Explainer: योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, शाजिया इल्मी से लेकर राघव चढ्ढा तक, इन लोगों ने क्यों छोड़ा 'आप' का साथ
अरविंद केजरीवाल की पार्टी के तमाम नेताओं ने उनसे दूरी बना ली है. जानें विस्तार से.

Published : April 25, 2026 at 9:55 AM IST
हैदराबाद: आम आदमी पार्टी (आप) के लिए शुक्रवार 24 अप्रैल 2026 का दिन अच्छा नहीं रहा. पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद राघव चढ्ढा समेत 7 सांसदों ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया और उसके बाद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. जानकारी के मुताबिक आम आदमी पार्टी के लिए अब तक की यह सबसे बड़ी टूट है.
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब पार्टी नेताओं का मोह भंग हुआ हो. इससे पहले भी कई नेताओं ने या तो खुद से पार्टी छोड़ दी या फिर उन्हें निष्कासित कर दिया गया. इससे आप (AAP) की जरूर कुछ परेशानियां बढ़ी हैं. आइये सिलसिलेवार डालते हैं ऐसे नेताओं पर एक नजर, जिन्होंने आम आदमी पार्टी से दूरी बना ली है.

2012 में बनी थी आम आदमी पार्टी
आपको बता दें, साल 2012 में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी का गठन हुआ था. उस समय तमाम दिग्गजों ने अपने पेशे को छोड़कर पार्टी का दामन थामा था. जन लोकपाल बिल और भ्रष्टाचार के चलते राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के रामलीला मैदान में समाज सुधारक अन्ना हजारे के नेतृत्व में यह आंदोलन शुरू हुआ था. उसी के बाद इस पार्टी का निर्माण हुआ. 2012 से लेकर 2026 तक तमाम पार्टी नेताओं ने अब पाला बदल लिया है.
ताजा घटनाक्रम के मुताबिक सांसद राघव चढ्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल ने शुक्रवार को पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए. इनके अलावा स्वाति मालीवाल, पंजाब से सांसद और पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सहनी के भी नाम शामिल बताए जा रहे हैं.

2015-2018 से शुरू हुआ विवाद
आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने पार्टी में लोकतंत्र की कमी का हवाला दिया. इसी वजह से उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया. इस बात का समर्थन पार्टी के अन्य सदस्यों प्रो. आनंद कुमार और अजीत झा, अंजलि दमानिया और मयंक गांधी ने भी किया और इस्तीफा दे दिया. विनोद कुमार बिन्नी साल 2014 में पार्टी में बागी हो गए. इसके बाद उन्हें भी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया. इसके बाद साल 2017 में कपिल मिश्रा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निकाल दिया गया. आशुतोष ने पर्सनल कारणों को बताते हुए साल 2018 में पार्टी छोड़ दी. इसके बाद अरविंद केजरीवाल के खास रहे कुमार विश्वास ने भी धीरे-धीरे पार्टी गतिविधियों से दूरी बना ली. देश की पहली महिला आईपीएस किरण बेदी ने भी पार्टी से दूरी बना ली.
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प्रशांत भूषण
सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने पार्टी के तौर-तरीकों पर निशाना साधा था और कहा कि पार्टी सिर्फ एक शख्स पर क्रेंद्रित है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी में स्वराज की कमी है. उन्होंने पार्टी को मिलने वाले फंड पर भी सवाल उठाए और जांच की मांग की. जल्दी ही उनका पार्टी से मोह टूट गया और वे इससे अलग हो गए. बता दें, कि प्रशांत भूषण के पिता और सीनियर एडवोकेट शांति भूषण ने पार्टी को 1 करोड़ रुपए का चंदा भी दिया था.

शाजिया इल्मी ने भी छोड़ा साथ
पेशे से पत्रकार रहीं शाजिया इल्मी ने पार्टी में लोकतंत्र की कमी का आरोप लगाया और इस्तीफा दे दिया. उन्होंने 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले ही खुद को पार्टी से अलग कर लिया था. इससे पहले उन्होंने साल 2014 में गाजियाबाद से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया.

योगेंद्र यादव ने असंतोष को बताया कारण
योगेंद्र यादव की बात करें तो उन्होंने बयान दिया था कि इस पार्टी का जन्म भ्रष्टाचार के खिलाफ एक आंदोलन के चलते हुआ है. जनता ने इसे पसंद किया. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी का कामकाज का तरीका अन्य पार्टियों की तरह ही हो गया है. इस वजह से उनमें नाराजगी देखी गई और अपनी एक अलग पार्टी बनाई, जिसका नाम स्वराज अभियान रखा.

