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6 साल की उम्र में 'मोहम्मद अजीज' जैसी गायकी, बिना डायरी देखे गा देते हैं दर्जनों गजलें

6 साल के गजल गायक निहित निरुपम की मखमली आवाज के लोग मुरीद हैं और 'नन्हे उस्ताद' के नाम से पुकारते हैं. रिपोर्ट- रत्नेश कुमार

Little Ghazal Singer Nihit Nirupam
6 साल का नन्हा गजल गायक (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : August 22, 2026 at 10:30 AM IST

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गया : कहते हैं प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती है. इसे सच कर दिखाया है बिहार के गया के 6 साल के निहित निरुपम ने. इनकी गायकी की तान के क्या कहने. लोग कह उठते हैं, 'वाह नन्हे उस्ताद वाह'. निहित निरुपम न सिर्फ गजल गाते हैं, बल्कि हिंदी और भोजपुरी फिल्मों के गाने भी वाद्य यंत्रों की धुनों के साथ मीठे सुरों में पिरो लेते हैं. यह कैसियो और हारमोनियम के भी उस्ताद हैं. महज 3 साल की उम्र से ही इसने गुनगुनाना शुरू कर दिया था. निहित निरुपम की तमन्ना है, कि उसका नाम एक दिन देश के बड़े गायको में शुमार हो.

6 साल का नन्हा गजल गायक : 6 साल का यह नन्हा उस्ताद गायन क्षेत्र में 6 साल की उम्र में ही अद्भूत और अनोखी क्षमता दिखा रहा है. गायकी बेहतर करने के लिए रोज घंटों परिश्रम करता है. गायकी की उसकी मधुर आवाज लोगों को हैरान कर देती है. कुछ कर दिखाने के लिए इतनी कम उम्र में वह रोजाना घंटों कठिन अभ्यास करता है.

Little Ghazal Singer Nihit Nirupam
ईटीवी भारत GFX (ETV Bharat)

3 साल की उम्र से गायकी का शौक : 6 साल का नन्हा गजल गायक निहित निरुपम बताता है, कि वह क्लास 2 का छात्र है. उसे गाने में काफी इंटरेस्ट है. वह देश में अपना नाम कमाना चाहता है. पढ़ाई में भी वह आगे बढ़ना चाहता है. उसे बड़ा गायक बनना है. तीन साल की उम्र का था, तो मम्मी गजल- गाने सुनती थी, तो मैं भी उसे गुनगुनाने लगा.

"मम्मी ने मेरी इस एक्टिविटी को देखा, तो मुझे सपोर्ट किया और आज मैं गजल और हिंदी भोजपुरी गाने गाता हूं. मैंने कई जगह पर स्टेज परफॉर्मेंस भी किया है. गांधी मैदान, बोधगया, पितृ पक्ष मेला में भी स्टेज परफॉर्मेंस किया और मुझे मेडल भी मिला है. मुझे आगे चलकर देश में गायकी के क्षेत्र में बड़ा नाम कमाना है."- निहित निरुपम, नन्हा गजल गायक

'मोहम्मद अजीज हैं फेवरेट सिंगर' : निहित बताते हैं कि मुझे गजल गायक गुलाम अली, चंदन दास, पंकज उधास पसंद हैं. मेरे सबसे पसंदीदा गायक के रूप में मोहम्मद अजीज हैं, जो हिंदी फिल्मी गानों के लोकप्रिय हमेशा से रहे हैं और उन्हीं की तरह गाने की कोशिश करता हूं. वहीं, भोजपुरी गाने में पवन सिंह पहली पसंद हैं.

6 साल का नन्हा गजल गायक (ETV Bharat)

पिता का गायक बनने का सपना रह गया अधूरा : गया शहर के शिवपुरी कॉलोनी रोड नंबर 2 के रहने वाले एक प्राइवेट स्कूल के टीचर और निहित निरुपम के पिता नवनीत कुमार बताते हैं, कि बचपन में मुझे भी गाने का शौक था. पिता किसान थे. स्थिति विपरीत थी, कोई जुगाड़ नहीं मिल पाया, तो हमारा सपना दब कर रह गया. लेकिन 3 साल की उम्र में मेरे बच्चे ने जब गाना शुरू किया, तो हमें लगा, कि अपने सपनों को बच्चों में देखें और उसे सफल बनाएं.

"इसके बाद हमने उसका (निहित निरुपम ) हौसला अफजाई करना शुरू कर दिया. तीन-साढे तीन साल की उम्र से ही वह गजल गुनगुनाने लगा. हिंदी और भोजपुरी गाने को भी गाने लगा. उसे गजल गाने का शौक काफी है. वह गजल में काफी कुछ करना चाहता है. गजल में वह गुलाम अली की तरह बनना चाहता है. गुलाम अली, चंदन दास और पंकज उधास उसके पसंदीद है. बड़ी बात यह है, कि कम उम्र में ही वह कैसियो- हारमोनियम बजा लेता है."- नवनीत कुमार, निहित निरुपम के पिता

'मिल चुके हैं कई मेडल' : नवनीत कुमार कहते हैं, 4 साल की उम्र से ही मेरा बेटा कैसियो और हारमोनियम बजाना शुरू कर दिया था. आज कैसियो- हारमोनियम का बजाने का वह उस्ताद बन गया है. उसने स्टेज पर परफॉर्मेंस भी किया है और उसे कई मेडल भी मिले हैं. नवनीत कुमार बताते हैं, कि पितृपक्ष मेले में गुलाम अली का गजल उसने गया था, जिसमें 'हम तेरे शहर में' का गजल गया था, जिसे काफी तारीफ मिली थी.

