झारखंड की बेटी अनुष्का कुमारी को मिला प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार, भारतीय अंडर 17 महिला फुटबॉल टीम की सदस्य
झारखंड की रहने वाली अंडर 17 की फुटबॉलर अनुष्का कुमारी को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.

Published : December 31, 2025 at 8:26 PM IST
हजारीबाग: झारखंड की 14 वर्षीय फुटबॉलर अनुष्का कुमारी को खेल श्रेणी में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 26 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में यह पुरस्कार प्रदान किया. अनुष्का भारतीय अंडर-17 महिला फुटबॉल टीम की सदस्य हैं और उनकी लगन व मेहनत ने उन्हें यह मुकाम दिलाया है.
गरीबी और संघर्ष के बीच बुलंद हौसले
अनुष्का रांची के ओरमांझी प्रखंड के मुंडा टोली की रहने वाली हैं. उनकी मां रीता मुंडा दिहाड़ी मजदूरी करती हैं और परिवार का पालन-पोषण करती हैं. पिता दिनेश मुंडा तीन साल पहले मजदूरी के दौरान दुर्घटना में घायल हो गए, जिसके बाद वे घर पर ही हैं और पैर की गंभीर समस्या के कारण चलने-फिरने में असमर्थ हैं. ऐसे विषम हालात में अनुष्का ने फुटबॉल को अपना हथियार बनाया.
वे हजारीबाग के आवासीय बालिका फुटबॉल प्रशिक्षण केंद्र में रहकर रोजाना सात घंटे से अधिक अभ्यास करती हैं. उनकी मेहनत का नतीजा है कि भारतीय अंडर-17 महिला टीम में झारखंड की पांच खिलाड़ियों का चयन हुआ, जिनमें अनुष्का के अलावा रांची की दिव्यानी लिंडा, गुमला की अनिता कुमारी, सूरजमुनी कुमारी और एलिजाबेथ शामिल हैं.

शानदार प्रदर्शन से जगमगाया नाम
14 वर्षीय अनुष्का ने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर धमाकेदार प्रदर्शन किया है. एसएएफएफ महिला चैंपियनशिप (2024) में भूटान के खिलाफ भारत की 7-0 की जीत में उन्होंने हैट्रिक ठोकी. सब-जूनियर नेशनल (2023) में तमिलनाडु पर झारखंड की 12-0 की जीत में सात गोल दागे. सब-जूनियर टियर-1 में 22 गोल कर शीर्ष स्कोरर बनीं और अंडर-16 एसएएफएफ महिला चैंपियनशिप (2024) में सर्वोच्च गोल स्कोरर का पुरस्कार जीता.

भविष्य की योजनाएं और प्रेरणा
पुरस्कार मिलने के बाद अनुष्का के हौसले और बुलंद हो गए हैं. वे कहती हैं कि आने वाले दिनों में फीफा अंडर-17 विश्व कप में और बेहतर प्रदर्शन करेंगी. हजारीबाग पहुंचने पर उपायुक्त, खेल पदाधिकारी और कोच ने उनका जोरदार स्वागत किया और हौसला बढ़ाया. अनुष्का की कहानी साबित करती है कि मेहनत और लगन से कोई भी मुश्किल हालात को पार किया जा सकता है. वे झारखंड ही नहीं, पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गई हैं.
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