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राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर अब मोहन भागवत का भी आया बयान, संघ प्रमुख ने क्या कहा..

राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान सामने आया है.

RSS CHIEF MOHAN BHAGWAT
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत (ANI)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : July 5, 2026 at 6:04 PM IST

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नागपुर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े मामले में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने जो कहा है, वह उससे पूरी तरह सहमत हैं.

भागवत ने मीडिया से कहा, ‘‘होसबाले द्वारा जारी बयान देखिए... मेरी प्रतिक्रिया भी वही है.’’ उन्होंने एक कार्यक्रम से इतर राम मंदिर के चढ़ावे में कथित रूप से गबन से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर उक्त बात कही.

बता दें कि होसबाले ने शुक्रवार को एक बयान में कहा था कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित रूप से चोरी की घटना ने राम भक्तों के साथ ही पूरे समाज की आस्था को गहरी ठेस पहुंची है. उन्होंने कहा था कि जांच में दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को कड़ी सजा मिलनी चाहिए.

साथ ही होसबाले ने दावा किया था कि हिंदू विरोधी और राष्ट्रविरोधी ताकतें इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का लाभ उठाकर हिंदू धर्म को बदनाम करने का प्रयास कर रही हैं. होसबाले ने पूरे हिंदू समाज से अपील की थी कि वह इस कठिन समय में धैर्य और संयम को बनाए रखे ताकि इस तरह की सभी तरह साजिशों को विफल किया जा सके.

मोबाइल स्क्रीन, पारिवारिक मार्गदर्शन की कमी से बच्चे मानसिक तौर पर कमजोर हो रहे
वहीं नागपुर में ‘सनमर्ग माइंड वेलनेस सेंटर’ के उद्घाटन पर एक सभा में मोहन भागवत ने युवाओं में मानसिक मजबूती की तत्काल जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि पारिवारिक मार्गदर्शन की कमी और अत्यधिक ‘स्क्रीन टाइम’ (अधिक समय के लिए मोबाइल, टीवी, लेपटॉप और कंप्यूटर का इस्तेमाल) की वजह से बच्चे लगातार कमजोर होते जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि नयी पीढ़ी को बातचीत की जरूरत है, और उनके अकेलेपन को दूर करना होगा जो उनके भीतर घर कर जाता है. भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि समाज को युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए.

आरएसएस प्रमुख ने उल्लेख किया कि पांडवों के संघर्ष और चुनौतियों जैसी पौराणिक कथाएं कभी युवा मनों को शक्ति प्रदान करती थीं, लेकिन आज की स्थिति काफी चिंताजनक है.

भागवत ने पूछा, ‘‘12वीं कक्षा में अनुत्तीर्ण हो गए, तो वे आत्महत्या कर लेते हैं. घर में डांट पड़ी, तो वे भाग जाते हैं या कोई आत्मघाती कदम उठा लेते हैं. मन इस स्थिति में कैसे पहुंच गया?’’ उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि आज बच्चों को दादी-नानी द्वारा पारंपरिक कहानियों के माध्यम से मार्गदर्शन देने के बजाय, कम उम्र से ही टेलीविजन के सामने छोड़ दिया जाता है या फिर उन्हें मोबाइल फोन दे दिया जाता है.

भागवत ने रेखांकित किया कि दादी-नानी की अनुपस्थिति और माता-पिता द्वारा समय न दिए जाने की वजह से बच्चे अलग-थलग और अकेले हो गए हैं. उन्होंने कहा, ‘‘नयी पीढ़ी को बातचीत की जरूरत है. हमें उस अकेलेपन को दूर करना होगा जो उनके भीतर घर कर जाता है, और यदि वे गलतियां कर रहे हैं, तो यह अक्सर हमारे अपने मार्गदर्शन की विफलता है.’’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि घर के अलावा समाज, दोनों की प्राथमिक जिम्मेदारी एक ऐसी मानसिकता विकसित करना है जो जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि नई पीढ़ी कमजोर न बने.

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