कुरुक्षेत्र में उगा "बाहुबली" शलजम, ऑर्गेनिक खेती कर किसान भाईयों ने किया कमाल
कुरुक्षेत्र के किसानों ने ऑर्गेनिक किचन गार्डन में 8 किलो का "बाहुबली" शलजम उगाकर अनोखी मिसाल कायम की है.

Published : February 18, 2026 at 5:13 PM IST
कुरुक्षेत्र: हरियाणा के कुछ किसान रसायनिक खेती को छोड़कर ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती का रुख कर रहे हैं. साथ ही कई किसान ऑर्गेनिक खेती में कुछ ना कुछ नया भी कर रहे हैं. ऐसे ही दो किसान भाई कुरुक्षेत्र के अमीन (अभिमन्युपुर) गांव के रहने वाले हैं, जो अपने खेत में अपने खुद के खाने के लिए किचन गार्डन ऑर्गेनिक तरीके से चला रहे हैं. ये दोनों अपने किचन गार्डन में ऑर्गेनिक तरीके से सब्जियां उगा रहे हैं. खास बात ये है कि इन दोनों भाइयों ने अपने किचन गार्डन में 8 किलोग्राम का भीमकाय शलजम उगाया है जिसे देखकर लोग हैरान हैं.
8 किलोग्राम की शलगम देख सभी हैरान: कुरुक्षेत्र के अमीन गांव के किसान अश्वनी कुमार शर्मा ने ईटीवी भारत को बताया कि, "हम खेती करने का शौक रखते हैं. पिछले 45 साल से हम दोनों भाई साथ मिलकर खेती कर रहे हैं. करीब 30 एकड़ में हम खेती करते हैं, खेत में कुछ जगह हमने ऑर्गेनिक किचन गार्डन के लिए रखी हुई है, जिस पर हम किसी भी प्रकार के रसायन का प्रयोग नहीं करते. हमने अपने इस किचन गार्डन में 8 किलोग्राम का शलजम तैयार किया है, जिसका पत्तों के साथ करीब 15 किलोग्राम वजन मिला है."
ऑर्गेनिक खेती कर उगाया शलजम: अश्वनी कुमार शर्मा ने आगे कहा कि, "ये ऑर्गेनिक खेती का ही कमाल है, जो इतनी बड़ी शलजम हमारे खेत में तैयार हुई है. हमने इस शलजम को सर्दियों के सीजन में अपने खेत में लगाया था. अक्टूबर महीने में हमने इसकी रोपाई की थी. इसमें पानी की लागत भी बहुत कम होती है. हालांकि जब ये हमारे खेत में लगी हुई थी, तब हमने नहीं सोचा था कि इसका इतना वजन होगा, लेकिन जब हमने इसको अपने खेत से उखाड़कर गांव में जाकर इसका वजन किया तो हर कोई इस शलजम को देखकर हैरान हो गया. हम खुद भी सोचते थे कि ये तीन से चार किलोग्राम तक का होगा, लेकिन जब इसका वजन किया तो हम हैरान थे. अब इन शलजमों को देखने लोग दूर-दूर से हमारे घर पहुंच रहे हैं. लोग इस अद्भुत खेती की तारीफ कर रहे हैं."

9 फरवरी को खेत से उखाड़ी थी शलजम: किसान अश्वनी कुमार शर्मा के भाई राजीव शर्मा ने ईटीवी भारत को बताया कि, "हमने इस शलजम को अपने खेत से 9 फरवरी को उखाड़ा था. उस समय इसके पत्तों के साथ इसका वजन 15 किलोग्राम था. पत्ते काटकर इसका वजन 8 किलोग्राम निकला, जबकि पत्तों का वजन 7 किलोग्राम था. हर कोई इसको देखकर हैरान है. हम खुद भी इसको देखकर हैरान थे. जब रिश्तेदारों को इस बात का पता चला तो उन्होंने कुरुक्षेत्र शहर में इसको देखने के लिए अपने घर पर मंगवाया और वहीं पर कुछ दिन रखा. हमारे रिश्तेदारों के घर पर शहर में भी बहुत लोग इसको देखने के लिए आए थे. हमें खेती करते हुए करीब 35 साल हो गए हैं, हालांकि हमने अपने जीवन में इतनी बड़ी शलजम नहीं देखी थी."

