9 साल की उम्र में 19000 KM साइकिल यात्रा, अब 'गौ माता' के लिए नन्हे यशराज करेंगे दिल्ली तक पैदल यात्रा
9 साल के यशराज ने साइकिल से 19000 KM का सफर किया. अब दिल्ली तक पैदल यात्रा करेंगे. रत्नेश कुमार की रिपोर्ट

Published : August 18, 2026 at 7:41 PM IST
गया : बिहार के बोधगया का नौ वर्षीय बालक यशराज इन दिनों चर्चा में है. लोग उसे आदर से राम भक्त कहकर बुलाते हैं. उसके अटूट हौसले और दृढ़ संकल्प सबको अचंभित करने वाले हैं. इस नन्हीं सी उम्र में जहां बच्चों को सांसारिक ज्ञान नहीं होता, वहीं यशराज ने एक अद्भुत मिसाल कायम की है. उसने साइकिल से संपूर्ण भारत की यात्रा का एक बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया है. वहीं यशराज की अब दिल्ली की पैदल यात्रा का लक्ष्य भी है, ताकि पीएम मोदी को अपनी मांग से अवगत करा सके.
हीरो की तरह स्वागत : यशराज ने साइकिल से ही देश के करीब 17 राज्यों से गुजरकर इतनी लंबी दूरी को आसानी से नाप दिया. वह पंद्रह जनवरी को अपनी इस अनोखी यात्रा पर निकला था. इसके बाद जब वह पंद्रह अगस्त को वापस लौटा, तो बोधगया में स्थानीय लोगों ने उसका स्वागत एक हीरो की भांति किया. इतनी बड़ी दूरी साइकिल से तय करना सचमुच प्रेरणादायी है.
पावन यात्रा के उद्देश्य : यशराज ने 15 जनवरी 2026 को गया जी के विष्णुपद मंदिर से अपनी यात्रा शुरू की थी. इस यात्रा के पीछे उसके कई बड़े और पावन उद्देश्य शामिल थे. वह चाहता है कि देश के सभी मानव प्राणी सुख-शांति से रहें. इसके साथ ही सनातन धर्म का व्यापक प्रचार-प्रसार हो और गौ माता को राष्ट्र माता का गौरवपूर्ण दर्जा प्राप्त हो सके.
"भारत का हर मानव प्राणी सुख शांति से रहे, गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा हो, समेत अन्य कई बातों को लेकर मैंने देश के 12 ज्योतिर्लिंग की यात्रा की है. साथ ही देश के सभी प्रमुख मंदिरों का दर्शन, चार धाम की यात्रा, इसमें शामिल थी. 15 जनवरी को गया जी के विष्णु पद से वह रवाना हुआ था और 15 अगस्त को बोधगया लौटा हूं."- यशराज, 9 साल का साइकिलिस्ट

कश्मीर से कन्याकुमारी तक : उसके मुख्य उद्देश्यों में पर्यावरण संरक्षण और देश को पूरी तरह नशा मुक्त बनाना भी शामिल है. इन्हीं संकल्पों को लेकर वह देश के सभी बारह ज्योतिर्लिंगों की यात्रा पर निकला था. उसकी यह ऐतिहासिक यात्रा कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक की थी. इसमें देश के सभी बारह ज्योतिर्लिंगों का दर्शन मुख्य रूप से शामिल था, जिसे उसने सफलतापूर्वक पूरा किया.
सिर्फ 210 दिनों में कमाल : इस नन्हें बालक ने यह अद्भुत कारनामा सिर्फ 210 दिनों में पूरा करके दिखा दिया. इतनी लंबी दूरी की कठिन यात्रा उसने अपनी साइकिल के सहारे तय की है. कड़कड़ाती ठंड के मौसम में पंद्रह जनवरी को निकला यशराज पंद्रह अगस्त को वर्षा ऋतु में सकुशल बोधगया लौटा. सात साल की उम्र में ही उसके मन में अयोध्या जाने का विचार आया था.
"मेरे मन में अचानक आया था, कि अयोध्या जाए. स्वप्न में इस तरह के संकेत मिले थे, जिसके बाद अयोध्या और फिर वैष्णो देवी फिर खाटू श्याम गया था. उसके बाद 9 साल की उम्र में 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन किये हैं. 12 ज्योतिर्लिंग का दर्शन भी मेरे मन में अचानक आया था. गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा मिले."- यशराज, 9 साल का साइकिलिस्ट

