राष्ट्रमंडल अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन का समापन, अगला CSPOC ब्रिटेन में होगा आयोजित
अगले सम्मेलन की मेजबानी के लिए यूनाइटेड किंगडम के हाउस ऑफ कॉमन्स के अध्यक्ष सर लिंडसे होयल को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मेजबानी दी.

Published : January 16, 2026 at 7:53 PM IST
अनामिका रत्ना
नई दिल्ली: राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों का 28वां सम्मेलन (सीएसपीओसी) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समापन संबोधन के साथ खत्म हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया था.
यह दो-दिवसीय सम्मेलन संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने, संवाद बढ़ाने और नवाचार को बढ़ावा देने के प्रति प्रतिबद्धता के साथ समाप्त हुआ. अगले सम्मेलन की मेजबानी के लिए यूनाइटेड किंगडम के हाउस ऑफ कॉमन्स के अध्यक्ष सर लिंडसे होयल को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मेजबानी दी.
इस दो दिवसीय सम्मेलन में संसद में अलग अलग देशों से आए तमाम पीठासीन अधिकारी और स्पीकर ने पूर्ण रूप से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और पेपरलेस सिस्टम का इस्तेमाल किया. सम्मेलन के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जिम्मेदार उपयोग, सोशल मीडिया के प्रभाव, चुनावों से आगे नागरिक सहभागिता, तथा सांसदों-कर्मचारियों के स्वास्थ्य जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई.
राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन के समापन समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाएं तभी सशक्त और प्रासंगिक बनी रह सकती हैं, जब वे पारदर्शी, समावेशी, उत्तरदायी और जनता के प्रति जवाबदेह हों.
उन्होंने जोर देकर कहा कि पारदर्शिता से निर्णय प्रक्रिया में खुलेपन आता है और जनता का विश्वास बढ़ता है, जबकि समावेशन सुनिश्चित करता है कि समाज के हाशिए पर खड़े हर व्यक्ति की आवाज सुनी जाए. ओम बिरला ने सीएसपीओसी की 56 साल पुरानी विरासत को याद करते हुए कहा कि यह सम्मेलन राष्ट्रमंडल की संसदों के बीच सतत संवाद और संसदीय कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए स्थापित किया गया था.
समापन समारोह में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इस बार की अभूतपूर्व भागीदारी को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इतने अधिक देशों की उपस्थिति ने इस सम्मेलन को राष्ट्रमंडल संसदीय सहयोग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बना दिया है. सम्मेलन के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जिम्मेदार उपयोग, सोशल मीडिया के प्रभाव, चुनावों से आगे नागरिक सहभागिता, तथा सांसदों-कर्मचारियों के स्वास्थ्य जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई.
बिरला ने कहा कि ये विमर्श पीठासीन अधिकारियों को तकनीकी परिवर्तनों के दौर में अपनी भूमिका समझने में सहायक सिद्ध हुए. उन्होंने आशा जताई कि प्रौद्योगिकी, समावेशन और वैश्विक साझेदारियां नई विश्व व्यवस्था को आकार देंगी.
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने विशेष रूप से कहा कि सहमति और असहमति दोनों लोकतंत्र की विशेषताएं हैं, लेकिन इन्हें संसदीय मर्यादा के दायरे में रखना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि, पीठासीन अधिकारियों का दायित्व है कि वे लोकतांत्रिक संस्थाओं को समकालीन चुनौतियों के अनुरूप ढालें, साथ ही संवैधानिक मूल्यों पर अडिग रहें.
उन्होंने ई-संसद, कागज-रहित कार्यप्रणाली और डिजिटल डाटाबेस जैसी पहलों से संसदों में पारदर्शिता और कार्यकुशलता बढ़ने की बात कही।श्री बिरला ने सभी प्रतिनिधिमंडलों की सक्रियता, उत्साह और रचनात्मकता की सराहना की. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष आभार व्यक्त किया, जिन्होंने संविधान सदन में उद्घाटन करते हुए भारत की लोकतांत्रिक विरासत और वैश्विक एकजुटता को रेखांकित किया.
साथ ही अंतर-संसदीय संघ के अध्यक्ष, राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की अध्यक्ष और भारत के उपराष्ट्रपति के योगदान की भी प्रशंसा की. अगले सम्मेलन की मेजबानी के लिए यूनाइटेड किंगडम के हाउस ऑफ कॉमन्स के अध्यक्ष सर लिंडसे होयल को शुभकामनाएं देते हुए बिरला ने कहा कि यह सम्मेलन संवाद, सहयोग और नवाचार के माध्यम से संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने के संकल्प के साथ समाप्त हुआ. कुल मिलाकर यदि देखा तो ये सम्मेलन राष्ट्रमंडल देशों के बीच मित्रता, समझ और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक कदम मन जा रहा है.
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