ETV Bharat / bharat

50 मिनट में 330 चीजों की पहचान का रिकॉर्ड, बिहार की जीनियस बिटिया सतीक्षा आदर्शी

बिहार की 22 महीने की सतीक्षा आदर्शी ने वर्ल्डवाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और कलाम वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराया. जानें जीनियस बिटिया की स्टोरी.

GAYA GIRL SATIKSHA ADARSHI
सतीक्षा आदर्शी (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 12, 2026 at 2:55 PM IST

6 Min Read
Choose ETV Bharat

गया: बिहार के गयाजी में 22 महीने की बच्ची सतीक्षा आदर्शी कंप्यूटर से कम नहीं है. इतनी कम उम्र में उसने 330 आइटम्स की पहचान का विश्व रिकॉर्ड बनाकर सबको हैरान कर दिया है. उसका नाम वर्ल्डवाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और कलाम वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है. सतीक्षा ने साबित किया है कि ज्ञान की कोई उम्र नहीं होती, किसी भी उम्र में सीखा जा सकता है.

असाधारण प्रतिभा की शुरुआत: गया जिले के पंत नगर मोहल्ले की रहने वाली सतीक्षा आदर्शी का जन्म 2 मार्च 2024 को हुआ था. वर्तमान में उसकी उम्र महज 22 महीने है, लेकिन 18 महीने की उम्र में ही वह बिहार की सबसे छोटी जीनियस के रूप में पहचानी जाने लगी. उसकी असाधारण याददाश्त और ऑब्जर्वेशन स्किल ने परिवार और समाज को चकित कर दिया है.

GAYA GIRL SATIKSHA ADARSHI
22 महीने की सतीक्षा आदर्शी (ETV Bharat)

50 मिनट में 330 आइटम्स की पहचान: सतीक्षा ने मात्र 50 मिनट में 330 विभिन्न वस्तुओं, जानवरों, फलों, सब्जियों और अन्य चीजों की सटीक पहचान की. यह कारनामा 13 अक्टूबर 2025 को अंजाम दिया गया, जब उसकी उम्र 1 साल 7 महीने थी. इस उपलब्धि के लिए उसका नाम वर्ल्डवाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स (मुख्यालय लंदन) में दर्ज हुआ, जहां उसे गोल्ड मेडल, सर्टिफिकेट और अन्य सम्मान मिले.

कलाम वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी नाम: न केवल वर्ल्डवाइड, बल्कि कलाम वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी सतीक्षा का नाम दर्ज है. यहां उसने 500 कार्ड्स में से 410 आइटम्स की पहचान की. इसमें 53 देशों के झंडे, 25 अक्षर, 19 पेशे, 26 विश्व के अजूबे, 26 जानवर और उनके बच्चे, 27 फ्रीडम फाइटर्स, विभिन्न रंग-आकार, ट्रांसपोर्ट, पक्षी, आविष्कार, सब्जियां, फूल और कई अन्य श्रेणियां शामिल हैं. कुछ कार्ड्स ऐसी थी जिनकी पहचान उसकी मां ने कभी नहीं कराई थी, फिर भी वह बिना हिचकिचाहट के सही बता देती थी.

GAYA GIRL SATIKSHA ADARSHI
परिवार का सहयोग और ट्रेनिंग (ETV Bharat)

मां सुरभि कुमारी की भूमिका: सतीक्षा की मां सुरभि कुमारी कोरियन भाषा की अनुवादक हैं और एक विदेशी कंपनी में कार्यरत हैं. उन्होंने गर्भावस्था के दौरान ही जीनियस बच्चों पर पढ़ाई शुरू की और फैसला किया कि अपनी संतान को विकसित देशों के बच्चों की तरह एक्स्ट्रा एक्टिविटीज से परिचित कराएंगी. 3 महीने की उम्र से ही चित्र वाले कार्ड्स से पहचान की ट्रेनिंग शुरू कर दी गई. शुरू में 1 मिनट में 1-2 कार्ड्स की पहचान होती थी, जो धीरे-धीरे बढ़ती गई.

परिवार का सहयोग और ट्रेनिंग का तरीका: पिता हिमांशु कुमार इंजीनियर हैं और गुरुग्राम में एक बड़ी कंपनी में कार्यरत हैं. पूरा परिवार सतीक्षा की ट्रेनिंग में सहयोगी रहा. सुरभि बताती हैं कि मोबाइल की बजाय ज्ञान की लत लगाने से बच्चे पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. खेल-खेल में कार्ड्स दिखाकर पूछा जाता था - "गांधी जी कौन हैं?", "तिरंगा कौन सा है?" - और सतीक्षा हाथ रखकर सही जवाब देती थी. हालांकि वह अभी पूरी तरह बोल नहीं पाती, लेकिन पहचान में कोई कमी नहीं.