अब बात करते हैं कुमार विश्वास की
2012 में अन्ना आंदोलन से जुड़े रहे कुमार विश्वास अरविंद केजरीवाल के बहुत खास माने जाते थे. उन्होंने ही इनकी पार्टी में एंट्री कराई थी. कुमार विश्वास ने साल 2014 में राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी से चुनाव भी लड़ा, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल सकी. काफी दिनों से पार्टी गतिविधियों से दूर चल रहे कुमार विश्वास से जब एक सवाल पूछा गया कि क्या आपकी राजनीतिक यात्रा ठहर गई है तो उन्होंने कहा कि मैं झूठ नहीं बोल सकता. मैं अपने बच्चों की कसम खाकर कहता हूं कि मैं अब इसमें फिर से कदम नहीं रखूंगा. मैं हमेशा से गलत कामों के खिलाफ रहा हूं. इसलिए मुझे पसंद नहीं किया जाता.

कपिल मिश्रा ने छोड़ी पार्टी
इसी लिस्ट में कपिल मिश्रा का भी नाम शामिल है. उन्होंने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ जमकर मोर्चा खोला. उन्होंने कहा कि मैंने केजरीवाल को सतेन्द्र जैन से उन्हें दो करोड़ की राशि लेते हुए देखा है. पानी टैंकर घोटाले को लेकर भी उन्होंने निशाना साधा था. इसके बाद उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया. अब वे बीजेपी की रेखा गुप्ता सरकार में मंत्री हैं.

स्वाति मालीवाल का मामला समझिए
आम आदमी पार्टी की तरफ से राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने सीएम केजरीवाल के पीए बिभव कुमार के खिलाफ केस दर्ज कराया था. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा था कि जब वे सीएम आवास गईं तो बिभव कुमार ने उनके साथ मारपीट और अभद्रता की. इसके चलते दिल्ली पुलिस ने बिभव कुमार को गिरफ्तार भी किया था. शुक्रवार 24 अप्रैल को उन्होंने कहा कि मैं पार्टी के काम से ईटानगर आई हूं और वापस लौटने पर बयान दूंगी. इसके बाद शाम तक उन्होंने भी पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी. जानकारी के मुताबिक स्वाति मालीवाल जनवरी 2024 में पार्टी की तरफ से राज्यसभा भेजी गई थीं. वह दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष भी रह चुकी है. अरविंद केजरीवाल से विवाद के बाद से पार्टी से उनकी नाराजगी जगजाहिर है.

अलका लांबा समेत इन्होंने ने भी छोड़ा साथ
पार्टी के केंद्र में रहीं अलका लांबा ने भी पार्टी गतिविधियों पर सवाल उठाए. खिन्न होकर उन्होंने साल 2019 में पार्टी से इस्तीफ दे दिया और कांग्रेस में शामिल हो गईं. इसके बाद एचएस फुलका ने राजनीति से संन्यास ले लिया. राज कुमार आनंद ने 2024 में पार्टी कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इस्तीफा दे दिया. इसके बाद नरेश यादव, भावना गौड़, राजेश ऋषि समेत कई नेताओं ने पार्टी से दूरी बना ली.

आम आदमी पार्टी और राघव चढ्ढा में क्या हुआ
अरविंद केजरीवाल और राघव चढ्ढा में टकराव उस समय बढ़ा जब केजरीवाल शराब घोटाले के चलते तिहाड़ जेल गए और राघव का इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. वे अपनी पत्नी और एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा संग विदेश चले गए. उन्हें लोकसभा चुनाव के चलते पंजाब से दूर रखा गया. शुक्रवार को उन्होंने प्रेस कॉफ्रेंस करते हुए कहा कि मैं गलत बातें सहन नहीं करता. उन्होंने कहा कि मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूं और इसी के चलते पार्टी से दूर जा रहा हूं.

अशोक मित्तल के बारे में भी जानें
आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता अशोक कुमार मित्तल लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में चांसलर पद पर हैं. उन्हें साल 2022 में राज्यसभा भेजा गया था. कुछ दिनों पहले राघव चढ्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाकर उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी हरभजन सिंह ने तीन साल पहले मार्च 2022 में आम आदमी पार्टी से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी और पार्टी ने उन्हें पंजाब से राज्यसभा भेजा था. जानकारी के मुताबिक उन्होंने 18 जुलाई 2022 को सांसद के तौर पर शपथ ली और उनका कार्यकाल 2028 तक है.

विक्रमजीत सिंह साहनी
अब बात विक्रमजीत सिंह साहनी. ये एक समाजसेवी हैं. इन्हें मॉरिशस के राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार से भी सम्मानित किया है. ये शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं.

संदीप पाठक
संदीप पाठक की बात करें तो यह भी अप्रैल 2022 से पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं. अरविंद केजरीवाल ने इन्हें राष्ट्रीय महासचिव पद दिया था. जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक संदीप पाठक आईआईटी दिल्ली में असिस्टेंट प्रोफेसर भी रह चुके हैं. इन्हें अरविंद केजरीवाल का बेहद करीबी माना जाता रहा है. पंजाब में पार्टी की जीत में इनका विशेष योगदान रहा है.
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