ETV Bharat / bharat

चंबल का वो गांव जहां हर घर में सैनिक, बेटे की पैदाइश के साथ देखते हैं फौज में भेजने का सपना

भिंड का जामपुरा वह गांव हैं जहां 500 से अधिक रिटायर्ड सैनिक हैं, वहीं 100 से ज्यादा युवा देश की अलग-अलग फोर्सेज में हैं सेवारत.

bhind soldier village jampura
भिंड के जामपुरा गांव में पीढ़ी दर पीढ़ी देश भक्ति (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : December 30, 2025 at 10:38 PM IST

5 Min Read
Choose ETV Bharat

भिंड/ग्वालियर: ग्वालियर-चंबल को वीरों की धरा कहा जाता है क्योंकि इस क्षेत्र के हजारों युवा भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे हैं लेकिन एक गांव ऐसा है जहां हर घर में सैनिक हैं. भिंड का जामपुरा वह गांव हैं जिसकी माटी वीर प्रसूता कही जाती है. इस गांव के बेटों ने रियासत से लेकर देश की सीमा तक पर सुरक्षा का जिम्मा संभाला है. जहां इस गांव में 500 से अधिक रिटायर्ड सैनिक हैं तो वहीं 100 से ज्यादा युवा देश की अलग अलग फोर्सेज में सेवारत हैं. देश भक्ति का जज्बा ऐसा है कि गांव के हर परिवार ने देश को सिपाही दिया है. इनमें कुछ परिवार ऐसे भी हैं जिनकी तीसरी और चौथी पीढ़ियां भारतीय सेना में देश की सेवा कर रही हैं.

गांव में 250 परिवार, 80 फीसदी ने दिया देश को रक्षक

जिन बीहड़ों को डकैतों के लिए बदनाम किया गया, उन्हीं चंबल के बीहड़ों में क्वारी नदी किनारे बसा है जामपुरा गांव. इस गांव में 250 घर हैं और घर में बेटे की पैदाइश के साथ ही ग्रामीण उसे फौज में भेजने का सपना सजा लेते हैं. यही वजह है कि इस गांव के 80 फीसदी घरों के बेटे देश की सेवा में तैनात हैं. लेकिन उससे भी बड़ी बात है कि आज तक इस माटी का कोई बेटा सरहद पर शहीद नहीं हुआ.

More than 500 retired soldiers in Jampura village
भिंड के जामपुरा गांव में 500 से अधिक रिटायर्ड सैनिक (ETV Bharat)

पुरखों से मिला देश भक्ति का जज्बा

जामपुरा गांव में रहने वाले आर्मी से सेवानिवृत कैप्टन विशाल सिंह भदौरिया का परिवार उन गिने चुने परिवारों में शामिल हैं जिन्होंने चार पीढ़ियों से भारतीय सेना में मोर्चा संभाल रखा है. रिटायर्ड कैप्टन विशाल सिंह ढाई साल पहले रिटायर हुए, जिन्होंने अपने जीवन के 30 साल और 4 दिन भारतीय थल सेना के जरिए देशसेवा में अपनी सेवाएं दी हैं. देश भक्ति का यह जज्बा उन्हें अपने पुरखों से मिला है. क्योंकि उनके दादा, पिता और वे खुद भारतीय सेना में शामिल रहे और उनकी अगली पीढ़ी भी इसी और कदम बढ़ा चुकी है.

Retired Army Captain Vishal Singh Bhadauria
रिटायर्ड आर्मी कैप्टन विशाल सिंह भदौरिया (ETV Bharat)

