Explainer: तीन दिन सीमांचल में 'डेरा' डालेंगे गृहमंत्री अमित शाह, जानिए राजनीतिक और सामरिक मायने
गृहमंत्री अमित शाह 3 दिनों तक बिहार के सीमांचल में रहेंगे. आंतरिक और बाह्य सुरक्षा समेत कई मुद्दों पर मैराथन बैठक करेंगे. पढ़ें स्पेशल रिपोर्ट..

Published : February 25, 2026 at 5:43 PM IST
- रिपोर्ट: डॉ. रंजीत कुमार
पटना: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज से बिहार दौरे पर हैं. बीजेपी के 'चाणक्य' कहे जाने वाले शाह इस बार सूबे की सियासत की बजाय सीमा की सुरक्षा पर जोर देने आए हैं. इसी उद्देश्य के साथ वह तीन दिनों तक सीमांचल के जिलों का दौरा करेंगे, क्योंकि उनकी नजर अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर है. जिसके तहत वह सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ, तस्करी और डेमोग्राफिक बदलाव पर मंथन करने वाले हैं. 'चिकन नेक' को लेकर भी गृह मंत्री रणनीति तैयार करेंगे. सीमा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने, तकनीकी निगरानी बढ़ाने और अंतरराज्यीय समन्वय को मजबूत करने पर भी चर्चा होने वाली है.
सीमांचल पर शाह का फोकस: अमित शाह का फोकस सीमा की सुरक्षा के साथ-साथ सीमावर्ती जिलों से पलायन रोकने, रोजगार सृजन, लैंड पोर्ट की सुरक्षा, अवसंरचना और व्यापारिक गतिविधियों की समीक्षा कर सुधारों पर है. साथ ही घुसपैठ और तस्करी पर रोक लगाना है.
घुसपैठ को लेकर होगा मंथन: अररिया स्थित इंडो-नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी की 52वीं बटालियन के लैटी कैंप में अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे. बैठक में घुसपैठ के मुद्दे पर भी विस्तृत चर्चा होने की संभावना है. सरकार का ध्यान सीमांचल को 'घुसपैठिया मुक्त' बनाने पर भी है. सीमांचल के इलाके में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए जगह बना चुके हैं और कैसे घुसपैठिए से निपटा जाए, इसे लेकर भी विमर्श होगा.
सीमांचल क्यों महत्वपूर्ण?: जानकार कहते हैं कि भारत के लिए सीमांचल बेहद महत्वपूर्ण है. डिफेंस परसेप्शन अहमियत रखता है. नेपाल बांग्लादेश और चीन की ओर से 'चिकन नेक' और सिलीगुड़ी गलियारा को लेकर नकारात्मक बात करते हैं. जिस तरह से इनके चारों जिलों (किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार) में डेमोग्राफिक चेंज हुआ है और घुसपैठ की घटनाओं में वृद्धि हुई है, वह केंद्र सरकार के लिए चिंता का विषय है. इन सब चीजों को देखते हुए गृहमंत्री का सीमांचल विजिट महत्वपूर्ण है.

सीमांचल में डेमोग्राफिक चेंज चिंता का सबब: 2011 की जनगणना के अनुसार सीमांचल इलाके में अल्पसंख्यकों की आबादी बढ़ी है. आंकड़े बताते हैं कि किशनगंज में मुस्लिम आबादी 68%, अररिया में 43%, कटिहार में 45% और पूर्णिया में लगभग 38% है. पिछले 3–4 दशकों में इन जिलों में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत बढ़ा है, जबकि राज्य के कई अन्य हिस्सों में वृद्धि दर में कमी दर्ज की गई है. यह बदलाव मुख्यतः बांग्लादेशी घुसपैठ, उच्च जन्मदर,स्थानीय सामाजिक-आर्थिक कारणों से जुड़ा माना जाता है.

"सीमांचल में काफी डेमोग्राफिक बदलाव आए हैं. इसे लेकर भी गृह मंत्री की चिंता होगी. अधिकारियों के साथ बैठक कर गृह मंत्री वस्तु स्थिति की जानकारी लेंगे. हाल के कुछ वर्षों में सीमांचल में डेमोग्राफिक चेंज भी आया है. धार्मिक संरचना में बदलाव को लेकर सवाल उठाते रहे हैं."- (रिटायर्ड) ब्रिगेडियर प्रवीण कुमार, रक्षा विशेषज्ञ
बेहतर सामंजस्य की दरकार: सेना से अवकाश प्राप्त ब्रिगेडियर प्रवीण कुमार कहते हैं कि गृह मंत्री अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा की समीक्षा भी करेंगे. बॉर्डर पर तैनात आईटीबीपी, असम राइफल और बांग्लादेश में बीएसएफ के बीच बेहतर समन्वय कैसे हो, इस पर मंथन करेंगे. साथ ही सेकंड लेवल में आर्मी का डेप्लॉयमेंट है, इसके साथ बेहतर कोऑर्डिनेशन पर भी अमित शाह समीक्षा करेंगे. बाह्य और आंतरिक सुरक्षा को लेकर भी वह अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे.

