ETV Bharat / bharat

क्या आपने कभी 'बेल की चाय' पी है? विदेशी भी इसके दीवाने, स्वाद के साथ-साथ इन बीमारियों में असरदार!

क्या आपने कभी 'बेल चाय' पी है? भगवान बुद्ध की नगरी बोधगया में टूरिस्ट सीजन के दौरान यह टूरिस्ट के बीच काफी पॉपुलर है. पढ़ें..

Bael Tea Shop in Gaya
गया में बढ़ी बेल की चाय की डिमांड (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Bihar Team

Published : January 5, 2026 at 5:34 PM IST

11 Min Read
Choose ETV Bharat

रिपोर्ट: सरताज़ अहमद

गयाजी: दुनिया के कई देशों में चाय बेहद लोकप्रिय है. आप भी चाय के शौकीन हो सकते हैं. दूध और नींबू वाली चाय के साथ-साथ ग्रीन टी और ब्लैक टी पीते हों लेकिन क्या आपने कभी बेल की चाय पी है? अगर नहीं तो एक बार ट्राई करिये. इस चाय में तंदुरुस्त सेहत का राज छुपा है. वैसे तो यह हर जगह आसानी से तो नहीं मिलती है लेकिन बिहार के गया में इन दिनों हर किसी की जुबान पर इसका स्वाद है.

पीकर कहेंगे 'वाह बेल वाह बेल': थाईलैंड, जापान, वियतनाम, भूटान, म्यांमार और श्रीलंका जैसे देशों के लोग हर दिन बेल की चाय पीते हैं. ये चाय आम चाय की तुलना में महंगी होती है. अपने देश में हर जगह आसानी से मिलती भी नहीं है. भगवान बुद्ध की नगरी और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल बोधगया में आकर आप भी इस चाय की चुस्की ले सकते हैं. बोधगया में वुड एप्पल यानी के बेल की चाय इन दिनों खूब बिक रही है, जिसको पीने वालों की जुबान पर बस यही शब्द होते हैं 'वाह बेल वाह'.

बोधगया में हर किसी की जुबान पर बेल चाय का स्वाद (ETV Bharat)

रंजन बेच रहे हैं बेल चाय: बोधगया महाबोधि मंदिर मुख्य द्वार के रास्ते पर 30 वर्षीय रंजन बेल चाय और बेल स्लाइस 'सूखा बेल' बेच रहे हैं. रंजन के पास बीकॉम और स्पेनिश भाषा में डिप्लोमा की डिग्रीधारी रंजन की चाय बहुत खास है. इस खास चाय को तैयार करने के लिए वह पहले कच्चे बेल को स्लाइस में काटते हैं और फिर उसे सूखा कर सख्त बनाते हैं. इसके बाद उससे चाय तैयार करते हैं.

Bael Tea Shop in Gaya
ग्राहकों को पसंद आ रही है बेल चाय (ETV Bharat)

रंजन कुमार कहते हैं कि असल में अपने देश में अधिकतर लोग चाय का सेवन करते हैं. अधिक चीनी और चाय पत्ती के उपयोग से कई तरह की बीमारी भी हो सकती है. उनके पिता भी काफी चाय पिया करते हैं, उन्हें शुगर भी है लेकिन फिर भी वो चाय नहीं छोड़ते हैं. इससे उनके परिवार के लोगों को उनकी चिंता होती है. वह हमेशा चाहते थे कि उनके पिता शुगर वाली चाय का सेवन नहीं करें. इसके लिए वह एक ऐसी चाय की तलाश में थे, जो पीने में स्वादिष्ट भी हो और उससे सेहत बिगड़ने की बजाय बेहतर हो.

थाईलैंड से बेल चाय बनाना सीखा: रंजन कुमार ने कई बड़ी कंपनियों में काम किया है. जॉब के दौरान ही वो थाईलैंड गए थे. जहां उन्होंने पहली बार बेल चाय पी थी. वे कहते हैं कि जब उन्होंने इस चाय का सेवन किया तो उन्हें पेट से संबंधित कई बीमारियों में फायदे महसूस हुए. जिसके बाद उन्होंने वहां के लोगों से इसकी जानकारी ली. स्थानीय लोगों से उन्हें पता चला कि असल में ये तो हमारे देश में पाए जाने वाले बेल फल से बनी चाय है. इसके बाद मैंने बेल चाय की रेसिपी सीखी और जब भारत लौटा तो इसे बनाना शुरू कर दिया.