Little Ghazal Singer Nihit Nirupam
गाते हैं हिंदी और भोजपुरी फिल्मों के गाने (ETV Bharat)

'नन्हे उस्ताद के नाम से पुकारते हैं लोग' : उन्होंने आगे बताया कि चंदन दास का 'हाथ छूटेगा और पंकज उधास का चिट्ठी आई है, भी निहित ने गया है. निरूपम को लोग नन्हा गजल गायक कहते हैं. इसका गजल गायन काफी अच्छा है. वह गजल के साथ-साथ हिंदी और भोजपुरी गाने भी मधुर आवाज में गा लेता है. अभी उसकी उम्र 6 साल की ही हुई है, पर वह गायकी का उस्ताद कहा जाने लगा है.

निहित का है यूट्यूब चैनल : पिता ने उम्मीद जतायी कि एक दिन वह बड़ा गायक बनेगा. फिलहाल वह काफी नाम कर रहा है. उसका यूट्यूब चैनल भी है. उसके कई गाने भी रिकॉर्ड कराए हैं. मैं चाहता हूं, कि जिस तरह से कोई स्वाभाविक विद्या आती है, उसे लक्ष्य तक पहुंचना चाहिए और यही प्रयास मैं कर रहा हूं. मैं प्राइवेट टीचर हूं. फिर भी समय निकालकर अपने बच्चें को पूरा सपोर्ट करता हूं.

Little Ghazal Singer Nihit Nirupam
स्टेज में गा चुके हैं कई गानें (ETV Bharat)

"दोस्तों इस जमाने को क्या हो गया' की गायकी वह इस तरह गाता है, कि सुनने वाले लोग आश्चर्यचकित रह जाते हैं. कम उम्र में ही उसने हारमोनियम- कैसियो सीख लिया है. लगातार स्टेज पर परफॉर्मेंस दे रहा है. सबसे बड़ी बात है, कि उसे दर्जनों गाने मुंह जुबानी याद हैं. उसे काॅपी देखकर गाने की भी जरूरत नहीं पड़ती है."- नवनीत कुमार, निहित निरुपम के पिता

जब मां हो गई थी आश्चर्यचकित.. : निहित निरुपम की मां नीतू कुमारी बताती हैं, जब निहित 3 साल का था, तो उसमें संगीत के प्रति रुचि देखते ही बनती थी. जब मैं टीवी में गजल -गाने सुनती थी, तो यह भी गुनगुनाता था. पूछने पर कहता था कि उसे गुनगुनाने में काफी आनंद आता है. 3 साल की उम्र में इसकी संगीत के प्रति रुचि को देखकर मैं आश्चर्यचकित रह गई.

"हमने थोड़ा प्रयास किया, तो इसका इंटरेस्ट गायन के क्षेत्र में और बढ़ता हुआ दिखा. फिर 3 साल की उम्र से ही पूरी तरह से हमने सपोर्ट करना शुरू कर दिया. पढ़ाई के साथ-साथ उसकी बेहतर गायकी को लेकर भी प्रयास करने लगे. 5 साल की उम्र में ही इसे स्टेज मिलना शुरू हो गया. गत साल पितृपक्ष मेले में हुए कार्यक्रम में इसे मंच पर गाने का मौका मिला."- नीतू कुमारी, निहित निरुपम की मां

नीतू कुमारी ने अपने बेटे की सफलता को बयां करते हुए कहा, पितृपक्ष के कार्यक्रम में मंच पर इसकी गायकी प्रतिभा को काफी तारीफ मिली. इसके अलावे बोधगया में और गांधी मैदान में भी इसे मंच मिला और उसने गायकी की. इसे कम उम्र में बेहतर गायन को लेकर मेडल भी मिला है. कई मेडल यह पांच से साल की उम्र में ही प्राप्त कर चुका है.

Little Ghazal Singer Nihit Nirupam
स्टेज में परफॉर्म करते निहित (ETV Bharat)

"अब इसकी रुचि को देखते हुए इसे बाहर ले जाकर सीखाने का और इसे पूरी तरह से पारंगत करने का प्रयास कर रही हूं, ताकि संगीत के क्षेत्र में यह अपना नाम और कैरियर बना सके. जिस तरह से कम उम्र में गायकी के क्षेत्र में बढ़ रहा है, उससे पूरी आशा है, कि आने वाले दिन में यह देश स्तर पर गायकी में अपना नाम करेगा."- नीतू कुमारी, निहित निरुपम की मां

संगीत जगत का चमकता सितारा : गया के छह वर्षीय निहित निरुपम आज अपनी अद्भुत गायकी और वाद्य कला से हर किसी को विस्मित कर रहे हैं. माता-पिता के अटूट सहयोग, कठिन परिश्रम और असाधारण प्रतिभा के दम पर यह नन्हा उस्ताद निरंतर सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहा है. संगीत के प्रति निहित का यह समर्पण यह भरोसा जगाता है कि वे आने वाले समय में देश के शीर्ष गायकों में अपना स्थान अवश्य बनाएंगे.

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