सीमा सुरक्षा को दुरुस्त करने की जरूरत: प्रवीण कुमार कहते हैं कि नेपाल के साथ बिहार 730 किलोमीटर से अधिक लंबी खुली सीमा साझा करता है. ऐसे में सीमा सुरक्षा, घुसपैठ और तस्करी जैसे मुद्दों पर विस्तृत समीक्षा बैठक होने की संभावना है. नेपाल सीमा खुले होने का लाभ आतंकी उठा ले जाते हैं और नेपाल के रास्ते भारत में एंट्री कर जाते हैं. प्लेन हाईजैक मामले में भी आतंकी नेपाल की सीमा से भारत के अंदर दाखिल हुए थे.
'नेपाल से सजग रहने की जरूरत': प्रवीण कुमार बताते हैं, 'मैं गोरखा रेजीमेंट में हुआ करता था और उन दिनों 70% जवान नेपाली हुआ करते थे. नेपाल और भारत का ऐतिहासिक और मैत्रीपूर्ण संबंध रहा है लेकिन इधर कुछ वर्षों में वहां की व्यवस्था बदली है और थोड़ा असंतुलन पैदा हुआ है. लोकतांत्रिक व्यवस्था वहां बहाल नहीं हो पाई है. ऐसे में हमें सजग रहने की जरूरत है. हालांकि वहां कोई बड़ा थ्रेट नहीं है. जो प्लेन हाईजैक हुआ था, उस दौरान आतंकी नेपाल के रास्ते ही भारत में दाखिल हुए थे. अगर भारत विरोधी कोई गतिविधि हो रही हो तो उसे पर भी विराम लगाने की योजना है.'

चिकन नेक सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल: बांग्लादेश, चीन और नेपाल तीनों ही हमारे 'चिकन नेक' के आसपास में है. न सिर्फ सीमांचल बल्कि नॉर्थ ईस्ट को लेकर भी केंद्र की सरकार गंभीर है. स्थानीय पुलिस के साथ-साथ अर्धसैनिक बल और आर्मी के साथ बेहतर सामंजस्य कैसे हो, इस पर गृह मंत्री लगातार काम कर रहे हैं.
क्या है केंद्र का प्लान?: ब्रिगेडियर प्रवीण बताते हैं कि सीमावर्ती जिलों को लेकर केंद्र काफी गंभीर है. इसी को ध्यान में रखते हुए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम लाया गया है. सरकार अंतरराष्ट्रीय सीमा पर वाइब्रेंट विलेज विकसित कर रही है. सीमा पर अवस्थित गांव में आबादी बसी रहे, सरकार की यही कोशिश है. गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य,सड़क, रोजगार जैसे मूलभूत सुविधाएं हो, इसके लिए सरकार ने वाइब्रेंट विलेज का चयन किया है. इन गांव में आधुनिक सुविधाएं बहाल की जा रही है, ताकि उन इलाकों से पलायन न हो.
बिहार में हैं 53 वाइब्रेंट विलेज: वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II के तहत बिहार में 53 वाइब्रेट विलेज को शामिल किया गया. इसमें बेतिया (पश्चिम चम्पारण) जिले के 31 सीमावर्ती गांवों को इस कार्यक्रम में शामिल किया गया है, जबकि किशनगंज जिले के 22 गांव का चयन हुआ है. यहां बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ संपर्क माध्यमों को बेहतर करने और रोजगार सृजन पर फोकस है ताकि पलायन को रोका जा सके.

वाइब्रेट विलेज क्यों अहम?: जानकार बताते हैं कि सीमावर्ती इलाके में वाइब्रेट विलेज को समृद्ध करना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि पड़ोसी देश इन्हीं इलाकों में गांव बसा रहे हैं और आबादी नहीं रहने से अतिक्रमण की संभावना बनी रहती है. इसके साथ ही अवैध कारोबार और तस्करी के लिए भी ये इलाके सेफजोन बन जाते हैं. ऐसे में केंद्र सरकार चाहती है कि वाइब्रेट विलेज को इतना सशक्त कर दिया जाए कि लोग उन इलाकों से पलायन नहीं करें और हमारी सीमा सुरक्षित हो.
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम क्या है?: भारत सरकार ने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को अप्रैल 2025 में मंजूरी दी थी. इसका उद्देश्य भारत के अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों का समग्र विकास करना है. इस योजना के तहत 1,954 गांवों को शामिल किया गया है, जो भारत-बांग्लादेश, भारत-नेपाल, भारत-भूटान, भारत-म्यांमार, भारत-पाकिस्तान और अन्य सीमाओं से लगते हैं. इसके जरिये पर्यटन को बढ़ावा, पलायन में कमी, स्थानीय संस्कृति का संरक्षण और सुरक्षा बलों के लिए सीमा सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है.
तीन दिन सीमांचल में रहेंगे अमित शाह : अमित शाह 25 फरवरी को पूर्णिया एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से हेलीकॉप्टर के जरिए किशनगंज के लिए रवाना हो गए. शाम 7 बजे तक किशनगंज समाहरणालय में उन्होंने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. किशनगंज में ही गृहमंत्री रात्रि विश्राम करेंगे.

वहीं, 26 फरवरी को सुबह अररिया के लिए प्रस्थान करेंगे. सुबह 11 बजे सीमा चौकी लेट्टी में उनका कार्यक्रम प्रस्तावित है. गृहमंत्री अररिया समाहरणालय में सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधीक्षकों और अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे. भारत-नेपाल सीमा से जुड़े मुद्दों पर समीक्षा बैठक के बाद वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II में हिस्सा लेंगे. पूर्णिया में रात्रि विश्राम करेंगे, जबकि 27 फरवरी को पूर्णिया में सीमावर्ती जिलों से जुड़े मामलों पर अधिकारियों के साथ हाई लेवल मीटिंग और समीक्षा बैठक के बाद दिल्ली लौट जाएंगे.
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