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उत्तराखंड में भारत-जापान संयुक्त सैन्य अभ्यास 'धर्म गार्जियन' जारी, सैन्य संबंधों को मिलेगी मजबूती

उत्तराखंड के चौबटिया में भारत और जापान के सैनिकों के बीच 7वां संयुक्त सैन्य अभ्यास 'धर्म गार्जियन' चल रहा है. जो 9 मार्च तक चलेगा.

Dharma Guardian 2026
भारत और जापान के सैनिक (फोटो सोर्स- X@adgpi)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : February 26, 2026 at 4:54 PM IST

3 Min Read
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देहरादून: उत्तराखंड के चौबटिया में भारत और जापान के सैनिकों के बीच 7वां संयुक्त सैन्य अभ्यास 'धर्म गार्जियन' चल रहा है. दो हफ्ते तक चलने वाला यह अभ्यास दोनों देशों के रक्षा सहयोग को नई मजबूती देगा.

अल्मोड़ा के चौबटिया स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में भारत और जापान के बीच वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास 'धर्म गार्जियन' का सातवां संस्करण मंगलवार यानी 24 फरवरी से शुरू हो चुका है. यह अभ्यास 9 मार्च 2026 तक आयोजित किया जाएगा. भारतीय सेना और जापान ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स (JGSDF) के बीच होने वाला यह अभ्यास दोनों देशों के बीच रणनीतिक और रक्षा सहयोग का अहम हिस्सा माना जाता है.

चौबटिया में भारत-जापान संयुक्त सैन्य अभ्यास 'धर्म गार्जियन' (वीडियो सोर्स- X@adgpi)

120-120 सैनिक ले रहे हिस्सा: इस साल के अभ्यास में दोनों देशों की ओर से 120-120 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं. जापान की ओर से 32वीं इन्फैंट्री रेजिमेंट के जवान शामिल हैं. जबकि, भारतीय सेना की ओर से लद्दाख स्काउट्स के सैनिक इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं. यह अभ्यास हर साल बारी-बारी से भारत और जापान में आयोजित किया जाता है और सैन्य समन्वय को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

'धर्म गार्जियन' का क्या है उद्देश्य? अभ्यास 'धर्म गार्जियन' का मुख्य उद्देश्य अर्ध शहरी (सेमी अर्बन) वातावरण में संयुक्त अभियानों को अंजाम देने की क्षमता को विकसित करना और सैन्य सहयोग को और सुदृढ़ करना है. अगले दो हफ्ते के दौरान दोनों देशों के सैनिक शारीरिक दक्षता को उच्च स्तर पर बनाए रखने, संयुक्त योजना प्रक्रियाओं को परिष्कृत करने और सामरिक अभ्यासों में तालमेल बढ़ाने पर विशेष ध्यान देंगे.

इस संयुक्त अभ्यास में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया है. सैनिकों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी एक दूसरे के साथ प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता को बढ़ाने के लिए समकालीन ऑपरेशनल पहलुओं को शामिल किया गया है. इससे दोनों सेनाओं को वास्तविक परिस्थितियों में संयुक्त कार्रवाई करने का बेहतर अनुभव मिलेगा.

किए जाएंगे ये अभ्यास: अभ्यास के दौरान कई महत्वपूर्ण सामरिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी. इनमें अस्थायी ऑपरेटिंग बेस की स्थापना, इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) ग्रिड का विकास, मोबाइल व्हीकल चेक पोस्ट की स्थापना और शत्रुतापूर्ण वातावरण में कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन शामिल हैं. इसके अलावा हेलिबोर्न ऑपरेशन और घरों में प्रवेश कर हस्तक्षेप (हाउस इंटरवेंशन ड्रिल) जैसे विशेष अभ्यास भी किए जाएंगे.

दोनों देशों के लिए खास है संयुक्त सैन्य अभ्यास: रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संयुक्त सैन्य अभ्यास न केवल सामरिक क्षमता को बढ़ाते हैं, बल्कि दोनों देशों के सैनिकों के बीच आपसी विश्वास और समझ को भी मजबूत करते हैं. बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

भारत और जापान के सैन्य संबंधों को मिलेगी मजबूती: उत्तराखंड की शांत वादियों में शुरू हुआ यह अभ्यास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खास महत्व रखता है. इससे न केवल भारत और जापान के सैन्य संबंधों को मजबूती मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को भी बल मिलेगा. दो हफ्ते तक चलने वाला यह अभ्यास सामरिक कौशल, तकनीकी दक्षता और आपसी समन्वय की नई मिसाल पेश करेगा.

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