने को मिल जाएंगे. बचपन से शुरू हुआ उनका गार्डनिंग का ये शौक 55 की उम्र में भी जारी है.
नहीं हटेंगी नजरें... शख्स ने घर में बनाया गजब का गार्डन : सारण जिले के दिघवारा प्रखंड के आमी गांव के निवासी नरेंद्र सिंह उर्फ 'पेड़ वाले बाबा' अपने घर पर ही कंपोस्ट तैयार करते हैं और अपने बगीचे में केमिकल मुक्त तरीके से पौधे उगाते हैं. नरेंद्र सिंह बताते हैं कि उनका ये शौक आज से 45 साल पहले शुरू हुआ था, जब उन्होंने 5 गमलों में सब्जी और फूल उगाकर गार्डनिंग की शुरुआत की थी.
'पेड़ वाले बाबा' की दिलचस्प कहानी : नरेन्द्र सिंह ने बताया कि, साल 1979, मैं 5वीं क्लास में पढ़ता था, तब से मुझे बागवानी का शौक रहा. मेरे पिताजी पुलिस की नौकरी में थे. मैं भी NCC से जुड़ा रहा. एक बार जब मैं पिताजी के साथ आर्मी कैंप में गया तो जवानों को पौधों की देखभाल करते देखा. मुझे लगा जैसा वहां का एक-एक पत्ता अनुशासित था.
मानों जैसे फौजी अनुशासित होते है, वहां से सीख लेकर बाहर आया. इसके बाद 2003 में पिताजी सेना से रिटायर हुए. फिर हम लोग यहां गांव में रहने लगे. तब से मैंने यहां पौधा लगाना शुरू किया.

5 गमलों से ढाई हजार गमलों तक का सफर : एक जमींदार परिवार से ताल्लुक रखनेवाले नरेंद्र सिंह के 5 गमलों से शुरू हुआ शौक आज ढाई हजार गमलों तक पहुंच चुका है. उनके बगीचे में तरह-तरह की सब्जियां, फल और फूल हैं. गार्डन में सुंदर फूलों को देख लोग कहते हैं कि वाह! क्या सुंदर नजारा है.

'पेड़ वाले बाबा' ने बताया कि कई फलदार वृक्ष हैं, जो उनके घर के टेरेस (छत) और बगीचे की शोभा बढ़ा रहे हैं. आम अमरूद, केला, संतरा, तुलसी, पीपल, बरगद, नीम, सेव, नाशपाती, लीची, पपीता, नारंगी, मौसमी, कागज़ी नींबू, अनानास, अंगूर और जामुन ऑर्गेनिक तरीके से उगा रहे हैं. मेरे बगीचे में आम की 5-6 प्रजातियां है. जिसमें मशहूर आम मियांजाकी भी है.

50 प्रकार से ज्यादा औषधीय पौधे : नरेन्द्र सिंह बताते हैं कि बगीचे में 108 तुलसी का पौधा लगाया और उसकी माला भी तैयार की. वहीं गार्डन में 50 प्रकार से ज्यादा औषधीय पौधे है, जिनमें रोजमेरी, पथलटट्टी, एलोवेरा, हल्दी, सतालु, गिलोय, कड़ी पत्ता, एलोवेरा और सतावरी, तुलसी, अजवाइन, नारियल, आंवला, जामुन, नींबू, बेहाया और पटल चट शामिल है.

गार्डन में अजब गजब पौधे : इसके अलावा उनके बगीचे में मगही पान, देसी पान, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, जामुन, चेरी, लौंग, इलाइची, आजवाइन, सुपारी, नारियल, खजूर, अदरक, और आंवला भी हैं. उन्होंने बताया कि गार्डन में एक ऐसा पौधा है, जिसका नाम 'मौसम वैज्ञानिक' (Weather Predicting Plant) है.

'मौसम वैज्ञानिक' पौधा, जिसे Texas sage कहते हैं. लोग इसके खिलने से मौसम का अनुमान लगाते हैं. यह पौधा बारिश या नमी का संकेत देते है. नमी बढ़ने और बारिश होने के साथ ही यह खिलता है. इसके फूल गुलाबी, नीले या बैंगनी रंग के होते है. साथ ही इससे पत्ते रोएदार होते हैं.

10 केजी.. ब्लीडिंग हार्ट और ब्रोकन हार्ट : ब्लीडिंग हार्ट और ब्रोकन हार्ट भी पेड़ वाले बाबा के गार्डन में आपको दिख जाएंगे. ब्रोकन हार्ट (Monstera Adansonii) के पौधे की बनावट खास होती है, पौधे में छेद होते है, इसलिए इसे ब्रोकन हार्ट से जाना जाता हैं. ब्लीडिंग हार्ट (डाइसेन्ट्रा एक्सिमिया) के पौधे में सुंदर फूल खिलते है, इसलिए इन्हें ब्लीडिंग हार्ट कहा जाता है. जामुन के पौधे की एक खास प्रजाति इनके बगीचे में है, जिसका नाम '10 केजी' है, इसका एक फल 100 ग्राम का होता है.
बेहया, झुमका.. कभी सुना है ऐसा नाम : नरेंद्र सिंह के बगीचे में एक से बढ़कर एक पौधे आपको देखने को मिलेंगे. एक पौधा ऐसा है, जिसका पत्ता अगर पकाने के वक्त चावल में डाल दे तो वह सुगंधित हो जाएगा. 'बेहया' नाम (अंग्रेजी नाम- Ipomoea carnea) का पौधा (Behaya Plant) भी इन्होंने लगाया है.

