पूरे देश में घूम-घूम कर जुटाए बाबासाहेब से जुड़े 10 हजार सिक्के और डाक टिकट, कर्नाटक में लगी प्रदर्शनी
प्रधान एवं जिला सत्र न्यायालय में सहायक के पद पर कार्यरत सतीश ने पिछले 20 वर्षों से संजोई दुर्लभ वस्तुओं को प्रदर्शन के लिए रखा.


Published : January 14, 2026 at 4:13 PM IST
मैसूर (कर्नाटक): मैसूर स्थित प्रतिष्ठित थिएटर संस्थान 'रंगायन' की 25वीं रजत जयंती के उपलक्ष्य में एक विशेष प्रदर्शनी आयोजित की गई है. यह प्रदर्शनी मैसूर के कलामंदिर परिसर स्थित 'सुचित्रा आर्ट गैलरी' में लगाई गई है. जिसका उद्देश्य बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर के सम्मान में उनके जीवन से जुड़े दुर्लभ डाक टिकटों, ऐतिहासिक सिक्कों और राजाओं के काल की अनमोल वस्तुओं को जनता के सामने प्रदर्शित करना है.
मूल रूप से कोलार जिले के मुलबगल तालुक के रहने वाले एच.के. सतीश ने कलामंदिर स्थित सुचित्रा आर्ट गैलरी में डॉ. बी.आर. अंबेडकर के टिकटों, सिक्कों और तस्वीरों की यह प्रदर्शनी लगाई है. हसन के प्रधान एवं जिला सत्र न्यायालय में द्वितीय श्रेणी सहायक के पद पर कार्यरत सतीश ने पिछले 20 वर्षों से संजोई हुई इन दुर्लभ वस्तुओं को प्रदर्शन के लिए रखा है.
वह डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जन्मशती की याद में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए विशेष सिक्कों को इकट्ठा करने के लिए देश के सभी राज्यों की यात्रा करने वाले और 10,000 सिक्के जमा करने वाले पहले भारतीय बन गए हैं. ये सभी सिक्के केवल डॉ. अंबेडकर से संबंधित हैं. वहीं प्रदर्शित किए गए 500 डाक टिकटों में से 150 टिकट डॉ. बी.आर. अंबेडकर पर आधारित हैं, जबकि बाकी टिकट स्वतंत्रता सेनानियों, राजाओं और संविधान से जुड़े हैं.
बाबासाहेब का पहला डाक टिकट 1965 में डॉ. बी.आर. अंबेडकर के 75वें जन्मदिन के अवसर पर जारी किया गया था. प्रदर्शनी में तब से लेकर अब तक के बाबासाहेब के डाक टिकट, संविधान के अनुच्छेदों से संबंधित अन्य टिकट और स्वतंत्रता सेनानियों के 500 विशेष डाक टिकट प्रदर्शित किए गए हैं.
इतिहास के छात्र रहे सतीश पिछले 20 वर्षों से इन वस्तुओं को इकट्ठा कर रहे हैं. उन्होंने अपने वेतन का आधा हिस्सा इसी शौक के लिए समर्पित कर दिया है और देश के कोने-कोने की यात्रा करके इन सिक्कों को जमा किया है. पिछले 4 वर्षों से वे देश भर में प्रदर्शनियां लगा रहे हैं. यह उनकी 147वीं प्रदर्शनी है. इनमें से केवल 20 से 22 प्रदर्शनियों के लिए ही उन्हें मानदेय और यात्रा भत्ता मिला है.
4 राष्ट्रीय पुरस्कार: सतीश ने दुनिया का पहला खादी डाक टिकट, 3D टिकट, प्लास्टिक का टिकट, दुनिया का पहला रेशमी (सिल्क) लिफाफा और डाक विभाग द्वारा जारी डॉ. बी.आर. अंबेडकर के सभी डाक टिकटों का संग्रह किया है. सतीश को अब तक 4 राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है.
इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज: सतीश ने अपनी इन उपलब्धियों के कारण इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है. सिक्कों और डाक टिकटों के संग्राहक एच.के. सतीश का कहना है कि वे आने वाले दिनों में लिम्का बुक और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के लिए भी आवेदन करेंगे.
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