Bael Tea Shop in Gaya
बेल चाय दुकान के संचालक रंजन कुमार (ETV Bharat)

"थाईलैंड में ही मैंने बेल की चाय को बनाने की रेसिपी सीखा और यहां आने के बाद उसे ट्रायल के तौर पर घर में बनाकर इस्तेमाल किया. पिताजी को भी ये चाय काफी अच्छी लगी. शुरुआती दौर में अपने माता-पिता के लिए बेल चाय बनाता था लेकिन फिर टी स्टॉल शुरू कर दिया. ग्राहकों को भी ये चाय पसंद आ रही है. विशेषकर जो विदेशी पर्यटक आते हैं, वो खूब पीते हैं. मैं तो हर किसी से कहूंगा कि बेल की चाय ट्राई करिये, सेहत के लिए यह काफी फायदेमंद है."- रंजन कुमार, बेल चाय दुकान के संचालक

क्या कहते हैं विदेशी पर्यटक?: रंजन के स्टॉल पर तिब्बत निवासी शुंग सॉन्ग रूप बेल चाय पीते हुए इसके फायदे भी गिनवाते हैं. वो बताते हैं कि बोधगया में उन्हें ये चाय 30 रुपये से लेकर 50 रुपये प्रति कप मिल रही है. छोटी कप में इसकी कीमत 30 रुपये है, उनके यहां भी इतनी ही कीमत में मिलती है. वो इस का सेवन सालों भर करते हैं. जब लद्दाख में होते हैं तो सर्दी के मौसम में खूब पीते हैं. वे कहते हैं कि पहले जब बोधगया आते थे तो सूखा बेल अपने साथ लेकर आते थे और फिर उसकी चाय बना कर पीते थे लेकिन अब इस दुकान पर ही आकर रोज बेल की चाय पी लेते हैं.

Bael Tea Shop in Gaya
विदेशी पर्यटकों को बेल चाय पसंद (ETV Bharat)

"बेल की चाय का स्वाद तीखा या कैसेंधा नहीं होता है. पका हुआ बेल मीठा होता है लेकिन ये कच्चे में काटकर सुखाया जाता है, इसलिए पके बेल की तरह मीठा तो नहीं होता है लेकिन ये इतना भी फीका नहीं होता है कि आप नहीं पी पाएं. हमारे लिए तो ये अच्छी बात है कि बोधगया में भी बेल की चाय पी रहे हैं."- शुंग सॉन्ग रूप, विदेश पर्यटक

कंट्रोल में रहता है शुगर: वहीं, लद्दाख के मटुक कहते हैं कि वो लद्दाख में इस चाय का सेवन करते हैं. बोधगया में पहले ये नहीं मिलती थी लेकिन अब मिलने लगी है. वह बोधगया में पहली बार बेल की चाय पी रहे हैं. वो इसलिए पी रहे हैं क्योंकि उन्हें इसके फायदे मालूम हैं. इस का सेवन विदेशी लोग खूब करते हैं. हमें तो ये इसलिए भी पसंद है, क्योंकि मैं चाय का आदी हूं. इस चाय को पीने से शुगर भी कंट्रोल में रहता है.

Bael Tea Shop in Gaya
बेल चाय सेहत के लिए फायदेमंद (ETV Bharat)

डूंगेश्वरी मंदिर में बेल चाय से होता है स्वागत: ऐसा नहीं है कि सिर्फ रंजन कुमार ही बेल चाय बेच रहे हैं, बल्कि गयाजी के डूंगेश्वरी पहाड़ी पर भगवान बुद्ध की मंदिर में जाने वाले वीआईपी और अन्य श्रद्धालुओं को बेल चाय दी जाती है ताकि सीढ़ियों को चढ़ने में उन्हें आई थकावट दूर हो. बोधगया टूरिस्ट गाइड राकेश कुमार कहते हैं कि बेल चाय काफी फायदेमंद होने की वजह से जो लोग इस के संबंध में जानते हैं, वो इस का सेवन हर हाल में करते हैं.

"डूंगेश्वरी पहाड़ी पर मंदिर का दर्शन करने वालों को पीने के ये चाय दी जाती है और ये परंपरा काफी सालों पुरानी है. इसको पीने से शरीर में गर्माहट, सूजन में राहत और पैरों में आराम, थकान में राहत मिलती है, ये काफी स्वादिष्ट होती है, इसको जितना उबालेंगे, उतना ही स्वादिष्ट और गहरे लाल रंग की होगी."- राकेश कुमार, गाइड

बेल चाय के कई सारे फायदे: गयाजी के प्रसिद्ध जनरल फिजिशियन डॉ. राजकुमार प्रसाद बताते हैं कि बेल कैल्शियम और फाइबर से भी भरपूर होता है. रोजाना बेल चाय के सेवन से शरीर को कई फायदे मिलने के साथ-साथ कई बीमारी से भी आप दूर रह सकते हैं. डायबिटीज में बेल की चाय काफी फायदेमंद होती है. इसमें हाइपोग्लाइसेमिक गुण होते हैं, जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करते हैं. इसके सेवन से हाजमा भी मजबूत रहता है और पेट से जुड़ी अन्य कई समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है. बेल को आयुर्वेद में भी काफी लाभदायक बताया गया है.

