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बदरीनाथ धाम चढ़ावा विवाद: आरोप लगाने वाली भैरव सेना के पास ठोस सबूत नहीं, BKTC की जांच जारी, 10 जुलाई तक आएगी रिपोर्ट

अयोध्या के राम मंदिर के बाद सुर्खियों में बदरीनाथ धाम, भैरव सेना ने उठाए सवाल, मंदिर समिति ने कहा-शिकायतकर्ता के पास फिलहाल कोई सबूत नहीं

Badrinath Dham
बदरीनाथ धाम (फोटो- ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : July 6, 2026 at 7:31 PM IST

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Updated : July 6, 2026 at 8:40 PM IST

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देहरादून: बदरीनाथ धाम में चढ़ावे में कथित अनियमितता के आरोपों को लेकर विवाद गहरा गया है. भैरव सेना ने न्यायिक जांच और FIR की मांग की है, जबकि बदरी-केदार मंदिर समिति का कहना है कि जांच जारी है और बिना ठोस साक्ष्य किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.

बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित अनियमितता के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. हिंदू संगठन भैरव सेना ने इस मामले को करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए न्यायिक जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है. दूसरी ओर बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) का कहना है कि शिकायत मिलते ही जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी और जांच रिपोर्ट सामने आने से पहले किसी भी प्रकार के निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा.

भैरव सेना के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री का आरोप (वीडियो- ETV Bharat)

हालांकि, इस मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि आरोप लगाने वाले संगठन ने स्वयं स्वीकार किया है कि उसके पास कथित गड़बड़ी से जुड़ा कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य या CCTV फुटेज मौजूद नहीं है.

भैरव सेना ने मांगी उच्चस्तरीय जांच-

  1. भैरव सेना संगठन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
  2. संगठन का आरोप है कि यदि चढ़ावे से जुड़े आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर सीधा आघात होगा.
  3. भैरव सेना ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की जाए, जो पूरे मामले की जांच करे.
  4. संगठन का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केवल विभागीय जांच पर्याप्त नहीं मानी जा सकती.
  5. इसके साथ ही संगठन ने कथित आर्थिक गबन और चोरी के आरोपों में शामिल लोगों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज करने और उन्हें पद से हटाने की मांग भी की है.

"यदि शासन और मंदिर समिति समय रहते कठोर प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं करती है तो संगठन जनांदोलन शुरू करने को बाध्य होगा. मंदिर परिसर से लेकर सड़कों तक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा."

- अनिल कुमार, जिला अध्यक्ष, भैरव सेना -

वहीं, भैरव सेना के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री ने कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के आवास और कार्यालय के बाहर भी प्रदर्शन किया जाएगा. भैरव सेना का कहना है कि मामले की पारदर्शी जांच ही श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रख सकती है.

BKTC की प्रतिक्रिया, जांच से पहले निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी: भैरव सेना के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए बदरी-केदार मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी (CEO) सोहन रांगड़ ने कहा कि मंदिर समिति इस मामले को गंभीरता से ले रही है और शिकायत मिलते ही आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई थी. उनके अनुसार मंदिर समिति को 2 जुलाई को शिकायत प्राप्त हुई थी और अगले ही दिन 3 जुलाई को जांच के आदेश जारी कर दिए गए थे.

"जांच के लिए वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों की एक समिति गठित की गई है, जिसके सदस्य विभिन्न स्थानों पर कार्यरत पुराने पदाधिकारी हैं. समिति को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं. जांच के लिए न्यूनतम सात दिन का समय निर्धारित किया गया है और 10 जुलाई तक प्रारंभिक निष्कर्ष सामने आने की संभावना है."

