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बिहार की आरती गुप्ता पहुंची अंटार्कटिका, विभिन्न पहलुओं पर शोध कर लौटी

मौसम वैज्ञानिक आरती गुप्ता अंटार्कटिका जाने वाली बिहार की पहली बेटी बनीं. विभन्नि पहलुओं पर शोध कर वह वापस लौटी हैं.

Aarti Gupta
अंटार्कटिका में आरती गुप्ता (आरती गुप्ता द्वारा उपलब्ध करवायी गयी तस्वीर)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : December 23, 2025 at 8:01 PM IST

3 Min Read
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नालंदा : बिहार के नालंदा जिला मुख्यालय बिहार शरीफ की रहने वाली मौसम विज्ञानी आरती गुप्ता राज्य की पहली महिला बन गई हैं, जिन्होंने विश्व के सबसे ठंडे स्थान अंटार्कटिका जाने का गौरव प्राप्त किया है. भारत मौसम की पटना शाखा की ओर भेजी गई आरती 45वें भारतीय वैज्ञानिक अंटार्कटिका शीतकालीन अभियान का हिस्सा हैं.

मौसम विभाग की पहली महिला : इस उपलब्धि से आरती गुप्ता को भारतीय मौसम विभाग की पहली महिला बनने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ है. इस टीम में 52 लोग हैं. इनमें वैज्ञानिक, तकनीकी विशेषज्ञ, लॉजस्टिक्सि (तर्कशास्त्री), मेडिकल टीम के सदस्य भी शामिल हैं. सभी अलग-अलग पृष्ठभूमि के होते हुए एक साझा लक्ष्य के लिए कार्य कर रहे हैं.

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टीम के साथ फोटे सेशन के दौरान आरती गुप्ता (आरती गुप्ता द्वारा उपलब्ध करवायी गयी तस्वीर)

''भारत मौसम विज्ञान विभाग में कार्यभार ग्रहण किया, तो पहले ही दिन विभागीय पत्रिका में पूर्व अंटार्कटिका अभियानों के बारे में पढ़ा. उसी समय ठान लिया था कि एक दिन मैं भी अंटार्कटिका जरूर जाऊंगी. किताबों में पढ़ी हुई उस बर्फ़ीली दुनिया को अपनी आंखों से देखना मेरे लिए एक सपने जैसा था, जो आज साकार हो रहा है.''- आरती गुप्ता, अंटार्कटिका पहुंचने वाली मौसम वैज्ञानिक

'काफी कठिन है चयन प्रक्रिया' : आरती गुप्ता ने कहा कि इसके चयन की प्रक्रिया में अंटार्कटिका पहुंचना जितना रोमांचक है, उतना ही कठिन भी था. इसके लिए बहुस्तरीय चयन प्रक्रिया होती है. चयनित उम्मीदवारों का एम्स नई दिल्ली में एक सप्ताह तक शारीरिक व मानसिक फिटनेस की जांच होती है. क्योंकि, एक वर्ष तक परिवार और समाज से दूर रहना मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है.

आईटीबीपी पर्वतारोहण एवं स्कीइंग संस्थान औली में एक माह के प्रशिक्षण के दौरान अत्यधिक ठंड, बर्फ़ीले क्षेत्र व ऊंचाई पर जीवन-यापन की ट्रेनिंग, आपातकालीन हालातों में जीवित रहने की कौशल, विभागीय प्रशक्षिण के बाद दो सप्ताह का विभागीय विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है. इन्हें सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद ही अंतिम रूप से चयन किया जाता है.

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अंटार्कटिका पर लहराता तिरंगा (आरती गुप्ता द्वारा उपलब्ध करवायी गयी तस्वीर)

''अंटार्कटिका का शीतकालीन जीवन अत्यंत कठिन होता है. अत्यधिक ठंड और लंबे समय तक अंधकार, सीमित संसाधन, बाहरी दुनिया से लगभग पूर्ण संपर्क-विच्छेद, मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों के बीच धैर्य, अनुशासन और टीम भावना सबसे महत्वपूर्ण होती है. एक महिला के रूप में इस चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में कदम रखना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा है.''- आरती गुप्ता, अंटार्कटिका पहुंचने वाली मौसम वैज्ञानिक

भविष्य का लक्ष्य? : आरती गुप्ता ने बताया कि उनका लक्ष्य है अंटार्कटिका में अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन, भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना और देश की बेटियों को यह विश्वास दिलाना कि कोई भी सपना असंभव नहीं है. यह संदेश देना है कि लिंग नहीं, बल्कि संकल्प और क्षमता मायने रखती है. उपलब्धि का श्रेय हम अपने परिवार, पति, भारत मौसम विज्ञान विभाग और अपने आत्मवश्विास व परिश्रम को देती हूं.

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मौसम वैज्ञानिक आरती गुप्ता (आरती गुप्ता द्वारा उपलब्ध करवायी गयी तस्वीर)

अंटार्कटिका क्या है? : यहां यह बताना भी जरूरी है कि अंटार्कटिका यानि श्वेत महाद्वीप पृथ्वी का सबसे ठंडा (गर्मी में शुन्य से शीत में -89 डग्रिी सेंटीग्रेड तक), सूखा और हवा वाला महाद्वीप है, जिसका 98 फीसदी भाग दो से ढाई किलोमीटर मोटी बर्फ से ढका हुआ है. वहां कोई मूल निवासी नहीं हैं. अंटार्कटिका संधि (1959) के तहत, इसको रासायनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए समर्पित किया गया है. सभी सैन्य व खतरनाक हमलों पर रोक लगाई गई है. यहां जलवायु परिवर्तन, खगोल वज्ञिान, जीव वज्ञिान और अन्य क्षेत्रों में व्यापक शोध होता है.

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