ETV Bharat GFX
ETV Bharat GFX (ETV Bharat)

"बेल की चाय सेहत के लिए फायदेमंद होती है. डायबिटीज और डाइजेशन में काफी कारगर है. इसमें कई तरह की विटामिन भी पाई जाती है, जो सूजन को कम करता है. बोधगया में अगर इस तरह बेल को सूखा कर चाय बेची जा रही है तो ये अच्छी बात है. इससे रोजगार भी बढ़ेगा और लोगों की सेहत भी अच्छी होगी."- डॉ. राजकुमार प्रसाद, जनरल फिजिशियन

कैसे बनती है बेल चाय?: रंजन बताते हैं कि पहले कच्चे बेल को काटा जाता है, फिर उसे साफ कपड़े पर रखकर ऊपर से सूती के पतले कपड़े से ढाका कर सुखाया जाता है. कपड़े से इसलिए ढंका जाता है ताकि उस पर मक्खी या दूसरे कीड़े आदि नहीं लगें. इसे तब तक धूप में सुखाया जाता है, जब तक कि वो पूरी तरह से सूखकर कड़ी लकड़ी की तरह नहीं हो जाए. इसमें लगभग 20 से 25 दिनों का समय लगता है.

Bael Tea Shop in Gaya
बेल चाय (ETV Bharat)

10 कप के लिए 5 से 6 स्लाइस को पानी में डालकर इसको उबाला जाता है. 6 से 7 मिनटों में इस का रंग लाल चाय की तरह हो जाता है. अगर सिर्फ सूखी स्लाइस के रूप में ही बेचना है तो इसे वजन के अनुसार डब्बे में पैक कर बेचा जाता है. अभी ढाई सौ ग्राम के डब्बे की कीमत 200 रुपये है, यानी के एक किलो की कीमत 800 रुपये है.

क्या है कीमत?: रंजन बताते हैं कि सूखा बेल का स्लाइस, जिसे 'बेल चाय' भी कहा जाता है, उसकी कीमत अभी बेल का सीजन नहीं होने की वजह से 800 रुपये प्रति किलो है, जबकि बेल के सीजन में सूखे बेल की कीमत 400 से लेकर 600 रुपए प्रति केजी होती है. सीजन में कच्चा बेल 30 से 40 रुपये बिकता है. वहीं ऑफ सीजन में एक कच्चा बेल 70 से 80 रुपये में बिकता है.

Bael Tea Shop in Gaya
विदेशी महिला पर्यटक (ETV Bharat)

नौकरी छोड़कर संभाला व्यापार: रंजन कुमार ने मगध विश्वविद्यालय से स्पेनिश भाषा में डिप्लोमा किया है. वह एक अच्छी कंपनी में 70 हजार रुपये प्रति महीने की नौकरी करते थे. उनके पिता बोधगया में ही बेल और जूस बेचने का काम करते हैं, इसलिए उन्होंने उसी बेल को नए ढंग से मार्केट में लाने का प्रयास किया है. वो कच्चे बेल खरीद कर उसे स्लाइस करके सुखाते हैं और फिर बेचते हैं. उनका ये माल सिर्फ बिहार भर में ही नहीं बल्कि कई देशों जैसे थाईलैंड, नेपाल, भूटान, श्रीलंका वियतनाम जैसे देशों में भी बिकता है. पिछले महीने वियतनाम से उन्हें 1000 किलो बेल के सूखा स्लाइस का ऑर्डर मिला था.

दुकान में कई लोग करते हैं काम: रंजन ने इस काम के लिए 10 लोगों को रखा है, जबकि मेन सीजन में काम करने वालों की संख्या बढ़ जाती है. बोधगया के भागलपुर गांव के रहने वाले रंजन इस काम में गांव देहात से बेल लाने से लेकर सुखाने, बेचने और चाय बनाने वालों के साथ ही कच्चे बेल को काटकर स्लाइस बनाने के लिए कई बढ़ई और मजदूर को भी रोजगार दे रखा है.

Bael Tea Shop in Gaya
बेल चाय बनाते स्टाफ (ETV Bharat)

आगे क्या है प्लान?: रंजन ज्यादातर स्वदेशी बेल ही बेचते हैं. वह खुद कहते हैं कि कई देशों में इसकी कीमत यहां के अनुसार कम है लेकिन फिर भी वहां उस देश के लोग भारतीय स्वदेशी बेल को ज्यादा पसंद करते हैं, क्योंकि इसकी क्वालिटी बहुत ही अच्छी होती है. अब रंजन अपने इस बेल चाय को ब्रांड बनाना चाहते हैं. वो इस से अभी लाखों का कारोबार कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें:

शरीर से सारी गंदगी बाहर निकाल देगी ये चाय, जानें बनाने और सेवन करने की विधि

मिट्टी के कुल्हड़ से लाखों का व्यवसाय, टेराकोटा आर्टिस्ट मकर केतन साहू ने बदली कई लोगों की जिंदगी

हर महीने बेच देते हैं 7 लाख के चाय-पकौड़े, PM Modi के भाषण ने बदली बलवीर की किस्मत

4 फीट के पार्षद से मिलिए, पहले चाय की दुकान संभाली, अब राजनीति की कमान, क्या है संघर्ष की कहानी?