किचन गार्डन में पहले भी कर चुके अच्छी सब्जी तैयार: किसान राजीव ने आगे बताया कि, "हम अपने किचन गार्डन में हर मौसम की सब्जी लगाते हैं, जो शुद्ध ऑर्गेनिक होती है. हम मौसम के अनुसार अलग-अलग सब्जियां लगाते हैं. पहले भी हमारे इस किचन गार्डन में लगाई हुई सब्जियां काफी अच्छी हुई हैं. पहले भी हमने करीब चार किलोग्राम का चुकंदर, 6 किलोग्राम की मूली, 3 किलोग्राम से ऊपर की पत्ता गोभी और फूलगोभी भी अपने इस किचन गार्डन में उगाई हुई है. लेकिन अब इस शलजम ने हमें और भी ज्यादा मशहूर कर दिया है, क्योंकि आज तक इतनी बड़ी शलजम ना तो हमने कभी देखी और न ही सुनी है. हम अपने खाने के लिए इस किचन गार्डन में गन्ना, हरी सब्जियां, प्याज, फल-फ्रूट सभी लगाए हुए हैं. अपने खेत में असम राज्य की काजी नेमू वैरायटी का नींबू का पौधा भी लगाया हुआ है, जिसकी ग्रोथ भी काफी अच्छी है. ये अभी बंपर पैदावार दे रहा है. करीब ढाई साल का पौधा है, जिससे एक क्विंटल तक नींबू का उत्पादन हम ले रहे हैं."

करीब 25 सालों से कर रहे ऑर्गेनिक फार्मिंग: किसान राजीव ने कहा कि, "हम दोनों भाई मिलकर खेती करते हैं. हमारा परिवार इकट्ठा रहता है. बीमारियों से बचने के लिए हम खुद के खाने के लिए ऑर्गेनिक किचन गार्डन कर रहे हैं. हालांकि बड़े स्तर पर ऑर्गेनिक खेती करना चाहते हैं, लेकिन मार्केटिंग की समस्या की वजह से हम बड़े स्तर पर इसको नहीं कर पाते, इसलिए हम अपने खाने के लिए ऑर्गेनिक किचन गार्डन चला रहे हैं. हमें 25 साल हो गए, इस किचन गार्डन में हमने आज तक कभी रसायन नहीं डाला. हमने इसमें गोबर की खाद का प्रयोग किया. इससे पैदावार अच्छी रही. ऑर्गेनिक खेती करने पर शुरुआत में थोड़ा कम उत्पादन होता है. हालांकि बाद में खेती अच्छी होती है."

ऑर्गेनिक खेती से ही हो पाया यह संभव: किसान राजीव ने आगे कहा कि, "साधारण खेती हर कोई करता है, लेकिन 8 किलोग्राम की शलजम तैयार होना, यह सिर्फ ऑर्गेनिक खेती में ही हो सकता है. 8 किलोग्राम की शलजम के कारण हमें नई पहचान मिली है. हम पहली बार 1995 में ऑर्गेनिक खेती की ट्रेनिंग लेने के लिए सरकारी कृषि संस्थान में गए थे, तब से ही हम इस खेती को करते आ रहे हैं. पहले सरकार और कृषि विभाग के संस्थानों द्वारा हमें सम्मानित भी किया जा चुका है. काफी अच्छा लगता है, जब आप दूसरे किसानों से बेहतर करते हो और आपकी हर जगह तारीफ होती है. मेरी दूसरे किसानों से अपील है कि वे भी ऑर्गेनिक खेती का रुख करें. भले शुरुआत में अच्छी पैदावार ना हो, हालांकि बाद में जमीन की मिट्टी भी उपजाऊ हो जाएगी और पैदावार भी अच्छी रहेगी. साथ ही हम जहर वाले फल और सब्जियां नहीं खाएंगे."

जिला बागवानी अधिकारी ने भी की किसानों की तारीफ: कुरुक्षेत्र जिला बागवानी अधिकारी डॉ. शिवेंदु प्रताप सोलंकी ने भी दोनों किसानों की सराहना की. उन्होंने कहा कि, "ये किसान का काफी अच्छा प्रयास है. किसान ने मेहनत करके ऑर्गेनिक तरीके से 8 किलोग्राम की शलजम तैयार की है, जो किसान की मेहनत को दिखाता है. दूसरे किसानों को भी ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती की तरफ बढ़ना चाहिए. कुछ किसानों को लगता है कि ऑर्गेनिक खेती में उत्पादन कम होता है, लेकिन दोनों किसान भाई ऑर्गेनिक खेती में दूसरे किसानों के लिए एक मिसाल हैं, जिन्होंने साबित किया है कि अगर ऑर्गेनिक तरीके से सही खेती की जाए तो उसमें अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है. इन किसानों ने ऑर्गेनिक तरीके से इस शलजम को तैयार किया है. इससे दूसरे किसानों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए."


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