इन देशों में स्लीपर बसें हैं बैन, जानिए हादसा होने पर क्यों बचना हो जाता है मुश्किल
स्लीपर बस में आग लगने से बस की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं. जानते हैं किन देशों यह बसें बैन हैं.

Published : October 26, 2025 at 6:55 PM IST
हैदराबाद : देश में बीते दो सप्ताह में तीन बड़े बस हादसे में करीब 50 यात्रियों की जल जाने से मौत हो गई. इसमें भी अधिकांश यात्री सफर के दौरान नींद में थे. वहीं मध्य प्रदेश के अशोकनगर में शनिवार की रात सवारियों को लेकर इंदौर जा रही एक स्लीपर बस में आग लग गई. हालांकि सभी यात्री बच गए. इतना ही नहीं कुछ बड़े देश स्लीपर बसों को अपने यहां बैन कर चुके हैं, वे बसें भारत में लग्जरी सफर की पहचान बन गई हैं. लेकिन एक बार बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर क्या स्लीपर बस सुरक्षित हैं या नहीं.
इन देशों पर स्लीपर बस प्रतिबंधित
जर्मनी- यहां पर कई बड़ी दुर्घटनाओं की वजह से 2006 में स्लीपर बसों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. बताया जाता है कि 2000 के दशक में जर्मनी में यह बसें काफी लोकप्रिय हो गईं थीं. इन बसों की ऊंची बनावट के कारण इनके पलटने का खतरा भी अधिक था. साथ ही सोते समय यात्रियों के बेल्ट नहीं बांधने से हादसा होने पर उछलकर गिरने से उनकी मौत हो जाती थी.
चीन- चीन ने 2012 में कई भीषण आग और सड़क हादसों के बाद 2012 में जाकर नई स्लीपर बसों के निर्माण और रजिस्ट्रेशन पर प्रतिबंध लगा दिया था और 2018 में सभी पुरानी स्लीपर बसें हटा दीं. बता दें कि चीन में रेल नेटवर्क की कमी के कारण 1990 के दशक के दौरान स्लीपर बसों की शुरूआत हुई. चीन में 2009 से 2012 के दौरान 13 हादसों में 252 लोगों की मौत ने हिलाकर रख दिया. इसके बाद गाइडलाइन कड़ी की गईं लेकिन उसका लाभ नहीं मिला. फलस्वरूप डिजाइन की कमी, लंबे सफर में ड्राइवर को आराम न मिलने, ओवरलोडिंग और सीटों के बीच कम जगह के कारण इसे प्रतिबंधित कर दिया गया.
इंग्लैंड (यूके)- इंग्लैंड में स्लीपर बसों पर 2017 में पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया. बसों को कमर्शियल बस सर्विस में फेल पाया गया, साथ ही इसकी लागत तो अधिक थी लेकिन खतरा अधिक था. हालांकि इंग्लैंड में 1920 से 50 दशक के दौरान में स्लीपर कोच का काफी प्रचलन था. लेकिन इन बसों में शॉर्ट सर्किट होने की आशंका के अलावा सुरक्षा की कमी की वजह से इनको बंद कर दिया गया. दूसरी तरफ लंबी दूरी तय करने के लिए स्लीपर ट्रेन को अधिक सुरक्षित माना गया.
भारत में हुए स्लीपर बस में हादसों की वजह
| बिजली शॉर्ट सर्किट: एसी यूनिट की खराब वायरिंग के अलावा ओवरलोडिंग या पुरानी मॉडिफिकेशन से स्पार्क. जैसलमेर और वेल्लोर मामलों में यही हुआ. |
| ईंधन रिसाव और टक्कर: बाइक का टैंक के फटने से आग, जैसा कुरनूल में हुआ. साथ ही नींद की कमी वाले ड्राइवर हाई स्पीड पर कंट्रोल खो देते हैं. |
| डिजाइन की कई कमियां: बस की स्लीपर बर्थ की संकरी गलियां के अलावा ब्लॉक इमरजेंसी गेट का सील होना, ज्वलनशील इंटीरियर और सील्ड एसी सिस्टम धुएं को फैलने नहीं देते. |
| रखरखाव की कमी: प्राइवेट ऑपरेटर्स सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हैं; कई बसें पुरानी या अवैध मॉडिफाइड. |
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