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बिहार-बंगाल के बीच दो नई बाईपास रेल लाइनों को मिली मंजूरी, देखें रूट

रेल मंत्रालय ने बिहार के बारसोई जंक्शन को बाईपास करने वाली नई रेल लाइन को विशेष परियोजना घोषित किया है. रिपोर्ट-आशीष सिन्हा

North East Rail Project
बिहार-बंगाल को रेलवे की बड़ी सौगात (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : August 26, 2026 at 12:18 PM IST

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किशनगंज: रेल मंत्रालय ने पूर्वोत्तर भारत, उत्तर बंगाल और बिहार की रेल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ बनाने के लिए दो बेहद महत्वपूर्ण फैसलों को आधिकारिक मंजूरी दे दी है. मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के तहत दो नई बाईपास रेल लाइनों को 'विशेष रेल परियोजना' घोषित किया गया है.

बिहार को मिलेगा नया बाईपास: इस आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, बिहार राज्य के लिए एक बड़ी राहत की खबर है. इसके तहत संजयग्राम से ढाचना स्टेशन के बीच 1.95 किलोमीटर लंबी नई बाईपास रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा. यह नई रेल लाइन बिहार के महत्वपूर्ण बारसोई जंक्शन को पूरी तरह बाईपास करेगी.

यात्रा समय की बचत: बारसोई जंक्शन को बाईपास करने वाली इस लाइन से कटिहार, पूर्णिया और सीमांचल क्षेत्र की ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी. जिन ट्रेनों को बारसोई जंक्शन पर रुकने की जरूरत नहीं है, वे जंक्शन के आउटर या प्लेटफॉर्म पर फंसे बिना सीधे निकल सकेंगी. इससे ट्रैफिक का दबाव और यात्रियों के यात्रा समय में बड़ी बचत होगी.

North East Rail Project
कटिहार जिले का बारसोई जंक्शन (ETV Bharat)

व्यापार को मिलेगी गति: उत्तर बंगाल और पूर्वोत्तर भारत की ओर आने-जाने वाली मालगाड़ियों को इस बाईपास से एक सीधा और वैकल्पिक रूट मिलेगा. लाइन ब्लॉक या अत्यधिक ट्रैफिक की स्थिति में यह बाईपास संजीवनी का काम करेगा. इससे बिहार के व्यापारियों का माल कम समय और कम लागत में अपने गंतव्य तक पहुंच सकेगा.

बागडोगरा-गुलमा बाईपास को भी मंजूरी: इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में बागडोगरा और गुलमा के बीच 1.25 किलोमीटर लंबी नई बाईपास रेल लाइन को मंजूरी मिली है. परियोजना ट्रेनों को सिलीगुड़ी जंक्शन को बाईपास करने का मार्ग देगी. इससे मौजूदा रेल ढांचे का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित होगा.

सीमांचल को फायदा: मौजूदा व्यवस्था में बागडोगरा की दिशा से गुलमा जाने वाला रेल यातायात सिलीगुड़ी जंक्शन से होकर गुजरता है जिसकी दूरी करीब 9.27 किमी है. नया बाईपास बनने से रेलवे को जंक्शन से अलग एक नया परिचालन मार्ग मिल जाएगा. इस दूसरे बाईपास का सीधा और बड़ा फायदा किशनगंज जिले के ठाकुरगंज और सीमांचल के रास्ते चलने वाली ट्रेनों को भी मिलेगा.

North East Rail Project
रेलवे की ओर से जारी अधिसूचना (Ministry of Railways)

इंजन बदलने का झंझट खत्म: वर्तमान में इन रूटों पर चलने वाली कुछ ट्रेनों को सिलीगुड़ी में 'इंजन रिवर्सल' की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. बाईपास बनने के बाद इंजन बदलने का समय बचने से यात्रा कम समय में पूरी होगी.

'चिकन नेक' के लिए खास रणनीतिक महत्व: यह परियोजना केवल यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा और व्यापारिक दृष्टिकोण से भी अहम है. सिलीगुड़ी क्षेत्र 'चिकन नेक' का अति संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा है. किसी भी आपातकालीन व्यवधान की स्थिति में यह वैकल्पिक रेल मार्ग सेना और रसद की आवाजाही के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा.

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