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दिन में कैब ड्राइविंग, शाम को चाऊमीन स्टॉल… और एशिया में भारत का प्रतिनिधित्व, अमरदीप की कहानी व्यवस्था पर सवाल

दिन में किराए की कैब ड्राइविंग और शाम को चाऊमीन स्टॉल लगाकर झारखंड के खिलाड़ी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा फहराया.

THROWBALL PLAYER AMARDEEP
डिजाइन इमेज (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : February 26, 2026 at 5:48 AM IST

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रिपोर्ट: चंदन भट्टाचार्य

रांची: राजधानी रांची के अरगोड़ा चौक की चहल-पहल के बीच एक साधारण सा घर है, जहां से निकली एक असाधारण कहानी आज देश-दुनिया तक पहुंच रही है. यह कहानी है भारतीय थ्रो बॉल टीम के खिलाड़ी अमरदीप कुमार की उस खिलाड़ी की, जिसने गरीबी, संघर्ष और अभावों के बीच भी भारत के लिए स्वर्ण पदक जीते, लेकिन आज भी आर्थिक तंगी से जूझ रहा है.

कभी अमरदीप अपने माता-पिता के साथ अरगोड़ा चौक के पास सब्जी बेचा करते थे. सुबह सब्जी की टोकरी उठाकर बाजार जाना और दिनभर ग्राहकों की आवाज लगाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था. परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि खेल को प्राथमिकता दी जा सके, लेकिन अमरदीप के सपनों ने हालात से समझौता करने से इनकार कर दिया.

अंतरराष्ट्रीय थ्रो बॉल खिलाड़ी अमरदीप की कहानी (ETV Bharat)

किराए पर कैब चलाते हैं अमरदीप

आज अमरदीप भाड़े पर प्राइवेट वाहन चलाते हैं. इसके साथ ही अपने भाई के साथ मिलकर अरगोड़ा क्षेत्र में एक छोटी सी चाऊमीन की दुकान भी चलाते हैं. इसी आमदनी से घर का खर्च चलता है और खेल के लिए जरूरी खर्च भी किसी तरह जुटाया जाता है. लेकिन यह ‘किसी तरह’ ही उनकी सबसे बड़ी लड़ाई है.

2013 से शुरू हुआ सफर

अमरदीप ने वर्ष 2013 में थ्रो बॉल खेलना शुरू किया. सीमित संसाधनों और बिना किसी बड़े सपोर्ट सिस्टम के उन्होंने अपने खेल को निखारा. मेहनत रंग लाई और 2015 में उनका चयन जूनियर एशियाई चैंपियनशिप के लिए हुआ. इस चैंपियनशिप में अमरदीप ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता. यह पल उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट था. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. हर बार मंच पर तिरंगा लहराया, हर बार झारखंड और भारत का नाम रोशन हुआ. लेकिन हर मेडल के पीछे छिपी कहानी उतनी चमकदार नहीं थी.

THROWBALL PLAYER AMARDEEP
अमरदीप कहां- कहां लहराया तिरंगा (ETV Bharat)

कर्ज लेकर भेजते हैं देश-विदेश

अमरदीप के माता-पिता आज भी सब्जी बेचकर जीवन यापन करते हैं. पिता बताते हैं कि बेटे को प्रतियोगिताओं में भेजने के लिए कई बार कर्ज लेना पड़ा. वे कहते हैं, “हमने सोचा बेटा देश का नाम रोशन कर रहा है, पीछे क्यों हटें. लेकिन हर बार पैसे की चिंता सताती है,” वे कहते हैं परिवार ने कई बार उधार लेकर अमरदीप को देश और विदेश की प्रतियोगिताओं में भेजा. बेटे ने हर बार उम्मीदों को जीत में बदला, लेकिन आर्थिक सहयोग कहीं से नहीं मिला. मेडल तो मिले, पर स्थायी सहारा नहीं.

एशियाई चैंपियनशिप के लिए चयन, लेकिन चेहरे पर मायूसी

हाल ही में अमरदीप का चयन एशियाई चैंपियनशिप के लिए हुआ है. यह किसी भी खिलाड़ी के लिए गर्व का क्षण होता है. लेकिन अमरदीप के चेहरे पर खुशी से ज्यादा चिंता है. कारण साफ है प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं. भारतीय टीम में शामिल होने के बावजूद, नेपाल में होने वाली सीनियर थ्रो बॉल चैंपियनशिप में चयन के बाद भी वे इस दुविधा में हैं कि जाएं या नहीं. किराया, किट, यात्रा और अन्य खर्च मिलाकर बड़ी रकम की जरूरत है.

THROWBALL PLAYER AMARDEEP
अमरदीप का आर्थिक संघर्ष (ETV Bharat)

सरकार और विभाग से गुहार

अमरदीप ने झारखंड सरकार, खेल निदेशालय और खेल विभाग को लिखित रूप से सहयोग की मांग की. उनका कहना है कि थ्रो बॉल जैसे खेलों को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है. विभागीय स्तर पर कई बार यह कहकर टाल दिया जाता है कि यह ओलंपिक खेल नहीं है, इसलिए प्राथमिकता सीमित है.

हालांकि निदेशालय का कहना है कि इस खेल के लिए भी राज्य सरकार में कुछ प्रावधान हैं और किस मद से खिलाड़ियों को लाभ दिया जा सकता है, इस पर मंथन जारी है. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वर्षों से थ्रो बॉल खिलाड़ी सरकारी सहयोग से वंचित हैं, जबकि वे लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक ला रहे हैं.

international throwball player Amardeep
ट्रॉफी लेते अमरदीप (ETV Bharat)

अमरदीप निभा रहे दोहरी जिम्मेदारी

अमरदीप दिन में ड्राइविंग करते हैं, शाम को चाऊमीन स्टॉल संभालते हैं और समय निकालकर अभ्यास करते हैं. खेल उनके लिए जुनून है, लेकिन परिवार के लिए जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है. वे कहते हैं, “हमने हमेशा अपने प्रयास से देश का नाम रोशन करने की कोशिश की है. अगर सरकार से थोड़ा सहयोग मिल जाए तो हम और बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं.” उनकी मांग केवल व्यक्तिगत सहायता तक सीमित नहीं है. वे चाहते हैं कि झारखंड में थ्रो बॉल खिलाड़ियों को बेहतर संसाधन, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता मिले, ताकि आने वाली पीढ़ी को वह संघर्ष न झेलना पड़े जो उन्हें झेलना पड़ा.

international throwball player Amardeep
अपने शॉप में अमरदीप (ETV Bharat)

एक तरफ राज्य और देश खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की बात करते हैं, दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर कई खिलाड़ी संसाधनों के अभाव में टूट जाते हैं. अमरदीप जैसे खिलाड़ी यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या मेडल केवल बड़े खेलों से ही मायने रखते हैं? क्या छोटे खेलों के खिलाड़ियों का संघर्ष कम महत्वपूर्ण है?

अरगोड़ा चौक की गलियों से निकलकर एशियाई मंच तक पहुंचने वाला यह खिलाड़ी आज भी आर्थिक सहयोग का इंतजार कर रहा है. उसके पास हौसला है, मेहनत है, उपलब्धियां हैं, कमी है तो सिर्फ स्थायी सहारे की. अमरदीप की कहानी केवल एक खिलाड़ी की कहानी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जहां प्रतिभा को पहचान तो मिलती है, पर पर्याप्त समर्थन नहीं.

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