अश्वमेध यज्ञ स्थली पर ASI ने 73 साल बाद फिर शुरू की खुदाई, मिले मटका और कोयले के अवशेष, भेजा लैब
देहरादून के विकासनगर में अश्वमेध यज्ञ स्थल पर ASI को खुदाई के दौरान प्राचीन अवशेष मिलने की संभावना.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : January 11, 2026 at 1:25 PM IST
विकासनगर (उत्तराखंड): भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) देहरादून मंडल ने तीसरी शताब्दी के अश्वमेध यज्ञ स्थली पर करीब 73 साल बाद एक बार फिर से खुदाई शुरू की है. ताकि और अधिक जानकारी मिल सके. ट्रायल के तौर पर की जा रही खुदाई में आर्कियोलॉजिस्ट की टीम को मिट्टी का मटका और कोयले के अवशेष मिले हैं.
उतराखंड को धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है. यहां पर कई ऐतिहासिक स्थल भी हैं. देहरादून जिले के विकासनगर के जगतग्राम बाड़वाला में स्थित अश्वमेध स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन है. भारतीय सर्वेक्षण के आर्कियोलॉजिस्ट टीएन रामचंद्रन ने सन 1952-54 में इस जगह पर उत्खनन किया था. जहां तीसरी शताब्दी के अश्वमेध यज्ञ का पता चला था.
उत्खनन के दौरान तीन स्थानों के अवशेषों से पता चला था कि तीसरी शताब्दी ईस्वी में राजा शीलवर्मन द्वारा इसी स्थल पर अश्वमेध यज्ञ किया गया था. राजा शीलवर्मन लगभग तीसरी शताब्दी ईस्वी के कुणिंद वंश के शासक थे. इस स्थल पर उत्खनन के दौरान ईटों से निर्मित संरचनाओं में उड़ते हुए गरुड़ के आकार की वर्तमान में यहां तीन वेदिकाएं मौजूद हैं. जबकि चौथी वेदिका की खोज के लिए 73 साल बाद फिर से ट्रायल खुदाई का कार्य शुरू किया गया है.

इस दौरान खुदाई में जले कोयले के अवशेष और मिट्टी का मटका मिला है. जिसे टेस्टिंग के लिए लैब भेजा जाएगा. चौथी वेदिका की खोज के लिए शनिवार को भी विशेषज्ञों की टीम की देखरेख में खुदाई का कार्य जारी रहा.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के देहरादून मंडल के सुपरिटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट मोहन चंद्र जोशी ने बताया कि, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण देहरादून मंडल द्वारा 1 दिसंबर 2025 से स्थल पर खुदाई शुरू हुई थी. इस खुदाई का उद्देश्य यही है कि पूर्व में जो वेदिकाएं निकली थी, उसके अलावा चौथी का भी अनुमान लगाना और यहां का कल्चरल सीक्वेंस जानना है.

इसके अलावा, यहां पर सबसे प्राचीनतम हुमन एक्टिविटी कब हुई थी? कौन से लोग रहते थे? जो लेवल है क्या उसके नीचे भी संस्कृति रही होगी? उसका भी अनुमान लगाना है. अभी तक करीब दो से तीन मीटर नीचे गए हैं. यह ट्रायल है. ट्रायल में मिट्टी का मटका और दो से तीन अन्य चीजें मिली हैं.

आर्कियोलॉजिस्ट जोशी ने बताया कि, हमने वाडिया इंस्टीट्यूट से संपर्क स्थापित किया है. वाडिया के वैज्ञानिक आकर यहां की मिट्टी का सैंपल लेंगे. रिपोर्ट के आधार पर पता चलेगा कि कितने साल पुराना यहां पर यह जमाव है और पोट्री की तिथि भी मालूम कर पाएंगे. यह ट्रायल जनवरी माह तक चलेगा.

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