अयोध्या की जिद : शुरुआत में उसके पिता प्रकाश कुमार साहू ने इतनी कम उम्र देखकर मना किया था. लेकिन बच्चे की जिद के आगे आखिरकार वे मान गए. यशराज ने साइकिल से यात्रा की और अयोध्या पहुंचा. इसके बाद वह वैष्णो देवी और खाटू श्याम की यात्रा भी साइकिल से कर चुका है. पूर्व में उसने करीब नौ हजार किलोमीटर की यात्रा साइकिल से पूरी की थी.
कुल 28000 KM का सफर : उसे अयोध्या पहुंचने में सात दिन और वैष्णो देवी पहुंचने में 29 दिन लगे थे. कम उम्र होने के कारण उसके पिता प्रकाश कुमार साहू भी सुरक्षा के लिए साथ जाते हैं. इस प्रकार यशराज अब तक कुल 28000 किलोमीटर की यात्रा साइकिल से पूरी कर चुका है. इस बार की 19000 किलोमीटर की यात्रा में उसे सात महीने का समय लगा.

द वंडर वर्ल्ड स्कूल का छात्र : बारह ज्योतिर्लिंगों की पावन यात्रा पूरी कर जब वह 15 अगस्त को गया वापस लौटा, तो उसका अत्यंत भव्य स्वागत हुआ. लोगों ने उसे सुंदर कार में बैठाकर घुमाया और खुशी मनाई. यात्रा पर निकलते समय उसकी उम्र 9 वर्ष थी, जो अब साढ़े नौ वर्ष हो चुकी है. वह बोधगया के द वंडर वर्ल्ड स्कूल में तीसरी कक्षा का एक होनहार छात्र है.
"यशराज का नाम देश में और पूरे विश्व में रिकार्ड में दर्ज होना चाहिए. क्योंकि, वह सिर्फ 9 साल की उम्र का है और 19000 किलोमीटर की यात्रा साइकिल से की है. 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन किया. चार धाम की यात्रा की. देश के सभी प्रमुख मंदिरों का भी दर्शन किया. इस दौरान वह 17 राज्यों से होकर गुजरा. यह कम उम्र का है और उसका नाम रिकॉर्ड में दर्ज होना चाहिए."- प्रकाश कुमार साहू, यशराज के पिता

शहीदों के लिए विशेष पूजा : यशराज ने सात वर्ष की उम्र से अयोध्या, हरिद्वार, ऋषिकेश, प्रयागराज, वैष्णो देवी, मेहंदीपुर बालाजी, खाटू श्याम और बैजनाथ धाम की यात्राएं कीं. खाटू श्याम में उसने पहलगाम हमले में मारे गए शहीदों की आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजा भी की थी. नौ साल की उम्र में उसने देश के सभी प्रसिद्ध बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का संकल्प पूरा किया.
बारह ज्योतिर्लिंग और चार धाम : वह सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम,त्रयंबकेश्वर और घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग गया. बारह ज्योतिर्लिंगों के साथ-साथ उसने प्रसिद्ध चार धाम और देश के सभी प्रमुख मंदिरों के पावन दर्शन भी किए. यशराज के पिता बोधगया के दुमहान में एक छोटा सा होटल चलाते हैं, जिससे बड़े मुश्किल से पूरे परिवार का गुजारा हो पाता है.