बेहया के पौधे में औषधीय गुणों की भरमार : बेहया के पौधे की जड़ों, पत्तियां, तना, फूल में औषधीय गुणों की भरमार है. रिसर्च गेट और इंटरनेशनल जर्नल ऑफ रिसर्च इन फॉरमेसी एंड अलाइड साइंस के अनुसार, यह पौधा पाचन तंत्र तो मजबूत करता है. इसके पत्तों और जड़ों में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल पाएं जाते है. यह पौधा गाय में होने वाले खुरपका रोग के लिए रामबाण औषधि का काम करता है.

झुमका के फूल.. उम्र के साथ रंग बदलते हैं : पेड़ वाले बाबा के गार्डन में एक फूल का पेड़ ऐसा है, जिसे 'झुमका' पौधा कहते हैं. इस पौधे की विशेषता यह है कि इसमें झुमके के आकार के फूल खिलते हैं. अग्रेजी में इसे रंगून क्रीपर (Rangoon Creeper) या चाइनीज लैंटर्न प्लांट (Chinese Lantern Plant) कहते हैं. रिसर्च गेट के अनुसार, इसके फूल सुगंधित होते है. यह गुच्छों मे खिलते हैं और खिलने के दौरान सफेद से गुलाबी और फिर लाल हो जाते हैं. मधुमक्खियों और तितलियों को अपने ओर आकर्षित करता है.

''मेरे बगीचे में रोजमेरी का पेड़ है, जिन लोगों के बाल सफेद हो रहे है, यह पौधा उसे रोकने का काम करता है. एक ऐसा मिर्ची का पेड़ है, जिसमें कई रंग की मिर्ची एक ही पेड़ में होती है. करी पता का पौधा, जिसे पत्ते खाने में डॉलने से उसका स्वाद बढ़ जाता है.'' - नरेंद्र सिंह उर्फ 'पेड़ वाले बाबा'
किचन वेस्ट से तैयार कंपोस्ट से पौधे स्वस्थ होते हैं : उन्होंने बताया कि, वह अपने गार्डन के लिए प्रतिदिन 5 से 6 घंटे मेहनत करते हैं. गार्डन की साफ-सफाई, पौधों को देखरेख, कटाई-छटाई में खुद करते है. वह खुद अपने घर में कंपोस्ट खाद तैयार करते हैं, और उसी को पौधों में डालते हैं. इसमें काफी खर्चा होता है. उनके इस काम में उनके परिवार के सभी सदस्य उनकी मदद करते हैं.

''सूखे पत्ते और गमले से निकली मिट्टी के साथ, किचेन वेस्ट का भी खाद बनाने में उपयोग करते हैं. साथ ही सरसों की खली, प्याज और केले के छिलके का प्रयोग भी लिक्विड खाद खुद बनाने है.'' - नरेंद्र सिंह उर्फ 'पेड़ वाले बाबा', पर्यावरण प्रेमी
इस बेहतरीन गार्डन को देखने के लिए आसपास के लोग अक्सर उनके यहां आते हैं और जानकारी भी लेते हैं. दूसरों को वो गार्डनिंग की बारीकियां बड़े अच्छे तरीके से सिखाते हैं. नरेंद्र सिंह के बागवानी के शौक को देखकर आसपास के लोग भी अब अपने-अपने घरों में पेड़ पौधा लगा रहे हैं.

''लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए इनकी कोशिश से हम सभी प्रभावित हैं. इनके द्वारा लगाए गए पौधे चाहे वो रात रानी की महक और या और कई पौधे, पूरे क्षेत्र में इनकी खुशबू फैलती है.''- रामानंद सिंह, पड़ोसी
''इनकी बागवानी में मैं अक्सर आता हूं. 108 तुलसी का पेड़, पीपल का पेड़ वातारण को शुद्ध करता है. यहां कई तरह के फूल और फल के पौधे हैं. यहां से हमलोगों ने प्रेरणा लेकर अपने घरों में भी पौधारोपण किया है.'' - मोहनानंदजी, रामजानकी आश्रम

आखिर में 'पेड़ वाले बाबा' कहते हैं कि आसपास के लोग इस गार्डन से इतने प्रभावित है कि, जब मैं यहां से बाहर जाता हूं तो आसपास के लोग मेरे इस बगीचे की देखभाल करते हैं. आज जिस तरह से AQI से लोग परेशान है. मैं लोगों से कहना चाहूंगा कि इस नेक काम की शुरूआत आप घर से ही करें और एक पौधा जरूर लगाएं.
''आज वातावरण प्रदूषित हो रहा है, यहां गांव में भी कभी AQI बढ़ जाता है तो बहुत परेशानी होती है. इसलिए स्नैल प्लांट लगा लीजिए, इसमें न पानी न धूप की जरूरत होती है. यह पौधा हवा को शुद्ध करने का काम करता है. तुलसी का पौधा, जो दिन-रात ऑक्सीजन देता है. ऐसे में छोटे-छोटे प्रयास भी जिंदगी में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं.'' - नरेंद्र सिंह उर्फ 'पेड़ वाले बाबा', पर्यावरण प्रेमी
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