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बस्तर पंडुम के समापन पर गरजे अमित शाह, बस्तर को पांच साल में नंबर वन जनजातीय संभाग बनाने का वादा

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर पंडुम का समापन किया.इस मौके पर उन्होने एक बार फिर नक्सलियों से सरेंडर करने की अपील की.

Amit Shah concluded Bastar Pandum
अमित शाह ने किया बस्तर पंडुम का समापन (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : February 9, 2026 at 2:24 PM IST

10 Min Read
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जगदलपुर : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बस्तर पंडुम के समापन पर जगदलपुर पहुंचे.यहां उन्होंने तीन दिवसीय बस्तर पंडुम का समापन किया. इस दौरान उन्होंने एक बार फिर माओवाद का रास्ता नहीं छोड़ रहे नक्सलियों से पुनर्वास नीति का फायदा उठाकर समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की.गृहमंत्री अमित शाह ने एक बार फिर दोहराया कि नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प अपने समय से पहले पूरा होगा.

हमारी लड़ाई विकास में बाधा बनने वालों के खिलाफ

हमारी लड़ाई किसी के खिलाफ नहीं है,बल्कि उनके खिलाफ है जो विकास में बाधा हैं.जो लोग सड़कों में, खेतों में ,पगडंडियों में आईईडी लगाते हैं वो जरा भी नहीं सोचते कि उनका ही आदिवासी भाई का पांव उस पर पड़ेगा, वो हमेशा के लिए दिव्यांग हो जाएगा. उनको मालूम नहीं है कि कोई निर्दोष बच्ची बम से उड़ जाएगी. कहां से इतनी निर्दयता लेकर आए हैं. मैं आज फिर से एक बार कहना चाहता हूं. पहले भी कई बार मैं कह चुका हूं.अभी भी जो बचे कुछे लोग हैं वो हथियार डाल दें. सरकार आपकी सभी प्रकार की चिंता करेगी. सम्मान के साथ आपका ध्यान रखा जाएगा. मैंने छत्तीसगढ़ के पुनर्वासन पैकेज को ध्यान से देखा है मैं मुख्यमंत्री जी और उपमुख्यमंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं कि इतना आकर्षक पुनर्वासन पैकेज कभी नहीं देखा.

बस्तर को पांच साल में बनाएंगे देश का नंबर वन जनजातीय संभाग (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

मुझे तो चिंता है अभी जो बचे हुए नक्सली हैं उनमें हमारी ट्राइबल बच्चियां भी हैं. मैं सभी को अपील करना चाहता हूं कम से कम एक बच्चियों को एक बार पुनर्वासन के लिए भेज दो. उनका पूरा जीवन बाकी है,उनका बचा हुआ जीवन सुधर जाएगा. मैं ये भी कहना चाहता हूं कि 2500 से ज्यादा लोग जो सरेंडर हुए हैं,उनको किसी भी तरह की कोई आंच नहीं आने वाली. मगर जो आदिवासी गांव में गोली चलाएंगे, आईईडी लगाएंगे खेतों में ,रोड पर, स्कूलों को जलाएंगे, मोबाइल टावर बंद कर देंगे, अस्पताल जला देंगे, उनको भी कहना चाहता हूं कि आप बक्शे नहीं जाओगे. हाथ में हथियार है तो उसका जवाब हथियार से दिया जाएगा.- अमित शाह, केंद्रीय गृहमंत्री


''स्कूल जलाकर निरक्षरों की फौज की खड़ी''

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि कोलंबिया हो, पेरू हो, कंबोडिया हो, हर जगह है किसी का कल्याण नहीं. आज हमारा बस्तर ब्रांड के रूप पूरे देश के सामने चमकता हुआ सामने आ रहा है. जो स्कूल 40-40 साल से बंद थे उन स्कूलों को छत्तीसगढ़ शासन ने खोलने का काम किया है. मैं हमारे आदिवासी भाइयों बहनों को पूछना चाहता हूं स्कूल जलाकर नक्सलियों ने किसका भला किया.हमारी नई पीढ़ी अक्षर ज्ञान से वंचित रह गई. 30 साल तक अपने गांव के स्कूल बंद करके निरक्षरों की फौज खड़ी कर दी गई. मगर मैं आज बस्तर वालों को कह कर जाता हूं मेरा वादा है और साथ में संकल्प भी है देश के सभी जनजातीय संभागों में मेरा बस्तर पांच साल में सबसे विकसित संभाग बन जाएगा.अस्पताल जो बंद पड़े हैं वह चालू करेंगे. स्कूलों को चालू करेंगे, हायर सेकेंडरी स्कूल बनाएंगे, कॉलेज को बनाएंगे. हर गांव में पोस्ट ऑफिस खुल रहे हैं. मोबाइल टॉवर लग रहे हैं. रोड बन रहे हैं और गांव को जोड़ने वाले रोड भी बहुत अच्छी तरीके से बने हैं.

