चढ़ावा चोरी के बाद राम मंदिर ट्रस्ट में सरकारी नियंत्रण की बहस तेज, VHP के सामने चुनौती
सूत्रों के मुताबिक, VHP ने कहा है कि राम मंदिर ट्रस्ट में सरकारी दखल बर्दाश्त नहीं की जाएगी. दिल्ली से अनामिका रत्ना की रिपोर्ट.

Published : July 8, 2026 at 8:25 PM IST
नई दिल्ली: अयोध्या में राम मंदिर में हुई कथित चढ़ावा चोरी की घटना अब पूरे देश में सियासी तूफान खड़ा कर रही है. विपक्षी दलों के हमलों के बीच भाजपा ने उन्हें 'रंग बदलने वाले गिरगिट' करार दिया है. भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने इस मुद्दे पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कल तक श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाने वाले और कारसेवकों पर गोलियां चलाने को उचित ठहराने वाले लोग आज राम मंदिर में हुई चोरी की आड़ लेकर खुद को सबसे बड़े 'रामभक्त' और 'हिंदू रक्षक' साबित करने निकले हैं.
वहीं, इस पूरे प्रकरण ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की स्वायत्तता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार चाहती है कि ज्यादा सरकारी अधिकारियों को शामिल करके पारदर्शी सिस्टम बनाया जाए. सूत्रों की मानें तो विश्व हिंदू परिषद (VHP) का कहना है कि मंदिर हिंदू समाज का है और सरकारी दखल बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
राम मंदिर दान चोरी मामला तर्क-वितर्क से बढ़कर अब सोशल मीडिया में भी एक दूसरे पर आरोप लगाने की ओर बढ़ता जा रहा है. मामला चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश से जुड़ा है, जहां 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 2027 के विधानसभा चुनाव में सभी पार्टियां बढ़िया प्रदर्शन करना चाहती हैं और भाजपा ने तो पहले से तैयारी भी शुरू कर दी थी. मगर ऐसे में दान चोरी के इस मुद्दे ने कहीं ना कहीं पार्टी की मेहनत पर एक डेंट जरूर लगा दिया है.
हालांकि एसआईटी मामले की जांच कर रही है और सत्ताधारी पार्टी का दावा है कि जल्द ही दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा. लेकिन विपक्ष इसपर भाजपा को आड़े हाथों ले रहा. भाजपा ने भी अब पुराने मुद्दे उठाने शुरू कर दिए हैं और वक्फ बोर्ड में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के द्वारा हड़पी गई संपत्ति का मामला उठा रही है.

बहरहाल इस आरोप प्रत्यारोप के बीच एक कदम आगे बढ़ते हुए भाजपा ने विपक्षी पार्टियों के नेताओं के खिलाफ पोस्टर वार भी छेड़ दिया है और उन्हें रंग बदलने वाले गिरगिट बता रही है.
भाजपा प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने एक्स पोस्ट में लिखा, "यह आस्था नहीं, अवसरवादी राजनीति है." उन्होंने पोस्ट के साथ विपक्षी पार्टियों के लिए रंग बदलने वाले गिरगिट की तस्वीर भी पोस्ट की. भाजपा का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे को चुनावी मुद्दा बना रहा है और इसे लगातार हवा दे रहा है.
साथ ही, भाजपा इसे सनातन धर्म के खिलाफ राजनीति भी और षड्यंत्र भी बता रही है. आर.पी. सिंह ने कहा कि राम के नाम पर हिंदू धर्म पर चोट पहुंचाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. उन्होंने विपक्ष पर दोहरा मापदंड अपनाने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि जब आजम खान ने वक्फ बोर्ड की करोड़ों रुपये की संपत्ति हथिया ली, तब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने एक शब्द भी नहीं बोला. आज राम मंदिर के दान चोरी के मामले में ये लोग रामभक्त बन गए हैं.
ट्रस्ट पर नियंत्रण को लेकर भी घमासान के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये मामला जांच के अधीन है और अभी इसपर ऐसा कोई तर्क वितर्क नहीं.

बहरहाल, सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार राम मंदिर ट्रस्ट में अधिकारियों के नियंत्रण को मजबूत करना चाहती है ताकि ज्यादा से ज्यादा नजर रखी जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो पाए.
सूत्रों की मानें तो, विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) इस पर सहमत नहीं दिख रही है. वीएचपी जांच पूरी होने के बाद ही किसी बड़े फैसले के अमल के पक्ष में है.
राम मंदिर दान चोरी का मामला सामने आने के बाद से विपक्षी दल लगातार भाजपा और मंदिर ट्रस्ट पर सवाल उठा रहे हैं. विपक्ष इसे भ्रष्टाचार और लापरवाही का मुद्दा बता रहा है, जबकि सत्ताधारी दल इसे राजनीतिक साजिश करार दे रहा है. मामला दिन-प्रतिदिन गरमाता जा रहा है और आने वाले दिनों में यह सियासी बहस और भी तीखी होने की संभावना है. राम मंदिर देश की आस्था का केंद्र है और इस मुद्दे पर उठ रहे सवालों से राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है.
वीएचपी के एक नेता ने नाम ना लेने की शर्त पर कहा कि VHP का फोकस मंदिरों को सरकारी चंगुल से आजाद करने पर है, न कि और ज्यादा सरकारी कंट्रोल पर. उन्होंने कहा कि मुद्दा है जांच सही दिशा में हो, दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन राम मंदिर की गरिमा और स्वतंत्र प्रबंधन बरकरार रहे. भक्तों का विश्वास टूटने नहीं दिया जाना चाहिए.
बहरहाल यह घटना VHP के "मंदिर मुक्ति आंदोलन" को भी चुनौती दे रही है, क्योंकि एक तरफ चोरी के आरोप और दूसरी तरफ सरकारी हस्तक्षेप की बहस तेज हो गई है.
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