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बदरीनाथ कथित चढ़ावा चोरी मामला, जानिए कैसे होती है बदरी-केदार में भक्तों के दान की सुरक्षा, किसकी है जिम्मेदारी?

बदरीनाथ धाम में कथित चढ़ावा चोरी के आरोपों से बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है. रिपोर्ट- धीरज सजवाण.

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बदरीनाथ कथित चढ़ावा चोरी मामला (Photo-ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : July 4, 2026 at 7:42 PM IST

8 Min Read
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देहरादून: अयोध्या राम मंदिर की तरह उत्तराखंड में करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र बदरीनाथ धाम भी चर्चांओं में आ गया है. बदरीनाथ धाम में एक कर्मचारी पर कथित वित्तीय अनियमतिता का आरोप लगाया गया है. इस मामले में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समीति ने चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन भी कर दिया है. इस मामले के सामने आने के बाद ईटीवी भारत आपको मंदिर के अंदर आने वाले चढ़ावे और सुरक्षा की देखरेख कैसे की जाती है, इसके बारे में विस्तार से बताएगा. बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने दान और चढ़ावे की सुरक्षा और गणना की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की है.

पहले जानते हैं क्या है मामला: बीते रोज भैरव सेना संगठन के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री के बड़े आरोप के बाद बदरीनाथ धाम में चढ़ावे और दान चोरी की खबरों ने जोर पकड़ा. संदीप खत्री ने धाम में वित्तीय अनियमतिता का आरोप लगाते हुए दावा किया कि बीकेटीसी के कर्मचारी ने ही बदरीनाथ धाम में कथित चोरी की है. उन्होंने इस संबंंध में सीसीटीवी का भी जिक्र किया और कहा कि एक समयसीमा का फुटेज जारी किया जाए जिसमें चोरी हुई है.

बदरीनाथ कथित चढ़ावा चोरी मामला (Photo-ETV Bharat)

संदीप खत्री ने बताया कि इससे संबंधित एक पत्र उन्होंने बीकेटीसी सीईओ सोहन रांगड़ को लिखा है और मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है. इन आरोपों के बाद बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी खुद सामने आए और निष्पक्ष जांच की बात कही. वहीं, अगले ही दिन बीकेटीसी ने इस मामले की जांच के लिए चार सदस्य कमेटी का गठन किया. साथ ही बीकेटीसी की तरफ से जिस कर्मचारी पर आरोप लगा और अन्य कर्मचारियों को नोटिस भी जारी किया है.

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भैरव सेना संगठन की तरफ से बीकेटीसी को लिखा गया पत्र. (Source- Bhairav ​​Sena Organization)

सार्वजनिक की दान-चढ़ावे की गणना की प्रक्रिया: वहीं, BKTC ने पारदर्शिता दिखाते हुए बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे की गणना को लेकर सोशल मीडिया में उठे सवालों के बाद अपनी पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की है. समिति का कहना है कि दान पात्रों से प्राप्त नकदी और अन्य चढ़ावे की गिनती निर्धारित नियमों के तहत अधिकारियों की निगरानी में की जाती है. पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सीसीटीवी निगरानी, रजिस्टर रिकॉर्ड और बैंक सत्यापन जैसी व्यवस्थाएं लागू हैं.

BKTC के अनुसार बदरीनाथ धाम में श्रद्धालु मंदिर सभा मंडप, परिक्रमा क्षेत्र और अन्य स्थानों पर रखे गए दान पात्रों में श्रद्धानुसार दान और चढ़ावा अर्पित किया जाता है. इन दान पात्रों की गिनती मंदिर परिसर के पीछे स्थित निर्धारित गणना स्थल पर की जाती है. समिति का दावा है कि यह स्थान सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है, जहां दीवार, एल्यूमिनियम पार्टिशन और ग्रिल की व्यवस्था है. प्रवेश के लिए नियंत्रित दरवाजे बनाए गए हैं.

जानिए कैसे होती है चढ़ावे की गिनती: समिति के मुताबिक,

  • दान पात्रों की चाबियां धर्माधिकारी के पास रहती हैं.
  • निर्धारित समय पर मंदिर दफेदार (मुख्य सुरक्षा गार्ड) की देखरेख में दान पात्रों को गणना स्थल तक लाया जाता है.
  • इसके बाद मंदिर व्यवस्था के लिए नियुक्त प्रभारी अधिकारी की मौजूदगी में दान पात्र खोले जाते हैं.
  • फिर चढ़ावे को गणना स्थल पर खाली किया जाता है.
  • गणना शुरू होने से पहले पूरे स्थल की सफाई कर उसे व्यवस्थित किया जाता है, ताकि प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो सके.

श्रद्धालुओं की भी सहायता ली जाती है: BKTC का कहना है कि,

  • प्राप्त चढ़ावे को अलग-अलग करने के लिए मंदिर कर्मचारियों के साथ श्रद्धालुओं की भी सहायता ली जाती है.
  • गणना स्थल पर कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का नाम और मोबाइल नंबर रजिस्टर में दर्ज किया जाता है.
  • इसके बाद नकदी, सिक्कों और अन्य चढ़ावे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर व्यवस्थित किया जाता है.
  • पूरी प्रक्रिया प्रभारी अधिकारियों की निगरानी में संपन्न होती है.
  • उसका लेखा-जोखा निर्धारित रजिस्टर में दर्ज किया जाता है.