''हर गांव में बिजली और पोस्ट ऑफिस''

बोर्ड की परीक्षाएं भी शुरू हो गई है और कई गांव ऐसे हैं जहां चार दशक के बाद हमारा राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराने का काम हुआ है. हमने एक रोडमैप बनाया है. बस्तर के कई गांव में बिजली नहीं थी हम 27 दिसंबर के पहले सभी गांव में बिजली पहुंचाएंगे. हर गांव में कनेक्टिविटी पहुंचाएंगे. हर 5 किलोमीटर में पोस्ट ऑफिस या तो बैंक का ब्रांच खोलेंगे. हर आदिवासी को पांच किलो धान दिया जाएगा.घर में नल दिया जाएगा नल से जल आएगा. आपके चुने हुए प्रतिनिधि ही आपकी पंचायत तहसील पंचायत और जिला पंचायत का विकास करेंगे.नक्सलवाद समाप्त होते ही एडवेंचर टूरिज्म, होमस्टे, कैनेपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसी कई नई टूरिज्म की यहां पर डेवलप होने लगी और देखते-देखते हम बस्तर को बहुत आगे बढ़ाएंगे.

बस्तर पंडुम के विधाओं की सराहना

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि भाइयों बहनों 7 जिले 1885 ग्राम पंचायत और 32 जनपद मुख्यालय से प्रतियोगिता करते-करते करते 12 विधाओं में अपना जौहर दिखाया है. मैं मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद कहना चाहता हूं कि उन्होंने बस्तर के 7 विधाओं से आगे बढ़ते हुए इस बार 12 विधाओं में प्रतियोगिता का आयोजन किया. छत्तीसगढ़ सरकार को बहुत-बहुत साधुवाद और अनंत अनंत शुभकामनाएं देना चाहता हूं. कई आदिवासी राज्यों को भी जनजातीय कलाकारों को भी छत्तीसगढ़ में मंच दिया है.अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ का नृत्य, गीत, नाट्य प्रदर्शन, वेशभूषा, आभूषण, शिल्प, चित्रकला, पदार्थ, व्यंजन, आंचलिक साहित्य और वन औषधि सभी में स्पर्धा करके हमारे बस्तर की संस्कृति को नए प्राण देने का काम छत्तीसगढ़ सरकार ने किया.

पूरे विश्व में बस्तर जैसी कला और संस्कृति नहीं

गृहमंत्री ने कहा कि इस बार बस्तर पंडुम में 55000 बस्तर के नागरिकों ने इसमें हिस्सा लिया. बहुत बड़ी बात है जो बस्तर कुछ साल पहले नक्सलियों के डर से थर्राया हुआ था,जहां मोर्टार के खोल,बंदूक की गोलियां और आए दिन धमाके हमारे आदिवासी भाई बहनों में भय का संचार करती थी.उसी बस्तर में 55000 लोगों ने खान-पान,गीत, नृत्य, नाटक, वेशभूषा, परंपराएं और वन औषधि जैसी स्पार्धाओं में हिस्सा लेने का काम किया है. मेरा आप सबसे अनुरोध है कि एक बार 55 हजार प्रतिभागियों के लिए एक बार हाथ उठाकर जोर से ताली बजाएं. इस परंपरा को हम सालों तक जिंदा रखना चाहते हैं. क्योंकि बस्तर वालों में मन से कह रहा हूं कि यहां की संस्कृति और कला मैंने देखी है. विश्व के कोई भी जनजातीय क्षेत्र में ऐसी कला उपलब्ध नहीं है.बस्तर की कला संस्कृति गीत नाट्य सिर्फ बस्तर का आभूषण नहीं है यह पूरे भारत की संस्कृति का आभूषण हैं.

दंतेवाड़ा जिला वासियों को दी बधाई

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि मैं दंतेवाड़ा वालों को विशेष बधाई देना चाहता हूं क्योंकि 55000 कलाकारों में सबसे ज्यादा हिस्सा हमारे दंतेवाड़ा जिले ने ही लिया है.मारिया, मोरिया, गोंड, हल्बी, भद्रा, दुबई, प्रजा, गरबा बस्तर का कल्चर बनाते हैं. आज भी गोंडी, बद्री, दुबी, डोली यह सभी भाषाओं में इस संस्कृति को अपने प्रभु श्री राम के समय से संजोकर रखा है. यह पूरे देश की जनजाति है. यहां के प्रमुख नृत्य आने वाले दिनों में राष्ट्रीय फलक पर भी आगे बढ़ेंगे.

