गंडक बैराज के 36 गेट खोले गए, NDRF-SDRF तैनात.. उपमुख्यमंत्री बोले- 'घबराने की जरूरत नहीं'
नेपाल में ग्लेशियर फटने से बिहार में गंडक नदी में बाढ़ का खतरा बढ़ा. बराज के सभी 36 गेट खोले गए. रिपोर्ट अविनाश/दिलीप कुमार


Published : August 26, 2026 at 11:47 PM IST
पटना: नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र (तिब्बत प्रभाग) में फ्लैश फ्लड से त्रिशूली नदी से देवघाट और गंडक नदी में अचानक जलप्रवाह बढ़ने की आशंका के बीच बिहार सरकार ने संबंधित जिलों में विशेष सतर्कता बढ़ा दी है. वहीं वाल्मीकिनगर में गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए हैं और बचाव और राहत की तैयारियां तेज कर दी हैं.
बिहार में गंडक नदी जलस्तर बढ़ा : उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बुधवार को कहा कि नेपाल से लगातार जलप्रवाह को लेकर जानकारी मिल रही है और संभावित स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है. उन्होंने बताया कि नेपाल के तिब्बत से सटे क्षेत्र में ग्लेशियर फटने की सूचना मिली है. इसका पानी नेपाल की त्रिशुली नदी के रास्ते नारायणी नदी में आ रहा है, जो बिहार में गंडक नदी के नाम से जानी जाती है.
#WATCH पटना (बिहार): बिहार में बाढ़ की स्थिति पर उपमुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा, "हमने पूरी तैयारी कर ली है और जहां ये बादल फटा वो नेपाल के सबसे ऊपर उत्तरी इलाके में तिब्बत चीन बॉर्डर पर हुआ इसलिए वहां से आते-आते पानी का वेग कम हो रहा है पानी की मात्र… pic.twitter.com/gneo6FG2Uh
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 26, 2026
''स्थिति थोड़ी गंभीर होने की सूचना मिली है और नेपाल सरकार से पानी के संभावित प्रवाह तथा उसके प्रभाव को लेकर लगातार जानकारी प्राप्त हो रही है. नेपाल सरकार के आकलन के अनुसार, देवघाट में जलस्तर करीब तीन मीटर तक बढ़ सकता है.'' - विजय कुमार चौधरी, जल संसाधन मंत्री
देवघाट गंडक नदी में अभी कितना पानी? : विजय चौधरी ने बताया कि देवघाट गंडक नदी में संभावित जलप्रवाह का आकलन करने का प्रमुख बिंदु है. वहां फिलहाल करीब 4.7 मीटर पानी है. यदि जलस्तर तीन मीटर बढ़ता है तो यह लगभग पौने आठ मीटर तक पहुंच सकता है.
8 या 9 मीटर जलस्तर.. स्थिति ज्यादा खतरनाक : उन्होंने कहा कि आठ से नौ मीटर या उससे ऊपर जलस्तर पहुंचने पर स्थिति ज्यादा खतरनाक मानी जाती है. नेपाल सरकार के अनुसार, ग्लेशियर से आया पानी अगले दो से तीन घंटे में देवघाट पहुंच सकता है.
'स्थिति चुनौतीपूर्ण, लेकिन नियंत्रण से बाहर नहीं' : उप मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थिति चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन उपलब्ध आकलन के आधार पर सरकार स्थिति को नियंत्रण से बाहर नहीं जाने देगी. फिलहाल गंडक में बिहार की ओर से जलप्रवाह एक लाख क्यूसेक से कम है. आने वाले अतिरिक्त पानी का आकलन करीब डेढ़ लाख क्यूसेक तक किया गया है. ऐसे में कुल जलप्रवाह करीब ढाई से पौने तीन लाख क्यूसेक से अधिक नहीं जाने की संभावना है.
''संभावित स्थिति को देखते हुए बाढ़ प्रबंधन से जुड़े सभी जरूरी कार्य पूरे कर लिए गए हैं. संबंधित जिलों के अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.'' - विजय कुमार चौधरी, जल संसाधन मंत्री
'देवघाट के 4 घंटे बाद बराज तक पहुंचेगा पानी' : जल संसाधन मंत्री ने बताया कि, बाढ़ प्रबंधन में विशेषज्ञता रखने वाले अधिकारियों की एक अतिरिक्त टीम भी बुधवार दोपहर रवाना की गई है. देवघाट में पानी पहुंचने के करीब चार घंटे बाद बराज तक पानी पहुंचने की संभावना है. ऐसे में बुधवार की रात महत्वपूर्ण हो सकती है.
'सतर्क रहने की आवश्यकता' : विजय चौधरी ने कहा कि बाढ़ की किसी भी आपात स्थिति और बचाव कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री तैयार रखी गई है. उन्होंने लोगों से अपील की कि फिलहाल घबराने या हड़बड़ाने की जरूरत नहीं है, केवल सतर्क रहने की आवश्यकता है. सरकार की ओर से स्थिति की जानकारी समय-समय पर आम लोगों तक पहुंचाई जाएगी.

