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सुकमा में नक्सल संगठन को बड़ा झटका, 64 लाख के इनामी 26 नक्सलियों ने थामा पुनर्वास का हाथ

सुकमा में ‘पूना मार्गेम’ अभियान ने फिर 26 नक्सलियों की जिंदगी में बदलाव लाया है. ये सभी नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है.

Maoists lay down arms in Sukma
सुकमा में ‘पूना मार्गेम’ अभियान ने फिर 26 नक्सलियों की जिंदगी में बदलाव लाया है (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : January 7, 2026 at 1:07 PM IST

5 Min Read
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सुकमा: जिले में पूना मार्गेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान के तहत 7 महिला कैडर सहित 26 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर दिया है. आत्मसमर्पण करने वाले ये कैडर PLGA बटालियन, दक्षिण बस्तर डिवीजन, माड़ डिवीजन और आंध्र–ओडिशा सीमा (AOB) क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं. इन पर कुल 64 लाख का इनाम घोषित है.

7 महिला कैडर सहित 26 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर एक साथ पुनर्वास किया (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

नक्सल संगठन में बड़े रैंक पर थे: पुनर्वास करने वाले नक्सलियों में CYPCM, DVCM, PPCM, ACM और पार्टी सदस्य जैसे वरिष्ठ और प्रभावशाली रैंक शामिल हैं. ये सुकमा, माड़ और सीमावर्ती ओडिशा में हुई कई बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल रहे हैं. इसके बावजूद इन सभी ने हिंसा के रास्ते से हटकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया.

बड़े इनामी और कमांडर स्तर के नक्सली

  • लाली उर्फ मुचाकी आयते – 10 लाख की इनामी, सीआरसी कंपनी की डिप्टी कमांडर
    वर्ष 2017 में सोनाबेड़ा–कोरापुट मार्ग पर हुए आईईडी विस्फोट में शामिल, जिसमें 14 जवान शहीद हुए थे
  • हेमला लखमा – 8 लाख की इनामी, प्लाटून कमांडर
    वर्ष 2020 में मिनपा जंगल मुठभेड़ में शामिल, जिसमें 17 पुलिस जवान शहीद हुए थे
  • मुचाकी संदीप उर्फ हिड़मा – 5 लाख का इनामी, पूर्व एलओएस कमांडर
    टेकलगुड़ा (2021) और जगरगुंडा (2023) एम्बुश में शामिल, जिनमें कुल 25 जवान शहीद हुए
  • मड़कम चैते उर्फ मंगली – 5 लाख की इनामी, जगरगुंडा एरिया केएमएस अध्यक्ष

नए सुरक्षा कैंप हो रहे स्थापित: पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, हाल के वर्षों में अति संवेदनशील इलाकों में लगातार नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना हो रही है. अभियानों और नक्सली ठिकानों पर बढ़ते दबाव से संगठन कमजोर हुआ है. जंगलों के भीतर जहां कभी नक्सलियों का प्रभाव था, वहां अब सुरक्षा बलों की नियमित मौजूदगी और विकास योजनाओं की पहुंच ने हालात बदल दिए हैं. सड़क, संचार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं ने लोगों के साथ-साथ नक्सली कैडरों की सोच को भी प्रभावित किया है.

