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बांग्लादेशियों के भारतीय पासपोर्ट, मध्य प्रदेश से दो बांग्लादेशी गिरफ्तार, 70 फर्जी पासपोर्ट मिले

फर्जी डॉक्यूमेंट्स से पासपोर्ट बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, ग्वालियर STF ने दो बांग्लादेशियों को पकड़ा, डबरा के बौद्ध विहार में रह रहे थे आरोपी. पीयूष श्रीवास्तव की रिपोर्ट.

Bangladeshi arrested from gwalior betul dabra
मध्य प्रदेश से दो बांग्लादेशी गिरफ्तार (Getty Images)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : September 8, 2026 at 7:32 AM IST

3 Min Read
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गवालियर : एक ओर भारत में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों का पता लगाने और उन्हें उनके देश वापस भेजने के लिए भारत सरकार द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है, तो दूसरी ओर हाई सिक्योरिटी प्रोसेस से मिलने वाले भारतीय पासपोर्ट सिस्टम में सेंध लगने का खुलासा हुआ है. इस फर्जी पासपोर्ट कांड के तार सीधे तौर पर ग्वालियर के डबरा क्षेत्र से जुड़े हैं, जहां एक ही इलाके में स्थानीय पतों पर 70 बंगलादेशियों के फर्जी पासपोर्ट बनने की बात सामने आई है. इसकी जांच में ग्वालियर एसटीएफ ने दो आरोपियों को हिरासत में भी लिया है.

एक बैतूल तो दूसरा आरोपी ग्वालियर से गिरफ्तार

दरअसल, ग्वालियर के डबरा के बौद्ध विहार क्षेत्र के एक ही घर के पते पर एक दो नहीं लगभग 20 बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट बने हैं. ये खुलासा एसटीएफ की कार्रवाई से हुआ. एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए डबरा से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो बांग्लादेशी हैं. इन पासपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेशियों को डबरा के बौद्ध विहार में रहने वाले बौद्ध धर्म के अनुयायी दिखाया गया है. साथ ही सभी पासपोर्ट में रियाल चौधरी ने गवाह के तौर पर अपने हस्ताक्षर किए हैं, जांच में इस बात की पुष्टि होने के बाद ग्वालियर एसटीएफ की टीम ने आरोपी रियाल चौधरी और उसकी निशानदेही पर उसके एक साथी विप्लव अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया है. दोनों हो आरोपी बांग्लादेशी हैं, जो पहचान बदलकर पासपोर्ट के जरिए ग्वालियर और बैतूल में रह रहे थे.

Bangladeshis fake Indian passports gwalior police
ग्वालियर एसटीएफ ने दो बांग्लादेशियों को पकड़ा (Etv Bharat)

अब तक फर्जी दस्तावेजों से 70 पासपोर्ट का खुलासा

ग्वालियर एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया से जब हमने संपर्क किया तो उन्होंने बताया, '' फर्जी पासपोर्ट मामले की जांच के दौरान बैतूल से रियाल चौधरी और उसके साथी विपलव अधिकारी को ग्वालियर से गिरफ्तार किया है. शुरुआती जांच में 20 फर्जी पासपोर्ट मिले थे लेकिन जांच आगे बढ़ी तो 50 और ऐसे ही फर्जी पासपोर्ट और मिले हैं जो प्रदेश के अलग-अलग जिलों के पतों पर हैं. इस तरह ग्वालियर एसटीएफ ने कुल 70 फर्जी पासपोर्ट पकड़े हैं.''

लापरवाही या मिलीभगत, जांच जारी

इस पूरे मामले में सवाल तह भी खड़ा हो रहा है कि, भारत में पासपोर्ट नागरिकता का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है. ऐसे में इसे बनवाने के लिए कई तरह के कड़े सिक्योरिटी चेक और वेरिफिकेशन होते हैं. उसके बाद ही पासपोर्ट जारी किया जाता है, ऐसे में बिना वेरिफिकेशन और सत्यापन के फर्जी दस्तावेजों से डबरा-ग्वालियर में इतने सारे पासपोर्ट कैसे क्लियर हुए ये जांच का विषय है. जांच शुरू की गई है कि पासपोर्ट वेरिफ़िकेशन में लापरवाही बरती गई या संबंधित अधिकारियों की मिली भगत रही.

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बंगाल और असम के लिए एसटीएफ की टीमें रवाना

आरोपी रियाल चौधरी से पूछताछ में एसटीएफ को पता चला की, असम के रास्ते वह 1971 में ही भारत में आ गया था और उसका साथी बंगाल के रास्ते मध्य प्रदेश आया. ऐसे में आरोपियों से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर एसटीएफ की दो टीमें बंगाल और असम के लिए रवाना हुई हैं, ऐसे में इस फ़र्ज़ीवाड़े में और भी आरोपियों के पकड़े जाने की संभावना एसटीएफ अधिकारी ने जताई है.