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बेंगलुरु में डिजिटल अरेस्ट कर 32 करोड़ की महाठगी, धोखेबाजों से सावधान!

बेंगलुरु के एक तकनीकी कर्मचारी को डिजिटल गिरफ्तारी में 31.83 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. कर्नाटक का अबतक का ये सबसे बड़ा मामला है.

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डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी देकर 31.83 करोड़ रुपये की महाठगी. (ETV Bharat (प्रतीकात्मक तस्वीर))
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : November 17, 2025 at 2:52 PM IST

3 Min Read
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बेंगलुरु: एक 57 वर्षीय आईटी कर्मचारी को डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी देकर 31.83 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है. कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु इंदिरानगर निवासी 57 वर्षीय महिला की शिकायत पर पूर्वी संभाग के सीईएन पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने बताया कि डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले के कारण राज्य में किसी व्यक्ति द्वारा गंवाई गई यह अब तक की सबसे बड़ी रकम है.

पुलिस के अनुसार 15 सितंबर, 2024 को एक जालसाज ने डीएचएल कूरियर कंपनी के प्रतिनिधि के रूप में शिकायतकर्ता को फोन किया. उसने कहा, "आपके नाम से तीन क्रेडिट कार्ड, चार पासपोर्ट और प्रतिबंधित एमडीएम दवाओं वाला एक पैकेज अंधेरी, मुंबई स्थित कूरियर सेंटर पर पहुंचा है." हालांकि, शिकायतकर्ता ने कहा, "मैं बेंगलुरु में रहती हूं और मेरा इस पैकेज से कोई लेनादेना नहीं है." लेकिन जालसाज ने, जिसने कहा, "यह एक साइबर अपराध हो सकता है, क्योंकि फोन नंबर पैकेज से जुड़ा है."

महिला को साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा. इससे पहले कि शिकायतकर्ता कोई जवाब दे पाती, उसने कॉल सीबीआई अधिकारी बनकर एक व्यक्ति को ट्रांसफर कर दी. फिर, महिला की जानकारी हासिल करने के बाद, जालसाजों ने उसे धमकाया कि वे उस पर नजर रख रहे हैं और स्थानीय पुलिस से संपर्क न करने की चेतावनी दी. उन्होंने यह भी धमकी दी कि अगर उसने किसी को इस बारे में बताया, तो उसके परिवार को भी मामले में फंसा दिया जाएगा.

अपने बेटे की शादी नजदीक आने से चिंतित महिला ने धोखेबाजों के कहे अनुसार ही किया. कुछ दिनों बाद, खुद को सीबीआई अधिकारी प्रदीप सिंह बताने वाले एक व्यक्ति ने वीडियो कॉल करके महिला को धमकाया कि वह उसे 'डिजिटल अरेस्ट' कर रहा है. फिर, राहुल यादव नाम के एक अन्य व्यक्ति को एक हफ्ते तक महिला पर नजर रखने का काम सौंपा गया.

शिकायतकर्ता ने बताया कि इस दौरान वह घर से काम कर रही थी. 23 सितंबर, 2024 को प्रदीप सिंह ने महिला को आरबीआई की वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) को अपनी संपत्ति घोषित करने का निर्देश दिया. महिला ने जैसा कहा गया था वैसा ही किया. इसके बाद धोखेबाजों ने चरणों में पैसे वसूल लिए.

धोखेबाजों के निर्देशों के अनुसार, पीड़िता ने अपनी एफडी की रकम को छोड़कर, लगभग 187 लेन-देन में 31.83 करोड़ रुपये धोखेबाजों को हस्तांतरित कर दिए. धोखेबाजों ने महिला को आश्वासन दिया था कि हस्तांतरित धन का सत्यापन किया जाएगा और फरवरी 2025 तक वापस कर दिया जाएगा. पुलिस ने बताया कि उन्होंने महिला को एक क्लियरेंस सर्टिफिकेट भी दिया था.

जब धोखेबाजों ने पैसे न लौटाने के कारण बताने शुरू किए, तो महिला को शक हुआ और उसने 14 नवंबर, 2025 को बेंगलुरु पूर्व संभाग साइबर अपराध पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने अब एफआईआर दर्ज कर ली है और जाँच शुरू कर दी है. शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में बताया है कि बेटे की शादी के डर और अन्य कारणों से शिकायत दर्ज कराने में देरी हुई.

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