यहां अमरनाथ से भी ऊंचा बनता है बर्फ का शिवलिंग, अंजनी पुत्र हनुमान से भी जुड़ी है कहानी
अंजनी महादेव में बर्फ और पानी से प्राकृतिक रूप से तैयार होता है अद्भुत और अविश्वसनीय शिवलिंग.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 21, 2026 at 5:20 PM IST
कुल्लू: सनातन धर्म में भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है. भारत में भगवान शिव के कई ऐसे मंदिर हैं, जहां भोलेनाथ के दर्शन के लिए रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. भगवान शिव के कई ऐसे मंदिर हैं जो ऊंचे पहाड़ों पर स्थित है. जम्मू कश्मीर में भगवान शिव के दर्शन के लिए हर साल अमरनाथ यात्रा भी निकाली जाती है. अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को पहाड़ी गुफा के भीतर प्राकृतिक रूप से बर्फ से तैयार शिवलिंग के दर्शन होते हैं, जो अपने आप में ही एक चमत्कार है. हिमाचल में भी भगवान शिव का ऐसा ही एक दरबार है जहां बाब बर्फानी के दर्शन होते हैं.
अमरनाथ में शिवलिंग 10-15 फीट, अंजनी महादेव में 25-45 फीट
भगवान शिव का मंदिर हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू के पर्यटन नगरी मनाली के सोलंग नाला में स्थित है, जिसे अंजनी महादेव के नाम से जाना जाता है. यहां पर भी पहाड़ी से झरने का पानी शिवलिंग पर गिरता है और सर्दियों में माइनस तापमान के चलते यह पानी जमकर ठोस हो जाता है. यही वजह है यहां पर भी अमरनाथ की तर्ज पर बर्फ से बने एक शिवलिंग का निर्माण होता है. अमरनाथ में शिवलिंग 10 से 15 फीट हर साल बनता है, लेकिन अंजनी महादेव में यह शिवलिंग 25 फीट से लेकर 45 फीट तक हर साल तैयार होता है. ऐसे में इस साल भी यह शिवलिंग 25 फीट की ऊंचाई तक तैयार हो गया है. अंजनी महादेव में बाबा बर्फानी के दर्शनों के लिए स्थानीय ही नहीं, बल्कि बाहरी राज्यों से भी सैलानी यहां पहुंच रहे हैं.
25-45 फीट तक तैयार होता है शिवलिंग
जिला कुल्लू की पर्यटन नगरी मनाली के सोलंग नाला से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर अंजनी महादेव का मंदिर स्थित है. सोलंग नाला में हुई बर्फबारी के बाद सैलानी यहां मस्ती करने के लिए पहुंच रहे हैं तो वही अंजनी महादेव के दर्शनों के लिए भी सैलानी घोड़े या फिर पैदल रास्ते के माध्यम से पहुंच रहे हैं. यहां पर वर्तमान में 25 फीट ऊंचाई का बर्फ का शिवलिंग तैयार हुआ है और सैलानी शिवलिंग के दर्शन कर अपने आप को धन्य मान रहे हैं.
हालांकि, यह शिवलिंग कई बार 45 फीट की ऊंचाई तक भी बना है, लेकिन इस साल सर्दियों में पर्याप्त बारिश और बर्फबारी न होने के चलते इसका निर्माण 25 फीट तक रह गया. 23 जनवरी को घाटी में बर्फबारी हुई और उसके बाद तापमान माइनस में चला गया. ऐसे में यह शिवलिंग मार्च महीने तक बना रहेगा और उसके बाद बर्फ पिघल जाएगी. उसके बाद श्रद्धालु यहां पर पत्थर के शिवलिंग और माता अंजनी के बने हुए मंदिर के दर्शन पूरा साल करते हैं.

क्यों पड़ा इस जगह का नाम अंजनी महादेव?
अंजनी महादेव मंदिर के पुजारी ने बताया कि, पौराणिक कथा के अनुसार भगवान हनुमान की माता अंजनी पूर्व जन्म में देवराज इंद्र की सभा की अप्सरा थीं और इंद्र के दरबार में वो नृत्य किया करती थीं. उस दौरान उनका नाम पुंजिका स्थला था. एक दिन जब दुर्वासा ऋषि स्वर्ग आए तो उस दौरान अप्सरा ने उनका उपहास उड़ाया और उनके सामने काफी उछल कूद की. इससे ऋषि दुर्वासा काफी नाराज हुए और उन्होंने अप्सरा पुंजिका स्थला को अगले जन्म में वानरी होने का श्राप दिया. जब अप्सरा ने उनसे अपने व्यवहार के लिए क्षमा मांगी तो दुर्वासा ऋषि ने उन्हें वरदान दिया कि उनके गर्भ से भगवान रुद्र का अंश पैदा होगा और उसके बाद उन्हें वानर योनि से भी मुक्ति मिल जाएगी. ऐसे में माता अंजनी ने यहां 7000 साल तक भगवान शिव की तपस्या की और उनका आशीर्वाद भी लिया. इसके बाद इस जगह का नाम अंजनी महादेव पड़ा, तब से लेकर यहां पर हर साल बर्फ का शिवलिंग बनता है.