पुनर्वास करने वाले नक्सलियों के नाम और पूरी डिटेल

नामपदइनाम (₹)प्रमुख आपराधिक घटना
लाली उर्फ मुचाकी आयतेसीआरसी कंपनी-03, प्लाटून-02 डिप्टी कमांडर10 लाख2017 सोनाबेड़ा–कोरापुट मार्ग IED ब्लास्ट, 14 जवान शहीद
हेमला लखमाप्लाटून नंबर-04 कमांडर8 लाख2020 मिनपा जंगल मुठभेड़, 17 जवान शहीद
आसमिता उर्फ कमलू सन्नीकंपनी नंबर-07 पार्टी सदस्या8 लाख
रामबत्ती उर्फ संध्या उर्फ पदाम जोगीकंपनी नंबर-07 पार्टी सदस्या8 लाख
सुण्डाम पालेपीएलजीए बटालियन-01, कंपनी-01 सेक्शन-B8 लाख
निलेश उर्फ हेमला भीमादरभा डिवीजन कृषि टीम कमांडर5 लाख
मुचाकी संदीप उर्फ हिड़मापूर्व सिलगेर एलओएस कमांडर5 लाख2021 टेकलगुड़ा एम्बुश (22 शहीद), 2023 जगरगुंडा हमला (3 शहीद)
मड़कम चैते उर्फ मंगलीजगरगुंडा एरिया केएमएस अध्यक्षा5 लाख
ताती सोमडूबैयमपल्ली आरपीसी मिलिशिया कमांडर3 लाख
मुचाकी देवाबेड़मा आरपीसी डीएकेएमएस अध्यक्ष2 लाख
सरिता उर्फ इरपाबासागुड़ा एलओएस पार्टी सदस्या1 लाख
वेट्टी मासा उर्फ वासुएओबी सीसी उदय दादा का गार्ड सदस्य1 लाख
हेमला दशरू उर्फ अजयगढ़चिरौली एसजेडसीएम गिरधर का गार्ड सदस्य1 लाख
विजय मुचाकीगोमपाड़ आरपीसी सीएनएम सदस्य
आकाश मुचाकीगोमपाड़ आरपीसी मिलिशिया सदस्य
मड़कम/मुचाकीगोमपाड़ आरपीसी मिलिशिया सदस्या
मिड़ियम सुरेशबेड़मा आरपीसी आर्थिक शाखा अध्यक्ष
मुचाकी बुधरागोमपाड़ आरपीसी उपाध्यक्ष, कृषि समिति अध्यक्ष
मुचाकी मुड़ागोमपाड़ आरपीसी मिलिशिया सदस्य
माड़वी हड़माजोन्नागुड़ा आरपीसी मिलिशिया सदस्य
माड़वी सुक्का उर्फ रविगोमपाड़ आरपीसी जंगल समिति अध्यक्ष
मड़कम हुंगागोमपाड़ आरपीसी मिलिशिया सदस्य
सुण्डम राजूबैयमपल्ली आरपीसी डीएकेएमएस उपाध्यक्ष
वेट्टी बुधूबैयमपल्ली आरपीसी मिलिशिया सदस्य
गोंचे उर्फ मड़कमडीएकेएमएस सदस्य, आरपीसी आर्थिक शाखा अध्यक्ष
माड़वी भीमा उर्फ तामो भीमाबेड़मा आरपीसी मिलिशिया सदस्य
Maoists lay down arms in Sukma
64 लाख के इनामी 26 नक्सलियों ने थामा पुनर्वास का हाथ (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

अभियान दे रहा लोगों को भरोसा: पूना मार्गेम अभियान का सबसे अहम पहलू भरोसा है जिससे लोगों का भय और भ्रम दूर हो रहा है. इस अभियान के तहत नक्सली कैडरों को भी यह विश्वास दिलाया गया कि आत्मसमर्पण के बाद उन्हें केवल कानूनी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत भी मिलेगी. यही कारण है कि संगठन में वर्षों तक सक्रिय रहे कैडर, जिनमें महिलाएं और युवा शामिल हैं, आज हिंसा को पीछे छोड़ने के लिए आगे आए.

पूना मार्गेम अभियान बस्तर में बदलाव का सशक्त माध्यम बन रहा है. आज 26 नक्सलियों का आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और विकास को लोग स्वीकार कर रहे हैं. शासन की पुनर्वास नीति के तहत सभी को सुरक्षा, सम्मान और नई ज़िंदगी का अवसर दिया जाएगा. हम बाकी भटके हुए लोगों से भी अपील करते हैं कि वे हिंसा छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ें.- किरण चव्हाण, एसपी

पुनर्वास करने पर मिलेंगी ये सुविधाएं: आत्मसमर्पित नक्सलियों को छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति–2025 के तहत 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि, घोषित इनामी राशि और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी. इसके साथ ही उन्हें कौशल विकास, स्वरोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और सामान्य जीवन जी सकें.

सरेंडर की बड़ी बातें

  • पूना मार्गेम अभियान से 26 नक्सली कैडर समाज की मुख्यधारा में शामिल
  • 7 महिला सहित 26 माओवादियों का आत्मसमर्पण, 64 लाख का था इनाम
  • आत्मसमर्पित नक्सली, PLGA बटालियन, दक्षिण बस्तर डिवीजन, माड़ डिवीजन एवं AOB क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं
  • आत्मसमर्पित नक्सलियों में CYPCM-01,DVCM -01, PPCM-03,ACM- 03 और Party Member -18

इस पूरे प्रयास में डीआरजी सुकमा, इंटेरोगेशन शाखा, विआशा सुकमा, आरएफटी सुकमा और सीआरपीएफ की 02, 159, 212, 217, 226 वाहिनी तथा कोबरा 201 की आसूचना शाखाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही. पुलिस प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि अब नक्सली संगठन के पास विकल्प सीमित हैं. या तो वे हिंसा के रास्ते पर चलते हुए समाप्ति की ओर बढ़ें, या पूना मार्गेम के जरिए शांति, सम्मान और विकास का मार्ग अपनाएं.

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