पश्चिम चंपारण में अलर्ट : गंडक नदी के जलस्तर में संभावित वृद्धि को देखते हुए नदी से सटे इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है. पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों और गंडक नदी के तटवर्ती गांवों में एहतियाती कदम उठाने के लिए संबंधित अधिकारियों और कार्यपालक अभियंताओं को आवश्यक निर्देश दिए हैं.

''किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और केवल जिला प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें. आम लोगों की सुविधा के लिए जिला प्रशासन ने कंट्रोल रूम नंबर भी जारी किया है. किसी भी आवश्यक सूचना या सहायता के लिए 06254-247003 और 06254-247002 पर संपर्क किया जा सकता है.'' - तरनजोत सिंह, जिलाधिकारी, पश्चिम चंपारण
गोपालगंज के 62 पंचायतों पर खतरा : नेपाल से आने वाले पानी के भारी दबाव को देखते हुए बिहार सरकार के निर्देश पर गोपालगंज जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है. जिले के 6 तटीय प्रखंडों सदर, कुचायकोट, मांझा, बैकुंठपुर, बरौली और सिधवलिया की लगभग 62 पंचायतों पर बाढ़ का सीधा प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है.

''जिला प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव कार्य के लिए NDRF की टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया है. जल संसाधन विभाग के अभियंताओं और अंचल अधिकारियों को 24 घंटे तटबंधों की स्थिति पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं. किसी भी सूरत में पैनिक नहीं होना है. 12 बजे रात के बाद ही पानी आने की संभावना है. 162 शरण स्थल चिन्हित किए हैं, कुल 6 प्रखंड है.'' - समीर सौरभ, जिलाधिकारी
मुजफ्फरपुर के इन प्रखंडों में विशेष निगरानी : नेपाल के तिब्बत सीमा से सटे इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ के बाद मुजफ्फरपुर में फ्लैश फ्लड की आशंका को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है. मुख्य सचिव के निर्देश के बाद डीएम कुमार गौरव और एसएसपी ने अधिकारियों के साथ बैठक कर संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की.

''गंडक नदी के किनारे बसे साहेबगंज, सरैया और पारू प्रखंडों में विशेष निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया गया है. संभावित प्रभावित इलाकों पर लगातार नजर रखने के साथ जल संसाधन विभाग को तटबंधों की निगरानी और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है.'' - कुमार गौरव, डीएम, मुजफ्फरपुर
मोतिहारी में हाई अलर्ट : वहीं, पूर्वी चंपारण में गंडक नदी के उफान का सबसे ज्यादा असर पर संग्रामपुर और अरेराज अनुमंडल के दियारा और निचले इलाकों में देखने को मिलता है. संग्रामपुर प्रखंड में गंडक बराज से पानी छोड़े जाने या नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने की स्थिति में कई पंचायतें बाढ़ की चपेट में आ जाती हैं.
''संभावित खतरे को देखते हुए गंडक नदी के किनारे बसे दियारा और निचले इलाकों के लोगों से विशेष सतर्क रहने की अपील की गई है. प्रशासन की ओर से लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे नदी के किनारे जाने से बचें और पानी बढ़ने की स्थिति में बिना देर किए सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों की ओर चले जाएं.'' - सौरभ सुमन यादव, जिलाधिकारी
वैशाली जिला में हाई अलर्ट : गंडक और गंगा नदी के जलस्तर में संभावित वृद्धि को लेकर वैशाली जिला प्रशासन हाई अलर्ट मोड में है. जिला पदाधिकारी वर्षा सिंह के निर्देश पर तटीय, दियारा और निचले इलाकों में राहत एवं बचाव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं. प्रशासन ने किसी भी संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए नौका, मानवबल, चिकित्सा, पशुपालन और राहत शिविर समेत सभी आवश्यक संसाधनों को तैयार रखा है. आपात स्थिति में जिला आपदा नियंत्रण कक्ष के नंबर 06224-260233 और 06224-260234 पर संपर्क किया जा सकता है.
''प्रशासन ने संभावित प्रभावित परिवारों के लिए 100 राहत शिविर और भोजन उपलब्ध कराने के लिए 104 सामुदायिक रसोई तैयार है. लोगों से नदी और तेज धार से दूर रहने तथा आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की गई है. अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने को कहा गया है.'' - वर्षा सिंह, जिला पदाधिकारी
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