चमोली में 19 साल की युवती की नदी में डूबने से मौत, एक हफ्ते बाद मिला शव, इस रूढ़ी को माना जा रहा कारण
मासिक धर्म से जुड़ी रूढ़िवादिता के चक्कर में उत्तराखंड के चमोली जिले में 19 साल की युवती की मौत हो गई.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 24, 2026 at 4:02 PM IST
चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले से बड़ी खबर सामने आई है. 15 अगस्त की शाम लापता हुई 19 साल की युवती का शव शनिवार को तांगला बैंड के सामने पुराने पावर हाउस के समीप नंदाकिनी नदी से बरामद हुआ. बताया जा रहा है कि 19 वर्षीय युवती की नंदाकिनी नदी में डूबने से मौत हुई थी. इस घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया. घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है. युवती के नदी में डूबने का बड़ा कारण मासिक धर्म से जुड़ी एक रूढ़िवादी परंपरा से जुड़ा बताया जा रहा है.
पांच किलोमीटर दूर नदी तक जाना पड़ता था: ग्रामीणों के अनुसार तातड़ा तोक में भूमियाल देवता की भूमि से जुड़ी मान्यताओं के कारण मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के गांव की सीमा के भीतर स्नान करने को लेकर रोक की परंपरा रही है. इसके चलते उन्हें स्नान के लिए करीब पांच किलोमीटर दूर नंदाकिनी नदी के किनारे जाना पड़ता था.
ग्रामीण बताते हैं कि पहाड़ी क्षेत्रों में पहले नदी और गधेरों में स्नान करना जीवनशैली और सामाजिक परंपरा का हिस्सा रहा है. गांवों में पानी की सुविधाएं सीमित होने के दौर में लोग सामूहिक रूप से नदी-गधेरों में स्नान करते थे. हालांकि समय के साथ घर-घर पानी की सुविधा बढ़ने और जागरूकता आने से यह परंपरा अब लगभग समाप्त हो चुकी है. इसके बावजूद कुछ स्थानों पर धार्मिक-सामाजिक मान्यताओं से जुड़ी ऐसी पाबंदियां अभी भी सवाल खड़े कर रही हैं.
सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद निकली थी युवती: बताया गया कि 15 अगस्त को सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने के बाद युवती शाम के समय स्नान के लिए नदी की ओर गई थी. इसके बाद वह घर नहीं लौटी. परिजनों और ग्रामीणों ने उसकी तलाश शुरू की. उसी रात नदी से करीब एक किलोमीटर दूर उसकी चप्पल मिलने के बाद नदी में बहने की आशंका जताई गई. इसके बाद ग्रामीण लगातार नदी क्षेत्र में उसकी तलाश करते रहे.
शनिवार को बुरा गांव के कुछ लोग श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे थे. इसी दौरान एक ग्रामीण की नजर नंदाकिनी नदी में फंसे शव पर पड़ी. स्थानीय निवासी दीपक पंवार ने इसकी सूचना तत्काल पुलिस और तहसील प्रशासन को दी.
डीआरडीएफ टीम ने नदी से निकाला शव: सूचना मिलते ही डीडीआरएफ नंदानगर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची. टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद शव को नदी से बाहर निकाला. शव की पहचान 19 वर्षीय लापता युवती के रूप में हुई. आवश्यक कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसके बाद अंतिम संस्कार किया गया.
मौत के बाद परंपरा पर उठे सवाल: युवती की मौत के बाद ग्रामीणों में शोक के साथ ही मासिक धर्म से जुड़ी रूढ़ियों को लेकर भी नाराजगी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी मान्यता के कारण महिलाओं और किशोरियों को गांव से दूर नदी या गधेरों जैसे स्थानों पर स्नान के लिए जाना पड़ता है तो उनकी सुरक्षा का सवाल स्वाभाविक रूप से खड़ा होता है.
ग्रामीणों का कहना है कि धार्मिक आस्था और परंपराओं का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन बदलते समय के साथ उन मान्यताओं पर भी विचार होना चाहिए, जिनसे किसी की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है. लोगों ने कहा कि नदी और गधेरों में स्नान की पुरानी ग्रामीण परंपरा अब लगभग समाप्त हो चुकी है, ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शेष रूढ़ियों में भी बदलाव जरूरी है.
आस्था के साथ सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग: घटना के बाद ग्रामीणों ने बुजुर्गों, जनप्रतिनिधियों और युवाओं से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है. उनका कहना है कि आस्था अपनी जगह है, लेकिन किसी महिला या बेटी की सुरक्षा और सम्मान उससे ऊपर होना चाहिए.
युवती की मौत ने एक परिवार को गहरा सदमा देने के साथ ही समाज के सामने यह सवाल भी खड़ा किया है कि समय के साथ बदलती परिस्थितियों में पुरानी मान्यताओं की समीक्षा कैसे की जाए. ग्रामीणों को उम्मीद है कि घटना के बाद महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में सकारात्मक पहल होगी.
सुतोल में पुलिस ने ग्रामीणों से की पूछताछ: नंदानगर चौकी के उपनिरीक्षक (SI) मनोज भट्ट ने बताया कि पुलिस ने गांव में जाकर ग्रामीणों से मामले के संबंध में पूछताछ की. इस दौरान युवती के पिता से भी यह जानकारी ली गई कि क्या गांव में महिलाओं या युवतियों को जबरन नदी अथवा गधेरे में नहाने के लिए भेजा जाता है. पिता ने ऐसी किसी जबरदस्ती से साफ इनकार किया.
उन्होंने बताया कि परिवार ग्राम सभा सुतोल का रहने वाला है, लेकिन वर्तमान में तातड़ा तोक में निवास करता है. पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि क्षेत्र में पुरानी मान्यता के तहत मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के पास के गधेरों और नदी में स्नान करने की परंपरा रही है. हालांकि, पुलिस के अनुसार पूछताछ में किसी महिला या युवती को जबरन नदी अथवा गधेरे में नहाने के लिए भेजे जाने की बात सामने नहीं आई है.
पढ़ें---

