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कोचिंग फीस के लिए बेचे आलू, 7 बार देखी नाकामी...फिर पकड़ी कोटा की राह, अब सरकारी कॉलेज से MBBS करेगा अल्ताफ

अल्ताफ के पिता सड़क किनारे आलू बेचते हैं. अल्ताफ ने नवाबगंज में रहकर सात बार परीक्षा दी, लेकिन सरकारी सीट पाने में असफल रहा.

Altaf with his father and mother
पिता एवं माता के साथ अल्ताफ (ETV Bharat Kota)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : August 25, 2026 at 9:05 PM IST

5 Min Read
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कोटा: ना खराब आर्थिक स्थिति रोक पाई और ना ही बार बार की असफलता. बड़ा परिवार और कमाई कम. महंगी कोचिंग की फीस देने में परिवार सक्षम नहीं दिखा तो पिता के साथ आलू तक बेचे. यह संघर्षभरी कहानी है यूपी के बरेली के नवाबगंज निवासी अल्ताफ हुसैन अंसारी की, जो आठवें प्रयास में NEET UG एग्जाम के जरिए सरकारी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई करेगा. मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा नीट यूजी में 563 अंक हासिल करने वाले अल्ताफ की इस बार ऑल इंडिया रैंक 27,910 और ओबीसी में 13,437वीं रैंक है. परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण अल्ताफ पहले सात अटेम्ट अपने गृह कस्बे से दिए. महंगी फीस के कारण निजी मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं ले पाया. लिहाजा अच्छी रैंक के लिए बार-बार परीक्षा देता रहा. आखिर आठवें प्रयास में सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाने में कामयाब रहा. दिलचस्प यह है कि कोटा में कोचिंग लेकर यह उसका पहला ही प्रयास था.

भाई के एक्सीडेंट से बदला मन: अल्ताफ ने बताया, 12वीं पास करने के बाद पिता के साथ आलू की फड़ पर बैठना शुरू कर दिया था. बड़े भाई रात करीब दो बजे बरेली मंडी से आलू लाने जाते थे. एक दिन उनका एक्सीडेंट हो गया. 'इसने मेरे मन पर गहरा असर डाला. मैंने महसूस किया कि पूरी जिंदगी एक ही काम नहीं कर सकते और इसी सोच ने नीट की तैयारी को प्रेरित किया'. नवाबगंज कस्बे से हर साल 10-12 बच्चे नीट में सफलता हासिल कर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेते थे, उन्हें देखकर मोटिवेट होता था. वह एमबीबीएस में एडमिशन के लिए लगातार प्रयास करता रहा. यहां तक कि कोचिंग फीस के लिए सब्जी भी बेची. बाद में जैसे तैसे जुगाड़ कर कोटा पहुंचा और यहां आने के बाद पहले ही प्रयास में सफल हुआ.

नीट के सफल अभ्यर्थी अल्ताफ बोले... (ETV Bharat Kota)

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कोटा आकर चखा सफलता का स्वाद: अल्ताफ ने कहा, 'मेरी सफलता में कोटा कोचिंग का भी योगदान है. कुछ नंबरों से एमबीबीएस एडमिशन चूक रहा था. कोटा आने पर यह गैप खत्म हो गया. यहां आने के बाद पहले प्रयास में ही मुझे सफलता मिल गई. कोटा में मुझे पढ़ाई का वातावरण और फैकल्टी का गाइडेंस मिला, जो बीते सात साल के परीक्षा अटेम्प्ट में नहीं सीख पाया था. अब सोचता हूं कि अगर पहले कोटा आ जाता तो अब तक एमबीबीएस भी पूरी कर लेता'.

2019 में दी थी पहली परीक्षा, लगातार बढ़ते रहे अंक: अल्ताफ ने बताया कि साल 2019 से 2026 तक लगातार नीट परीक्षा दी. पहली बार 2019 में स्कोर 323 था, लेकिन तय किया कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा पार करनी ही है. पारिवारिक स्थिति कमजोर होने के चलते शुरू में कोटा नहीं आ सका, लेकिन बड़ी संख्या में उसके दोस्त कोटा आए थे. इन स्टूडेंट्स से नोट्स और स्टडी मैटेरियल ऑनलाइन मंगा लेता था. इसके अलावा ऑनलाइन ट्यूटर के जरिए भी पढ़ता था. कोरोना काल 2020 और 2021 में नीट में ज्यादा नंबर नहीं आए. 2022 की नीट में 516 अंक हासिल किए तो आत्मविश्वास बढ़ा. साल 2023 और 2024 में अंक बढ़कर 590 तक पहुंच गए, लेकिन सरकारी सीट नहीं मिली. साल 2025 में 501 अंक मिले, लेकिन सरकारी सीट पाने में असफल रहा.

Altaf with his family
परिवार के साथ अल्ताफ (ETV Bharat Kota)

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पिता बोले-नहीं सोचा था बेटा डॉक्टर बनेगा: अल्ताफ के पिता इकबाल हुसैन बोले, हमने कभी सोचा नहीं था कि अल्ताफ डाॅक्टर बनेगा. आलू बेचकर परिवार पालते हैंं. कभी इतना बड़ा सपना नहीं देखा. अल्ताफ ने कोशिश की. हम जितना सहयोग कर सके, किया. 'मुझे लगा कि कोटा पहले चला जाता तो यह परिणाम पहले ही अच्छा आ सकता था'. कोटा के एक कोचिंग संस्थान के फाउंडर नवीन माहेश्वरी ने कहा, अल्ताफ की सफलता दूसरे विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है. कोटा ऐसी सफलताओं से भरा है, इसीलिए यहां विद्यार्थी खुद का श्रेष्ठ देने को तैयार होते हैं. उनके रिजल्ट्स कुछ अलग और बेहतर होते हैं.

12 जनों का परिवार: अल्ताफ के पिता इकबाल हुसैन अंसारी अपने कस्बे में सड़क किनारे आलू बेचते हैं. अल्ताफ की मां कुबरां निरक्षर हैं, जबकि उसके एक बड़ा भाई और 8 बहनें हैं. सभी का विवाह हो चुका. परिवार की आमदनी ज्यादा नहीं थी. एक परिवार में 12 लोग रह रहे थे, लेकिन अल्ताफ पढ़ाई में अच्छा था. पिता इकबाल नौवीं तक ही पढ़े हैं, लेकिन पढ़ाई का महत्व जानते थे. इसीलिए अल्ताफ को लगातार मोटिवेट कर रहे थे. कोचिंग की मोटी फीस नहीं दे पा रहे थे. अल्ताफ ने यूपी बोर्ड से 10वीं और 12वीं में 85 प्रतिशत अंक हासिल किए थे.

Altaf's father sitting at the potato shop.
आलू की दुकान पर बैठे अल्ताफ के पिता (ETV Bharat Kota)

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