बेंगलुरु: इकलौती बेटी की मौत के बाद रिश्वत देने पर मजबूर हुए रिटायर्ड अधिकारी, दो पुलिसकर्मी निलंबित
बेंगलुरु में बीपीसीएल के रिटायर्ड सीएफओ शिवकुमार की 34 वर्षीय बेटी की हाल ही में ब्रेन हेमरेज के कारण मृत्यु हो गई थी.

Published : October 30, 2025 at 9:05 PM IST
बेंगलुरु: भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के एक सेवानिवृत्त मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) ने अपने पोस्ट में सरकारी सिस्टम में हर चरण में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहरी सड़ांध को उजागर किया है. शिवकुमार नाम के इस पूर्व अधिकारी ने लिंक्डइन पर बताया कि बेंगलुरु में अपनी इकलौती बेटी की मौत के बाद उन्हें कई बार रिश्वत देने के लिए मजबूर होना पड़ा.
शिवकुमार की 34 वर्षीय बेटी अक्षया की हाल ही में ब्रेन हेमरेज के कारण मृत्यु हो गई थी. बेटी के निधन से सदमे में होने के बावजूद शिवकुमार ने लिखा कि उन्हें हर कदम पर पैसे देने पड़े- एम्बुलेंस की व्यवस्था करने से लेकर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करवाने तक. उनके इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर सरकारी सिस्टम में व्याप्त असंवेदनशीलता और भ्रष्टाचार को लेकर व्यापक आक्रोश और चर्चाओं को जन्म दिया है.
अधिकारियों में कोई दया नहीं...
शिवकुमार ने अपनी भावुक पोस्ट में खुलासा किया कि उनकी बेटी की मौत के बाद, शव को ले जाने के लिए एम्बुलेंस मंगवाने के लिए उन्हें रिश्वत देनी पड़ी. उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने और जारी करने के लिए भी पैसे मांगे. बेलंदूर पुलिस स्टेशन में, अधिकारियों ने कथित तौर पर एफआईआर दर्ज करने के लिए रिश्वत मांगी, और इंस्पेक्टर ने शोकाकुल परिवार के साथ कथित तौर पर अहंकारी व्यवहार किया.
“In connection with the incident mentioned in Sivakumar’s tweet, one PSI and one Police Constable of Bellandur Police Station have been immediately suspended.
— DCP Whitefield Bengaluru (@dcpwhitefield) October 30, 2025
शिवकुमार ने लिखा, "अपनी इकलौती बेटी को खोने का दर्द असहनीय था, लेकिन उससे भी ज्यादा दुख अधिकारियों की बेरहमी से हुआ, जो हर कदम पर पैसे मांगते थे- पुलिस से लेकर नगर निगम के कर्मचारियों और श्मशान घाट के कर्मचारियों तक." उन्होंने आगे कहा, "मेरे पास उन्हें देने के लिए पैसे थे, लेकिन गरीब लोग क्या करेंगे?"
पोस्ट सामने आने के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई
उधर, शिवकुमार की पोस्ट चर्चा में आने के बाद, बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड डिवीजन के डीसीपी के. परशुराम ने बेलंदूर पुलिस स्टेशन के दो अधिकारियों - पीएसआई संतोष और कांस्टेबल गोरखनाथ - को आगे की जांच तक निलंबित करने का आदेश दिया.
जेडीएस युवा विंग के अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और पोस्ट का स्क्रीनशॉट एक्स पर साझा किया. उन्होंने लिखा, "यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, क्रूरता है. इसमें शामिल हर अधिकारी को सजा मिलनी चाहिए."
भ्रष्टाचार की हालिया घटनाएं
यह घटना कर्नाटक में सरकारी अधिकारियों से जुड़ी रिश्वतखोरी की कई खबरों के बीच सामने आई है. हावेरी जिले के हंगल कस्बे में हाल ही में एक मामले में, लोकायुक्त ने एक राजस्व अधिकारी और दो सहायकों को भूमि अभिलेख सुधार को मंजूरी देने के लिए कथित तौर पर 12,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा था. आरोपियों - शिरस्तेदार तम्मन्ना कांबले और शिवानंद बडिगर - को एक स्थानीय निवासी शंकरप्पा गुमागुंडी से पैसे लेते हुए पकड़ा गया था.
शिवकुमार की पोस्ट ने सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी को सामान्य मानने के प्रति जनता के गुस्से को फिर से भड़का दिया है, खासकर ऐसे समय में जब नागरिक सबसे अधिक असुरक्षित होते हैं.
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