75 की उम्र में कम नहीं हुआ सीखने का जुनून, 32 डिग्रियां हासिल करने के बाद अब आचार्य की परीक्षा दे रहे डॉ. मिल्खी राम
सुमित राठौर की रिपोर्ट: शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान रचते हुए 75 वर्षीय डॉ. मिल्खी राम युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्त्रोत.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : July 1, 2026 at 1:55 PM IST
|Updated : July 1, 2026 at 3:01 PM IST
हमीरपुर: आज के दौर में जहां युवा किताबों और पढ़ाई से दूर हो रहे हैं और सोशल मीडिया की दुनिया में खो रहे हैं. वहीं, हिमाचल के एक बुजुर्ग उस उम्र शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान रच रहे हैं, जिस उम्र में ज्यादातर लोग किताबों से दूरी बना लेते हैं. कांगड़ा जिले के गंदड़ गांव के निवासी 75 साल के डॉ. मिल्खी राम अब तक 32 डिग्रियां हासिल कर चुके हैं. वहीं, अब डॉ. मिल्खी राम इग्नू अध्ययन केंद्र हमीरपुर में आचार्य की परीक्षा देने पहुंचे. पढ़ाई के लिए उनका ये जज्बा साबित करता है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती है, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति ही सफलता की असली कुंजी है.
रिटायरमेंट तक हासिल कर चुके थे 26 डिग्रियां
10 फरवरी 1952 को कांगड़ा जिले के गंदड़ गांव में जन्मे डॉ. मिल्खी राम ने साल 1976 में धर्मशाला के एक निजी कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की. हालांकि उन्होंने 1972 में ही वन विभाग में नौकरी शुरू कर दी थी. नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने अपनी पढ़ाई कभी नहीं छोड़ी. साल 2010 में ग्रेड-वन पद से रिटायर होने तक मिल्खी राम 26 डिग्रियां हासिल कर चुके थे, जबकि अब ये आंकड़ा बढ़कर 32 तक पहुंच चुका है.

मिल्खी राम की शैक्षणिक उपलब्धियां
डॉ. मिल्खी राम की शैक्षणिक उपलब्धियों की सूची किसी यूनिवर्सिटी से कम नहीं है. उन्होंने बीए, प्रभाकर, बीएड, एलएलबी, पत्रकारिता (जेएमसी), संस्कृत, एमए हिंदी, एमए राजनीति शास्त्र, समाजशास्त्र, इतिहास (History), अंग्रेजी, अर्थशास्त्र (Economics), एमबीए, एमफिल और हिंदी में पीएचडी सहित कई उच्च शिक्षाएं प्राप्त की हैं. अब वे आचार्य की डिग्री प्राप्त करने के लिए परीक्षा दे रहे हैं.

'परिवार ने शैक्षणिक यात्रा में दिया पूरा साथ'
डॉ. मिल्खी राम ने बताया कि उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा भारत रत्न डॉ. बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर हैं. उनका मानना है कि शिक्षा ही समाज और व्यक्ति के विकास का सबसे सशक्त माध्यम है. उन्होंने कहा कि उनकी इस लंबी शैक्षणिक यात्रा में उनकी पत्नी विद्या देवी का सबसे बड़ा योगदान रहा है. विद्या देवी भी वन विभाग से ग्रेड-वन पद से सेवानिवृत्त हुई हैं. वहीं, उनके बेटे राकेश कुमार भारतीय रेलवे में आईआरटीएस अधिकारी हैं. परिवार के सभी सदस्यों, विशेषकर पत्नी, बेटे और बहू के सहयोग ने उन्हें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. उन्होंने बताया कि हाल ही में उन्होंने अपनी आंखों का इलाज भी करवाया, ताकि पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी में किसी प्रकार की बाधा न आए.
"अगर सीखने की इच्छा जीवित हो तो उम्र कभी भी शिक्षा के रास्ते में रुकावट नहीं बन सकती. पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती. जीवन भर सीखते रहना ही व्यक्ति को आगे बढ़ाता है. युवाओं को शिक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए और नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर अपने भविष्य का निर्माण करना चाहिए. ज्ञान ही वह संपत्ति है, जिसे कोई छीन नहीं सकता." - डॉ. मिल्खी राम, परीक्षार्थी

केंद्र में सबसे उम्रदराज परीक्षार्थी
वहीं, इग्नू अध्ययन केंद्र हमीरपुर के केंद्र प्रभारी प्रोफेसर संजय कुमार ने बताया कि मंगलवार को डॉ. मिल्खी राम आचार्य की परीक्षा देने केंद्र पहुंचे. 75 साल की उम्र में परीक्षा देने पहुंचे डॉ. मिल्खी राम केंद्र के सबसे उम्रदराज परीक्षार्थी हैं. उनके उत्साह और समर्पण को देखते हुए इग्नू केंद्र में उनका पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया. उन्होंने कहा कि डॉ. मिल्खी राम की ये कहानी हर युवा को यह संदेश देती है कि सफलता उम्र से नहीं, बल्कि सीखने की लगन, अनुशासन और दृढ़ संकल्प से मिलती है.

"आज जब कई युवा छोटी-छोटी चुनौतियों के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं. ऐसे समय में डॉ. मिल्खी राम जैसी शख्सियत समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं. जिस उम्र में लोग आराम को प्राथमिकता देते हैं, उस उम्र में उनका परीक्षा कक्ष में बैठना शिक्षा के प्रति समर्पण का जीवंत उदाहरण है." - संजय कुमार, प्रभारी प्रोफेसर, इग्नू अध्ययन केंद्र हमीरपुर

