इंदौर के बाद दिल्ली में भी दूषित पानी की जांच और सप्लाई पर सवाल!, नियमानुसार नहीं हो रही सैंपल की जांच
दिल्ली में सप्लाई होने वाले पीने के पानी की एक हजार सैंपल की जांच प्रतिदिन होनी चाहिए.

Published : January 4, 2026 at 8:05 PM IST
नई दिल्ली: इंदौर में दूषित पानी से कई लोगों की मौत के बाद देश की राजधानी दिल्ली में भी दूषित पानी का मुद्दा गरमा गया है. अब राष्ट्रीय राजधानी में भी पीने के पानी की शुद्धता जांच की व्यवस्था पर सवाल उठ गया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में 25 से ज्यादा सरकारी वाटर टेस्टिंग लैब (Water Testing Lab) में से सिर्फ दो ही लैब को नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग ऐंड कैलिब्रेशन (एनएबीएल) की मान्यता मिली है.
नियमों के अनुसार, दिल्ली में सप्लाई होने वाले पीने के पानी की एक हजार सैंपल की जांच प्रतिदिन होनी चाहिए. लेकिन अभी सिर्फ 300-400 सैंपल की जांच प्रतिदिन हो रही है. यह लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है. इस मामले को लेकर के दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के सदस्य और पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ अनिल गुप्ता का कहना है कि दिल्ली में पीने के पानी की सप्लाई की जिम्मेदारी दिल्ली जल बोर्ड की है. दिल्ली जल बोर्ड की अलग-अलग लैब में पीने के पानी की जांच होती है, जो मुनक नहर और यमुना से पीने के लिए सप्लाई किया जाता है.
''जल बोर्ड की हैदरपुर लैब में मुनक नहर के पानी की जांच होती है. जबकि, वजीराबाद लैब में यमुना के पानी की जांच होती है. इन जगहों पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी लगे हैं. इसके अलावा, गंग नहर के पानी की जांच और सप्लाई भागीरथी विहार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से होती है. इन सभी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के सैंपल की जांच सही तरीके से होनी चाहिए, क्योंकि इनका पानी पीने के लिए उपयोग होता है. साथ ही इस बात की भी मॉनिटरिंग होनी चाहिए कि कहीं सीवर लाइन और पीने के पानी की लाइन डैमेज होकर आपस में मिल न जाएं. इंदौर में भी यही हुआ पीने के पानी और सीवर लाइन का पानी मिक्स हो गया, जिसे पीने से लोगों की मौत हो गई.''- अनिल गुप्ता, पर्यावरण विशेषज्ञ
पीने के पानी की सैंपल जांच और मॉनिटरिंग में न हो कोई कमी
डॉक्टर अनिल गुप्ता ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की जांच लैब में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी की जांच होती है. इनमें सीवरेज और गंदे नालों के पानी को ट्रीट करना और उसको सिंचाई के योग्य बनाकर और जांच करके वापस यमुना में छोड़ना होता है. डीपीसीसी अपनी लैब से अलग अन्य एनएबीएल से मान्यता प्राप्त लैब को भी अपने पैनल में शामिल किया हुआ है. इन लैब की रिपोर्ट को भी प्रदूषण नियंत्रण समिति के द्वारा मान लिया जाता है. प्रदूषण नियंत्रण समिति की लैब की मान्यता एनएबीएल से होना कोई अति आवश्यक नहीं है, क्योंकि इन लैब का पीने के पानी की जांच से कोई लेना देना नहीं है.

दिसंबर में सात हजार से ज्यादा सैंपल की जांच, 100 सैंपल पाए गए फेल
अगर दिल्ली में सैंपल जांच के आंकड़ों की बात करें तो एक से 18 दिसंबर 2025 के बीच दिल्ली जल बोर्ड की लैब के द्वारा पानी के 7129 सैंपल की जांच की गई. इनमें 7029 सैंपल जांच में सही पाए गए. 100 पानी के सैंपल फेल हो गए. इन पानी के सैंपल का फेल होना चिंताजनक है. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने दिल्ली में दूषित जल की सप्लाई को लेकर कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि दिल्ली में जनकपुरी सहित कई जगह गंदे पानी की सप्लाई को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के बार-बार आदेश करने के बाद भी दिल्ली जल बोर्ड लोगों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने में विफल हो रहा है.

पांडव नगर में लोग दूषित पानी से परेशान
दिल्ली की लक्ष्मी नगर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले पांडव नगर इलाके के लोग आए दिन होने वाली दूषित पानी की सप्लाई से परेशान हैं. विनयपाल सिंह तंवर का कहना है कि कई बार लगातार कई दिन तक गंदा पानी आता है तो उससे काफी परेशानी होती है. नहाने के लिए भी उस पानी का इस्तेमाल करना मुश्किल होता है. जबकि पीने के पानी के लिए पहले से ही आरओ लगा रखा है. कई बार ज्यादा गंदा पानी आता है तो आरओ से भी साफ नहीं होता है तो फिर बाहर से बिसलरी के पानी की कैन मंगानी पड़ती है. वहीं, संजीव कुमार का कहना है कि अचानक सप्लाई में गंदा पानी आने लगता है तो उससे दिक्कत होती है बाद में पानी साफ भी आने लगता है. इसलिए हम पहले से ही आरओ का इस्तेमाल करते हैं.

इसके आलावा, पांडव नगर के ही सुरेंद्र सिंह का कहना है कि यहां पानी की पाइपलाइन काफी पुरानी है, जिसकी वजह से सीवर का पानी पीने के पानी में मिक्स हो जाता है और गंदा पानी आने लगता है. उससे काफी परेशानी होती है. गंदे पानी की आपूर्ति को रोकने के लिए पानी की पुरानी पाइपलाइन को बदला जाना चाहिए. पिछली सरकार ने भी पुरानी पाइपलाइन बदलने के लिए काम नहीं किया. इसलिए हमने सरकार बदली थी. अब सरकार बदल गई उसके बाद भी एक साल से सीवर लाइन बदलने के लिए अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है.
वहीं, एक अन्य एमके अरोड़ा ने बताया कि काफी दिन से उनका सीवर जाम हो गया है, जिसकी वजह से घर में गंदा पानी ओवरफ्लो कर रहा है. सप्लाई में भी गंदा पानी आ रहा है, जब सीवर चौक हो जाता है तो गंदा पानी आने लगता है. सीवर की सफाई के लिए कई बार कंप्लेंट दे चुके हैं. अभी तक सीवर साफ नहीं हुआ है, जिसकी वजह से गंदा पानी आ रहा है.

क्या बोले दिल्ली जल मंत्री
दिल्ली सरकार में जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा, ''दिल्ली में जिस इलाके में भी गंदे पानी की सप्लाई की शिकायत मिलती है उसको जल बोर्ड के संबंधित इलाके के जोनल ऑफिस के द्वारा दूर किया जाता है. पीने के पानी की सप्लाई करने से पहले सैंपल की जांच भी होती है. पानी की पुरानी पाइपलाइन को बदलने का काम भी शुरू हुआ है. दिल्ली के लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है.''
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