अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में धूम मचा रही बिहार की सिद्धिता मिश्रा, अपनी अद्भुत कला से जीत रही लोगों का दिल
बिहार की आर्टिस्ट सिद्धिता मिश्रा मधुबनी मिथिला आर्ट के साथ अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव पहुंची हैं जो पर्यटकों को खूब भा रही है.

Published : November 23, 2025 at 7:30 PM IST
कुरुक्षेत्र : हरियाणा के कुरुक्षेत्र ब्रह्मसरोवर पर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव चल रहा है जहां पर देश के अलग-अलग राज्यों से शिल्पकार और आर्टिस्ट अपनी कला को प्रदर्शित कर रहे हैं. ऐसी ही एक युवा आर्टिस्ट सिद्धिता मिश्रा बिहार के मधुबनी से मधुबनी मिथिला आर्ट लेकर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव पहुंची है जो यहां पर आने वाले पर्यटकों को खूब पसंद आ रही है. सिद्धिता मिश्रा पहली बार अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में आई है, जहां पर पर्यटकों का उनको खूब प्यार मिल रहा है और उनकी काफी अच्छी सेल हो रही है.
मधुबनी मिथिला आर्ट पर करती है काम : आर्टिस्ट सिद्धिता मिश्रा ने बताया कि मधुबनी मिथिला आर्ट बिहार की एक प्राचीन परंपरा है. सीता माता के पिता राजा जनक ने उनके विवाह उत्सव के दौरान वहां के स्थानीय लोगों से सजावट के लिए कहा था जिसके चलते वहां के लोगों ने सबसे पहले मधुबनी मिथिला आर्ट बनाई थी. भगवान श्री राम और माता सीता के विवाह की मधुबनी मिथिला आर्ट से पेंटिंग बनाई थी जिसके चलते अब ये काफी मशहूर है और ये बिहार की एक पहचान बन चुकी है. उन्होंने कहा कि ये हमारी प्राचीन सभ्यता है, इसलिए मैंने इसको अपनाया है और इस पर काम करना शुरू किया है.
मां और बुआ से प्रेरित होकर शुरू किया काम : सिद्धिता मिश्रा ने बताया कि बिहार की महिलाएं मधुबनी मिथिला आर्ट के लिए पूरे भारत में जानी जाती है. उनकी मां और उनकी बुआ भी इस आर्ट पर काम करती थी जो परंपरागत तरीके से पेंटिंग बनाया करती थी. उनसे ही प्रेरित होकर उन्होंने इस आर्ट को अपना पेशा बनाया है और इसे प्रोफेशनल रूप दिया है. उन्होंने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स भी किया जिसके बाद उन्होंने एक साल एक कंपनी में जॉब भी किया लेकिन फिर उन्होंने अपनी परंपरागत संस्कृति मधुबनी मिथिला आर्ट पर काम करना शुरू किया.

खुद का स्टार्टअप किया शुरू : उन्होंने बताया कि उन्होंने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स करने के बाद जब मधुबनी मिथिला आर्ट पर काम करना शुरू किया तो उन्होंने सोचा कि इसको मैं बड़े स्तर पर लेकर जाऊंगी क्योंकि वो इसको एक ब्रांड बनाना चाहती थी जिसके चलते उन्होंने अपने खुद का एक ब्रांड "हाउस ऑफ मिथिला" बनाया जिसके बाद वे अब इस ब्रांड के जरिए देश के अलग-अलग कोनों में जाकर बिहार की प्राचीन परंपरा को लोगों के सामने पेश कर रही हैं.

हाथ से किया जाता है सभी काम : उन्होंने कहा मशीनों के इस दौर में आज भी मधुबनी मिथिला आर्ट पर हाथ से काम किया जाता है. वे ख़ास तौर के कलर का इस्तेमाल करती हैं. वे पेंटिंग के साथ-साथ घर के डेकोरेशन के समान पर भी काम करती हैं. उन्होंने कहा कि कुछ भी चीज़ हो, सभी पर हाथ से ही पेंटिंग बनाई जाती है जो लोगों को बहुत पसंद आती है.

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में लेकर पहुंची कई प्रकार के प्रोडक्ट : उन्होंने बताया कि वे ख़ास तौर पर महिलाओं के लिए साड़ी, बेडशीट समेत घर के लिए सजावट के सामान लेकर पहुंची हैं जो लोगों को खूब पसंद आ रही है. उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में वे पहली बार आई हैं जहां पर पर्यटक उनसे खूब खरीदारी कर रहे हैं.

दूसरे राज्यों का देखने को मिल रहा कल्चर : जींद से आए हुए सुंदर और लुधियाना से आए हुए विजय ने बताया कि वे इनके स्टॉल पहुंचे थे. हालांकि अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में दूसरे राज्यों के बहुत से आर्टिस्ट और शिल्पकार आए हुए हैं, लेकिन इनकी कला की एक अलग ही बात है जो देखने में काफी ज्यादा खूबसूरत लग रही है. इसी वजह से वे इनके स्टॉल की ओर आकर्षित हुए हैं.






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