पिता का अटूट विश्वास : यशराज के पिता प्रकाश कुमार साहू अपने बेटे की इस अद्भुत भक्ति को देखकर स्वयं हैरान हैं. सीमित कमाई होने के बावजूद वे अपने बेटे का मन छोटा नहीं होने देते. वे अपनी आय में से पैसे बचाकर उसे ऐसी बड़ी यात्राओं पर ले जाते हैं. उन्होंने सब कुछ ईश्वर पर छोड़ दिया है कि उनकी मर्जी से ही सब होगा.
ईश्वर की असीम अनुकंपा : नन्हा यशराज बताता है कि देश में सुख-शांति, गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा, चार धाम यात्रा और ज्योतिर्लिंग दर्शन के उद्देश्य से वह विष्णुपद से रवाना हुआ था. वह 210 दिनों में 17 राज्यों से गुजरा. साइकिल से इतनी लंबी दूरी तय करने को वह ईश्वर की विशेष कृपा मानता है, जिसके बिना यह संभव नहीं था.
श्वान का अनोखा चमत्कार : यशराज ने एक अनोखा चमत्कार भी साझा किया. जब वह सात वर्ष की उम्र में अयोध्या जा रहा था, तब रास्ते में एक भैरव बाबा (श्वान) उसके साथ हो लिया. वह साथ में अयोध्या गया और वापस बोधगया आकर अब उसी के साथ रहता है. अयोध्या में उसे एक बाबा मिले थे, जो अचानक उसकी आंखों के सामने ही लुप्त हो गए.
स्वप्न में मिले थे संकेत : यशराज का मानना है कि भगवान उसे शक्ति देते हैं, जिससे वह यह यात्राएं कर पाता है. स्वप्न में मिले संकेतों के बाद ही उसने पहले अयोध्या, वैष्णो देवी और खाटू श्याम की यात्रा की थी. उसके मन में अचानक ही बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का विचार आया. उसका लक्ष्य समाज में पर्यावरण संरक्षण, नशा मुक्ति और सनातन धर्म का प्रचार करना है.
विश्व रिकॉर्ड की तैयारी : यात्रा में कई मुश्किलें आईं, लेकिन उसने ईश्वर की कृपा से सब टाल दिया. अब उसे विपरीत हालात से जूझना आ गया है. उसके पिता प्रकाश कुमार साहू चाहते हैं कि यशराज का नाम विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हो. इतनी कम उम्र में साइकिल से 19 हजार किलोमीटर की यात्रा कर 12 ज्योतिर्लिंग और चार धाम का दर्शन करना असाधारण है.
प्रधानमंत्री से मिलने की योजना : प्रकाश जी बताते हैं कि सात साल की उम्र से ही यशराज को ऐसी राम धुन जगी कि उसने अनोखा इतिहास रच दिया. वह अपने लिए कुछ नहीं मांगता, बल्कि जनकल्याण और देश की भलाई के लिए संकल्पित है. उसकी यह तीर्थ यात्राएं लगातार जारी हैं. अब वह गौ माता के सम्मान के लिए दिल्ली तक पैदल यात्रा करने की योजना बना रहा है.
दक्षिण भारत में उपेक्षा : हालांकि, इस बारह ज्योतिर्लिंग की लंबी दर्शन यात्रा में उसे देश के कई राज्यों में अत्यधिक सम्मानित किया गया, किंतु आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में उसने स्वयं को थोड़ा उपेक्षित महसूस किया. यशराज और उसके पिता का मानना है कि इन दक्षिण भारतीय राज्यों में सनातनियों को वह अपेक्षित सम्मान और आदर नहीं मिल पाता है, जिसकी वे उम्मीद कर रहे थे.
यूनिक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड : यशराज दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा देने की मांग करने की कोशिश करेगा. इतनी कम उम्र में इतनी शक्ति और भक्ति देख हर कोई स्तब्ध है. इस यात्रा के दौरान कई राज्यों में उसका सम्मान हुआ. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में उसे गीता श्री द्वारा 'यूनिक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' से सम्मानित भी किया गया.
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