बैंक में जमा होती है नकदी, सील कर रखे जाते हैं बहुमूल्य चढ़ावे: समिति के अनुसार, नकदी की गिनती पूरी होने के बाद धनराशि को राष्ट्रीयकृत बैंक (Public Sector Banks) में जमा कराया जाता है. बैंक भी राशि की दोबारा गिनती करता है और उसके बाद संबंधित रसीद जारी की जाती है. नकदी के अलावा प्राप्त होने वाले सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य चढ़ावों को अलग-अलग किया जाता है. प्रभारी अधिकारी की मौजूदगी में उनका वजन किया जाता है और नियमानुसार रजिस्टर में दर्ज करने के बाद उन्हें पैक कर सील कर दिया जाता है.

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बदरीनाथ धाम में लोगों की अटूट आस्था (Photo-ETV Bharat)

सील कर डबल लॉक रखे जाते हैं बहुमूल्य चढ़ावा: BKTC का दावा है कि इन सीलबंद पैकेटों को मंदिर के डबल लॉक सिस्टम में सुरक्षित रखा जाता है. डबल लॉक की चाबियां मंदिर अधिकारी और खजांची के पास रहती हैं. समिति का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान और चढ़ावे की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे.

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बड़ी तादाद में देश विदेश से दर्शन के लिए पहुंचते हैं श्रद्धालु (Photo-ETV Bharat)

CCTV निगरानी में पूरी प्रक्रिया: समिति ने पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह भी स्पष्ट किया है कि गणना स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. बदरीनाथ धाम में पूर्व में लगे कैमरों के स्थान पर उच्च क्षमता वाला 32 चैनल एनवीआर आधारित सीसीटीवी सिस्टम स्थापित किया गया है. समिति के अनुसार इन कैमरों की रिकॉर्डिंग लगभग एक माह तक सुरक्षित रखी जाती है.

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फूलों से सजा बदरीनाथ धाम (Photo-ETV Bharat)

केदारनाथ धाम में दान गिनती की प्रकिया: केदारनाथ धाम में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू होने का दावा किया गया है. समिति के मुताबिक वहां चढ़ावे की गिनती मंदिर परिसर के पूर्वी द्वार के पास स्थित ग्लास हाउस में की जाती है. पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखा जाता है. सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग लगभग 15 दिन तक सुरक्षित रहती है. भविष्य में केदारनाथ में भी बदरीनाथ की तर्ज पर निगरानी प्रणाली को और उन्नत करने की योजना बताई गई है.

बदरीनाथ धाम में दो से तीन दिन के अंतराल पर मंदिर में प्राप्त चढ़ावे की गिनती की जाती है. इस प्रक्रिया में केवल मंदिर समिति के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि कुछ तीर्थयात्री भी शामिल होते हैं. गिनती के दौरान मंदिर समीति और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहते हैं, जो पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते हैं. गिनती पूरी होने के बाद धनराशि को बैंक में जमा करा दिया जाता है.
- आशुतोष डिमरी, अध्यक्ष, बदीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय संस्था -

इसके अलावा आशुतोष डिमरी का कहना है कि हाल में जो मामला सामने आया है, वह बेहद गंभीर है और इस पर मंदिर समिति द्वारा तत्काल जांच के आदेश देना स्वागत योग्य है.

इस मामले में जांच और पूरे मामले का पटाक्क्षेप जल्द से जल्द होनी चाहिए और जल्द से जल्द दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए. यदि कोई गड़बड़ी नहीं पायी जाती है तो सनातन को बदनाम करन वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
- आशुतोष डिमरी, अध्यक्ष, बदीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय संस्था -

चारधाम महापंचायत ने उठाए सवाल: वहीं चारधाम महापंचायत के पदाधिकारी बृजेश सती का कहना है कि चढ़ावे की गिनती की व्यवस्था वर्षों से चली आ रही प्रक्रिया के अनुसार होती है, लेकिन लगातार सामने आ रहे विवादों की श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा हो रही है.

जब किसी संस्था पर सवाल उठते हैं तो उन आरोपों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होना बेहद जरूरी हो जाता है. जांच समितियों का गठन करना पर्याप्त नहीं है बल्कि उनकी रिपोर्ट भी सार्वजनिक होनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे. मंदिरों में आने वाला दान करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है, इसलिए पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर किसी प्रकार की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए.
- बृजेश सती, पदाधिकारी, चारधाम महापंचायत -

फिलहाल चढ़ावे की गिनती को लेकर उठे विवाद के बीच BKTC अपनी व्यवस्थाओं को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बता रही है. दूसरी ओर धार्मिक संगठनों और सामाजिक प्रतिनिधियों का कहना है कि जांच रिपोर्टों को सार्वजनिक कर सभी शंकाओं को दूर किया जाना चाहिए. ऐसे में अब सभी की निगाहें समिति द्वारा गठित जांच पर टिकी हैं, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उठाए जा रहे सवालों में कितना दम है.

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