- सोहन रांगड़, CEO, बदरी-केदार मंदिर समिति-

रांगड़ ने कहा कि केवल आरोप लग जाने भर से किसी उच्चस्तरीय या न्यायिक जांच की आवश्यकता सिद्ध नहीं हो जाती. इसके लिए कुछ ठोस आधार या प्रारंभिक साक्ष्य होना आवश्यक है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि शिकायतकर्ता के पास कोई वैध प्रमाण है तो उसे मंदिर समिति को उपलब्ध कराया जाए, ताकि उसे भी जांच का हिस्सा बनाया जा सके. उन्होंने यह भी बताया कि जिन कर्मचारियों पर आरोप लगाए गए हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से संबंधित स्थान से हटा दिया गया है तथा जांच के दायरे में आने वाले सभी लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं.

Bhairava Sena Sandeep Khatri
भैरव सेना के अध्यक्ष संदीप खत्री (फोटो- ETV Bharat)

मंदिर समिति के अनुसार जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी या निर्दोष घोषित करना उचित नहीं होगा. CEO ने यह भी कहा कि जिस स्थान को लेकर अनियमितता के आरोप लगाए जा रहे हैं वहां पुराने CCTV कैमरों के अलावा हाल ही में हाई-रिजोल्यूशन कैमरे भी लगाए गए हैं. इनकी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी गई है और यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई होगी तो जांच के दौरान उसके तथ्य सामने आ जाएंगे. आधुनिक निगरानी व्यवस्था के कारण किसी भी अनियमितता को लंबे समय तक छिपाया नहीं जा सकता.

"जिस व्यक्ति पर चढ़ावे में अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं, उसके खिलाफ कुछ लोगों द्वारा उसकी सेवाओं और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. यह एक अलग विषय है और उसे अलग से देखा जाएगा. फिलहाल मंदिर समिति की पहली प्राथमिकता चढ़ावे में कथित गड़बड़ी से जुड़े आरोपों की जांच करना है. यदि सेवाओं या नियुक्ति से संबंधित कोई शिकायत या तथ्य सामने आते हैं तो उस पहलू की भी नियमानुसार अलग जांच की जाएगी, लेकिन वर्तमान में समिति का पूरा ध्यान चढ़ावे से जुड़े आरोपों की सत्यता का पता लगाने पर केंद्रित है."

- सोहन रांगड़, CEO, बदरी-केदार मंदिर समिति-

आरोप लगाने वाले के पास नहीं फिलहाल कोई सबूत: इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण पहलू तब सामने आया जब आरोपों के आधार को लेकर भैरव सेना से सवाल पूछे गए. मंदिर समिति के CEO ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या संगठन के पास इस मामले से जुड़ा कोई CCTV फुटेज, दस्तावेज या अन्य प्रमाण हैं तो उसे समिति को सौंपा जाना चाहिए, ताकि जांच अधिक प्रभावी और तथ्यपरक हो सके. हालांकि, जब भैरव सेना के पदाधिकारियों से पूछा गया कि क्या उनके पास कथित गड़बड़ी से संबंधित कोई CCTV फुटेज मौजूद हैं, तो उन्होंने इससे इनकार कर दिया. इतना ही नहीं, जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने स्वयं ऐसा कोई फुटेज देखा है, तब भी उन्होंने नकारात्मक जवाब दिया.

"हमें मंदिर समिति के कुछ कर्मचारियों से इस संबंध में जानकारी मिली थी. कर्मचारियों द्वारा दी गई सूचनाओं के आधार पर ही संगठन ने मामला उठाया है. वास्तव में कोई घोटाला हुआ है या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा."

-संदीप खत्री, भैरव सेना के अध्यक्ष-

उधर, मंदिर समिति का कहना है कि यदि बिना किसी ठोस आधार और प्रमाण के केवल सुनी-सुनाई बातों के आधार पर आरोप लगाए जाते हैं तो इससे न केवल मंदिर समिति की छवि प्रभावित होती है, बल्कि बदरीनाथ धाम जैसे पवित्र तीर्थ और उत्तराखंड की प्रतिष्ठा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. ऐसे में अब पूरे मामले की सच्चाई जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आ सकेगी.

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Last Updated : July 6, 2026 at 8:40 PM IST