बस्तर पंडुम के विजेताओं को राष्ट्रपति से मिलने का मौका

जब राष्ट्रपति महोदय यहां पर उद्घाटन करने आई तो मैंने उनका धन्यवाद करने के लिए फोन किया था. साथ में एक विनती भी कर डाली, 12 के 12 विधाओं में जो एक दो और तीन नंबर पर आए हैं उसको आप अपने घर पर भोजन पर बुलाएं. उन्होंने मुझे हां बोल दिया. तो बस्तर पंडुम के 12 विधाओं के पहले दूसरे और तीसरे पर नंबर के प्रतिभागी देश के राष्ट्रपति भवन में अपने कला का प्रदर्शन करेंगे.पूरे देश और विदेश का मीडिया उस दौरान राष्ट्रपति भवन में मौजूद रहेगा. हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का भी लक्ष्य है कि बस्तर की संस्कृति को देश और दुनिया के सामने पहुंचाना. ताकि बस्तर की पहचान यहां की संस्कृति और यहां का विरासत को सदियों तक लोग जाने.मोदी जी ने जनजातीय नायकों को हृदय से सम्मान देने का काम किया. मोदी जी का स्पष्ट मानना है कि इतिहास केवल वो नहीं होता जो किताबों में लिखा हुआ है इतिहासवो होता है जो जन्म मानस में स्मृतियों में जीवित रहता है.

सीएम साय ने गृहमंत्री को कहा धन्यवाद

बस्तर पंडुम के समापन पर सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि 45 वर्षों तक प्रदेश नक्सलवाद से प्रभावित रहा है.बस्तर में लाल आतंक के कारण बस्तर पिछड़ गया. गृहमंत्री की दृढ़ संकल्प के कारण आज बस्तर में दो साल के अंदर शांति स्थापित हो रही है. बस्तर पंडुम बस्तर के कलाकारों और संस्कृति का प्रतीक है. मैं सभी कलाकारों को शुभकामनाएं और बधाई देता हूं. आप सभी लोग बस्तर की संस्कृति और सभ्यता को देश दुनियां तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं.

'नक्सलमुक्त भारत बनने की ओर देश' (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

मैं जवानों के साहस को नमन करता हूं,डबल इंजन की सरकार आने के बाद जवान नक्सलवाद के खिलाफ मजबूती के साथ लड़ाई लड़ रहे हैं.लगातार सफलता मिली है. गृहमंत्री जी ने संकल्प लिया कि बस्तर से नक्सलवाद को खत्म करना है.उन्होंने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को समाप्त करने का संकल्प लिया है.उनका संकल्प पूरा होने के है. आज 75 फिसदी नक्सलवाद वाले प्रदेश में 10-15 फीसदी ही नक्सल रह गया है- विष्णुदेव साय, सीएम छग

सीएम साय ने कहा कि आज नियद नेल्लानार, पूना मार्गेम और बस्तर प्राधिकरण के जरिए हम गांवों तक विकास ले जा रहे हैं.आज 240 गांवों में पहली बार तिरंगा लहरा रहा है. ये सब कुछ माननीय अमित शाह जी दृढ़ संकल्प के कारण पूरा हो रहा है.

'जो हथियार नहीं डालेंगे वो नहीं बचेंगे' (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

12 विधाओं के विजेताओं को सम्मान

बस्तर पंडुम में 12 विधाओं में अपनी कला और संस्कृति पेश करने वाले विजेताओं को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और सीएम विष्णुदेव साय ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया.

बस्तर पंडुम का राष्ट्रपति ने किया था शुभारंभ

तीन दिवसीय बस्तर पंडुम का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 7 फरवरी शनिवार को शुभारंभ किया था. इस अवसर पर उन्होंने बस्तर के विकास को लेकर अपनी बात कही थी. राष्ट्रपति ने आदिवासी संस्कृति के केंद्र बस्तर की जमकर सराहना की थी. उन्होंने कहा थआ कि छत्तीसगढ़ की आत्मा आदिवासी संस्कृति में बसती है. इस अवसर पर उन्होंने दंतेश्वरी माई का जयघोष भी किया था. राष्ट्रपति ने आदिवासी संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और प्राचीन विरासतों को संरक्षित करने की दिशा में बस्तर पंडुम को मील का पत्थर करार दिया था.

क्या है बस्तर पंडुम ?

बस्तर की जनजातीय पारंपरिक कला, नृत्य, जनजातीय व्यंजन, स्थानीय खाद्य पदार्थ और संस्कृति को संरक्षित करने के उद्देश्य से बस्तर पंडुम का आयोजन किया गया था .बस्तर पंडुम केवल एक महोत्सव नहीं है, बल्कि यह जनजातीय जीवन का पूरा स्केच है. बस्तर पंडुम के जरिए इस संस्कृति को एक मंच दिया गया. जिसका उद्देश्य सरकार और समाज के सहयोग से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना था.इस बार बस्तर पंडुम में 1954 ग्राम सभाओं ने हिस्सा लिया है.पिछली बार के मुकाबले इस बार 12 विधाओं में आयोजन हुआ है.

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