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अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट: गुजरात हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की मौत और 11 की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी

हाईकोर्ट 18 फरवरी 2022 को एक स्पेशल कोर्ट द्वारा सुनाई गई मौत की सजा के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था.

AHMEDABAD SERIAL BLAST CASE
गुजरात हाईकोर्ट (IANS)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : July 7, 2026 at 12:24 PM IST

4 Min Read
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अहमदाबाद: गुजरात हाईकोर्ट ने अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है. 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में अस्पतालों समेत कई जगहों पर 21 धमाके हुए थे. इनमें 56 लोगों की मौत हो गई थी. गुजरात हाईकोर्ट इस 18 साल पुराने मामले में स्पेशल कोर्ट द्वारा सुनाई गई मौत की सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रहा था. 18 फरवरी 2022 को स्पेशल कोर्ट ने इसे 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर) मामला मानते हुए 38 दोषियों को मौत की सजा और 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

क्या है पूरी घटना?

26 जुलाई 2008 की शाम को अहमदाबाद के अलग-अलग इलाकों में लगभग 45 मिनट के अंदर एक के बाद एक 21 बम धमाके हुए. मणिनगर, इसानपुर, नरोदा, बापू नगर, सरखेज और हटकेश्वर जैसे भीड़-भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाया गया. हमलावरों ने शहर में बसों, सार्वजनिक जगहों और बाजारों में बम लगाए थे. इस हमले की सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल और एल.जी. हॉस्पिटल को भी निशाना बनाया गया था.

जब पहले धमाके में घायल लोगों को इलाज के लिए अस्पताल लाया जा रहा था, तो वहां हुए धमाके से और भी लोग हताहत हुए. इस पूरे हमले में 56 लोगों की मौत हुई, जबकि 200 से ज़्यादा लोग घायल हुए. धमाके से पहले कुछ मीडिया हाउस को एक धमकी भरा ईमेल भेजा गया था, जिसमें हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था.

बाद में यह ईमेल जांच में एक अहम सबूत बना. अहमदाबाद धमाके के अगले ही दिन सूरत शहर के अलग-अलग इलाकों में 20 से ज़्यादा जिंदा बम मिले. अगर ये बम समय पर नहीं मिलते, तो एक और बड़ी त्रासदी हो सकती थी. जांच में अहमदाबाद और सूरत की घटनाओं के बीच संबंध का पता चला.

कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच, गुजरात एटीएस और अन्य जांच एजेंसियों ने मिलकर जांच की. जांच के दौरान गुजरात समेत देश के कई राज्यों से कई संदिग्धों को गिरफ़्तार किया गया. जांच एजेंसियों ने बताया कि साइकिल, कार, मोबाइल फ़ोन, सिम कार्ड, ईमेल, फ़ोरेंसिक सबूतों और गवाहों के आधार पर पूरी साजिश का पर्दाफाश किया. इस मामले में कुल 77 आरोपियों पर आरोप लगाए गए थे. लंबी सुनवाई के बाद, 8 फरवरी 2022 को अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट ने 49 आरोपियों को दोषी ठहराया, जबकि सबूतों की कमी के कारण 28 आरोपियों को बरी कर दिया गया.

38 आरोपियों को मौत की सजा और 11 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई

18 फरवरी 2022 को स्पेशल कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया, जिसमें 38 आरोपियों को मौत की सज़ा और 11 आरोपियों को उम्रकैद की सज़ा दी गई. कोर्ट ने इस मामले को 'दुर्लभतम से दुर्लभ' (rarest of rare) श्रेणी का माना और कहा कि मौत की सजा सही है. कोर्ट ने मारे गए लोगों और घायलों के परिवारों को मुआवजा देने का भी आदेश दिया.

सभी दोषियों ने स्पेशल कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ गुजरात हाईकोर्ट में अपील की थी. दूसरी ओर क्योंकि कानून के मुताबिक मौत की सजा को लागू करने के लिए हाईकोर्ट की मंजूरी जरूरी है, इसलिए राज्य सरकार ने भी हाईकोर्ट के सामने 'डेथ रेफरेंस' (मौत की सजा की पुष्टि के लिए प्रस्ताव) पेश किया था.

गुजरात हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने पिछले कई महीनों में दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनीं. दोषी पक्ष ने जांच प्रक्रिया, सबूतों और कबूलनामे को लेकर कई सवाल उठाए थे, जबकि राज्य सरकार ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखने की मांग की थी.

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