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पिता को वीआरएस दिलवाकर खुद परिवार की जिम्मेदारी उठाने वाला था एंजेल चकमा, सपनों के साथ मार डाला

देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या हुई थी. एंजेल ने कई सपने बुने थे, लेकिन पूरा होने से पहले मार दिया गया.

ANJEL CHAKMA
दिवंगत एंजेल चकमा (फाइल फोटो- X@PradyotManikya)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : December 29, 2025 at 7:10 PM IST

4 Min Read
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किरनकांत शर्मा

देहरादून: एंजेल चकमा यह उस छात्र का नाम है, जो अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसके साथ जो घटना हुई, उसने देवभूमि उत्तराखंड को शर्मसार कर दिया. मामूली विवाद पर देहरादून में 6 युवकों ने एंजेल पर हमला कर दिया था. हमला इतना खतरनाक था कि उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई. अब छात्र के लिए त्रिपुरा से लेकर देहरादून तक इंसाफ की मांग उठ रही है.

हालांकि, देहरादून पुलिस ने इस मामले से जुड़े पांच आरोपियों को पकड़कर जेल भेज दिया है, लेकिन जिस परिवार के ऊपर दुखों का इतना बड़ा पहाड़ टूटा है, उसकी भरपाई शायद ही कोई कार्रवाई कर पाए. एंजेल बहुत जल्द अपने पूरे परिवार की जिम्मेदारियां उठाने वाला था, लेकिन उससे पहले ही उसे और उसके सपनों के साथ मार दिया गया.

एंजेल की प्लेसमेंट से लग गई थी नौकरी: त्रिपुरा के एंजेल चकमा के मामा मोमिन चकमा बताते हैं कि बीते दिनों प्लेसमेंट में उनके भांजे की नौकरी लग गई थी. डेकाथलॉन में लगी उसकी नौकरी से हर कोई खुश था और बहुत जल्द वो कोलकाता या असम में नौकरी के लिए जाना वाला था. पढ़ाई पूरी करने के बाद एंजेल चाहता था कि वो अपने पूरे परिवार की जिम्मेदारी खुद उठाए.

पिता का चाहते थे वीआरएस: प्लेसमेंट मिलने के बाद सबसे पहले एंजेल की ख्वाहिश यही थी कि वो अपने पापा को वीआरएस यानी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दिलवा देंगे. बता दें कि एंजेल के पिता बीएसएफ यानी सीमा सुरक्षा बल में सेवाएं दे रहे हैं. ऐसे में एंजेल चाहता था कि अब वो कमाने लग जाएगा. ऐसे में पिता को अब आराम की जरूरत है. लिहाजा, वो वीआरएस की दिलाने की बात कर रहा था.

खुशमिजाज लड़का था एंजेल: अपने परिवार और पिता के लिए हमेशा से सोचने वाले एंजेल चकमा बेहद खुशमिजाज लड़का था. जिसे घूमने फिरने का काफी शौक था. देहरादून से पढ़ाई पूरी करने के बाद उसका जो प्लान था, वो उसने पहले से ही परिवार वालों को बता दिया था, लेकिन उसका प्लान प्लान ही रह गया.

चंद्रशिला घूमने का बनाया था प्लान: इतना ही नहीं जिस दिन यह घटना हुई, उसके दो बाद ही एंजेल अपने भाई और दोस्तों के साथ चंद्रशिला घूमने जाना वाला था. घूमने फिरने के शौकीन चकमा की सोशल मीडिया पर प्रोफाइल भी बताती है कि उसे पढ़ाई के साथ घूमना-फिरना बेहद पसंद था. उनकी सोशल मीडिया हैंडल पर अपलोड की गई फोटो वीडियो उनके खुशमिजाज जीवन को दर्शाती है.

ट्रेकिंग के लिए खरीद लिए थे जूते और अन्य सामान: ट्रेकिंग के लिए जाने वाले इस पूरे ग्रुप को एंजेल ने ही तैयार किया था. बकायदा ट्रेकिंग के लिए जूते और अन्य सामान भी एंजेल ऑनलाइन आर्डर किए थे. जिसका पार्सल हत्या के अगले दिन उनके घर पहुंचा. उनकी मौत के बाद चारों तरफ से अब इंसाफ की आवाज उठ रही है. हालांकि, उत्तराखंड सरकार इस पूरे मामले पर बेहद गंभीरता से जांच करवा कर दोषियों को कड़ी सजा दिलवाने की बात कह रही है.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 29 दिसंबर की सुबह परिवार से फोन पर बातचीत की और उन्हें दोषियों को सजा दिलवाने का भरोसा दिलवाया. इसके साथ ही केंद्र सरकार में गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक शाह भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस मामले में बात कर चुके हैं.

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