'शिवलिंग के दर्शन से मनोकामना होती है पूर्ण'
श्रद्धालुओं के बीच मान्यता है कि, इस शिवलिंग के दर्शन करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है. कई श्रद्धालुओं के द्वारा बर्फ के बीच ढके हुए रास्तों पर पैदल नंगे पांव चलकर अंजनी महादेव के दर्शन करते हैं. इसके अलावा कई सैलानी और श्रद्धालु शिवलिंग तक पहुंचने के लिए 500 मीटर की दूरी नंगे पांव तय करते हैं. स्थानीय निवासी मुकेश ने बताया, "सर्दियों के दिनों में भी यहां पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है और गर्मियों में भी लोग भगवान शिव के दर्शन करना नहीं भूलते हैं. सर्दियों में सैलानी सोलंगनाला में बर्फ के बीच मस्ती करते हैं और उसके बाद यहां अंजनी महादेव पहुंचते हैं और दर्शन करते हैं. माता अंजनी मंदिर की देखभाल के लिए कमेटी का भी गठन किया गया है और यहां श्रद्धालुओं को मंदिर कमेटी के द्वारा मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जाती हैं."

अंजनी महादेव मंदिर के पुजारी राजेश ने बताया, "बाबा प्रकाश पुरी ने सबसे पहले इस स्थान पर शिवलिंग को देखा था. इसके बाद बाबा ने साथ लगते ग्रामीणों को भी इस बारे अवगत करवाया था. ग्रामीणों ने भी इस बारे में स्थानीय देवी देवताओं को पूछा था तो देवताओं से ही सभी लोगों को इस बात का पता चला कि यहां पर माता अंजनी ने भगवान शिव के तपस्या की थी. इसके बाद यहां पर मंदिर का निर्माण किया गया और आज देश-विदेश से श्रद्धालु यहां पर अंजनी महादेव के दर्शनों को पहुंचते हैं. इसके अलावा सावन माह और शिवरात्रि का त्योहार भी यहां पर धूमधाम के साथ मनाया जाता है."
बर्फ से निर्मित शिवलिंग देखने दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु
उतर प्रदेश के गोरखपुर से आई महिला श्रद्धालु रुचि ने बताया, "यहां पर भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचे हैं और यहीं पर ही भगवान शिव ने माता अंजनी को पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया था. सर्दियों में यहां पर तापमान माइनस में है. बर्फ से बने हुए शिवलिंग के दर्शन पाकर अपने आप को धन्य मान रही हूं."
दिल्ली से आई महिला श्रद्धालु पूर्वा ने कहती हैं, "जम्मू कश्मीर के अमरनाथ में भी बर्फ से प्राकृतिक रूप से शिवलिंग का निर्माण होता है और उसी तरह का शिवलिंग यहां सोलंगनाला के अंजनी महादेव में भी देखने को मिला है. अमरनाथ की यात्रा काफी कठिन है, लेकिन अंजनी महादेव में बर्फ से बने शिवलिंग के दर्शन काफी आसान है."

अपने परिवार के साथ मनाली घूमने आईं पूर्वा ने बताया कि, मनाली के अन्य पर्यटन स्थलों में अपने परिवार के साथ घूमने का आनंद ले रही हैं. यहां पर परिवार के साथ ही उन्होंने भगवान शिव के बर्फ से बने शिवलिंग के भी दर्शन किए. यहां आकर काफी सुकून मिल रहा है.
अंजनी महादेव के दर्शन से मिलती है शांति
मेरा सोलंग नाला में घूमने का अनुभव काफी रोमांचक रहा और यहां पर बर्फ से बने हुए शिवलिंग के भी दर्शन किए. यह जगह मन को सुकून देने वाली है और लोगों को भी आध्यात्मिक राह से जोड़ने वाली है. यही वजह है कि अंजनी महादेव के दर्शन करने से हमें काफी शांति भी मिली है. - शशांक,बेंगलुरु से आए सैलानी
कैसे पहुंचें अंजनी महादेव?
जिला कुल्लू की पर्यटन नगरी मनाली का रोहतांग दर्रा देश और दुनिया में अपनी पहचान बना चुका है. इसके साथ ही अटल टनल रोहतांग भी सैलानियों की पहली पसंद बनी हुई है. ऐसे में बर्फ से तैयार शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध अंजनी महादेव भी सैलानियों के बीच लोकप्रिय हो रहा है. यहां हर साल हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. अंजनी महादेव के दर्शन के लिए पर्यटन नगरी मनाली से सोलंगनाला तक 15 किलोमीटर का सफर टैक्सी से कर सकते हैं. उसके बाद सोलंगनाला से अंजनी महादेव तक 5 किलोमीटर का सफर पैदल या घोड़ों से तय किया जा सकता है. मान्यता है कि यहां सैलानियों को भगवान अंजनी महादेव के दर्शन कर असीम शांति का भी अनुभव होता है.
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