खून में देश भक्ति, देश सेवा में जुटी चौथी पीढ़ी

ईटीवी भारत से बातचीत में रिटायर्ड कैप्टन विशाल सिंह भदौरिया कहते हैं कि, "उनके परिवार में देशभक्ति खून में मिलकर आती है. उनके दादा महिपाल सिंह भदौरिया सबसे पहले भारतीय थल सेना में शामिल हुए थे. उनके बाद पिता बदन सिंह और ताऊ शिवदत्त सिंह ने आर्मी ज्वाइन की थी." करीब 30 साल पहले विशाल सिंह और उनके भाई बृजभान सिंह भी फौज में शामिल हुए और दोनों भाइयों ने कारगिल युद्ध में दुश्मनों के छक्के छुड़ाए. अभी विशाल सिंह का बेटा तो छोटा है लेकिन अगली पीढ़ी के तौर पर भाई बृजभान सिंह का बेटा और उनका भतीजा हरिओम सिंह भदौरिया भी हाल ही में भारतीय नौसेना का हिस्सा बन चुका है.

Subedar Brijbhan Singh Bhadauria
सूबेदार बृजभान सिंह भदौरिया (ETV Bharat)

सरहद की रक्षा में तीन पीढ़ियां

विशाल सिंह के अलावा जामपुरा का एक परिवार ऐसा भी है जहां तीन पीढ़ियां सेना का हिस्सा रहीं. इस परिवार के मुखिया अंग्रेजों की सेना में शामिल हुए थे, इसके बाद उनकी आने वाली पीढ़ियों ने आजादी के साथ देश सेवा में आर्मी जॉइन की. ये परिवार है स्वर्गीय उल्फत सिंह भदौरिया का. उल्फत सिंह भदौरिया आजादी से पहले अंग्रेजों की सेना में बतौर सिपाही शामिल हुए थे. देश आजाद हुआ तो भारतीय सेना का हिस्सा बने. उनके बाद बेटे राजेंद्र सिंह फौज में शामिल हुए और देश सेवा करते हुए राजपूत रेजिमेंट का हिस्सा बने और रिटायर हुए. राजेंद्र सिंह की विरासत को आगे बढ़ाया उनके दोनों बेटों ने, राजेंद्र सिंह के बेटे सतीश सिंह और हरीश सिंह दोनों ही इंडियन आर्मी में हैं.

आज भी 122 बेटे भारतीय सेना में तैनात

इसी गांव के रहने वाले पटवारी सुबोध सिंह भदौरिया का परिवार भी देश सेवा से जुड़ा रहा है. सुबोध सिंह ने बताया कि "उनके दादा के छोटे भाई श्याम सिंह भदौरिया और दादा के दूसरे भाई रिटायर्ड कैप्टन नाथू सिंह भदौरिया भी भारतीय सेना में अपनी सेवायें दे चुके हैं. वे कहतें की जामपुरा में शायद ही कोई घर होगा जिसमे कोई भारतीय सेना में शामिल ना हो. आज भी गांव के 122 बेटे नेवी, आर्मी, बीएसएफ, वायुसेना सहित अन्य सुरक्षा बलों में सिपाही से लेकर कैप्टन के रूप में तैनात हैं जो फक्र की बात है."

bhind every household soldier
बदन सिंह भदौरिया (ETV Bharat)

सिंधिया रियासत में युद्ध लड़ चुके गांव के पुरखे

गांव के पृथ्वीपाल सिंह मिलिट्री में रहे उनके बाद उनके बेटे ज्वाला सिंह भी भारतीय थल सेना में गए, इनके अलावा जामपुरा के बलराज सिंह का परिवार भी देश सेवा में लगा है. सबसे पहले बलराज सिंह ने मिलिट्री जॉइन की उनके बाद उनके तीन बेटे आर्मी में शामिल हुए. और अब उनके बेटों के बेटे भी फौज में हैं. ऐसे ही एक और शख्स इस गांव के पुरखों में शामिल स्वर्गीय मेहताब सिंह भदौरिया हैं जिनका नाम सबसे ऊपर आता है क्योंकि महताब सिंह सिंधिया रियासत के दौरान सेना में शामिल थे उन्होंने उस दौर के तीनों युद्ध भी लड़े थे और उन्हें सेवा के लिए मेडल भी दिए गए थे. हालांकि बाद में उनके बेटे खेती की ओर बढ़ गए लेकिन उनका नाम सबसे पुराने सैनिकों में शुमार है.