GAYA GIRL SATIKSHA ADARSHI
कम उम्र से असाधारण प्रतिभा की शुरुआत (ETV Bharat)

विकसित देशों से प्रेरणा: सुरभि कुमारी कहती हैं कि चीन, फ्रांस, जर्मनी, इजराइल जैसे देशों में माता-पिता बचपन से ही बच्चों को देश सेवा के लिए तैयार करते हैं. भारत में अक्सर बच्चे स्कूल की शिक्षा पर छोड़ दिए जाते हैं, लेकिन 2050 में जीनियस और देशभक्त युवाओं की जरूरत होगी.पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के सपने को साकार करने के लिए अभी से प्रयास जरूरी हैं.

हर जन्मदिन पर मेडल का लक्ष्य: मां का उद्देश्य है कि सतीक्षा के हर जन्मदिन पर कोई नया रिकॉर्ड या उपलब्धि हो. वह चाहती हैं कि बच्ची बड़े होकर खेल, विज्ञान या किसी क्षेत्र में बड़ा नाम कमाए. हालांकि, वे अपनी मर्जी नहीं थोपेंगी, बल्कि बच्ची की इच्छा के अनुसार आगे बढ़ाएंगी. महापुरुषों की माताओं की तरह वे भी सतीक्षा की पहली गुरु बनी हैं.

GAYA GIRL SATIKSHA ADARSHI
बिहार की जीनियस बिटिया हैं सतीक्षा (ETV Bharat)

बच्चों के दिमाग को जगाने का तरीका: सुरभि का मानना है कि बच्चों का दिमाग खेल-खेल में सीखने के लिए तैयार होता है. अगर सीखने की ललक जगा दी जाए, तो वे जीनियस बन सकते हैं. मोबाइल की लत की बजाय ज्ञान की लत लगाना ज्यादा फायदेमंद है, जिससे बच्चा परिवार और देश का नाम रोशन करे.

"अपनी मर्जी बच्ची पर नहीं थोप रही हूं, मैंने बच्चों के दिमाग के संबंध में पढ़ा था कि वो किस तरह काम करता है. कई महापुरुषों के बारे में जब आप पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि उनकी सफलता में और उनके नाम बड़ा होने के पीछे उनकी मां का बड़ा रोल रहा है. आप छत्रपति शिवाजी, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी जैसे महापुरुषों को पढ़ेंगे तो उनके पीछे भी उनकी मां का बड़ा योगदान उनके बचपन से ही था. मैं भी उसी तरह अपनी बच्ची के लिए करना चाहती हूं."- सुरभि कुमारी, सतीक्षा की मां

प्रेरणा का स्रोत बनी सतीक्षा: 22 महीने की सतीक्षा आदर्शी अन्य बच्चों के लिए जीवंत प्रेरणा बन गई है. उसकी सफलता दिखाती है कि सही मार्गदर्शन और शुरुआती प्रयास से असंभव को संभव बनाया जा सकता है. गया की इस छोटी जीनियस ने दुनिया को बता दिया कि प्रतिभा उम्र से नहीं, बल्कि प्रयास से खिलती है.

GAYA GIRL SATIKSHA ADARSHI
दो रिकॉर्ड्स सतीक्षा के नाम (ETV Bharat)

क्या है वर्ल्डवाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स: वर्ल्डवाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स एक पंजीकृत अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसका मुख्यालय लंदन में है, जो दुनिया भर के प्रतिभाशाली लोगों की असाधारण उपलब्धियों को मान्यता देता है. ये रिकॉर्ड दर्ज करता है और प्रमाणपत्र, मेडल व सर्टिफिकेट प्रदान करता है. यह गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स से अलग एक स्वतंत्र प्लेटफॉर्म है, जो बच्चों से लेकर वयस्कों तक की अनोखी प्रतिभाओं जैसे याददाश्त, पहचान और अन्य कौशलों को प्रमाणित करता है.

कलाम वर्ल्ड रिकॉर्ड्स: कलाम वर्ल्ड रिकॉर्ड्स भारत में स्थित एक प्रमुख रिकॉर्ड प्रमाणन संस्था है, जो पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर संचालित होती है. मुख्य रूप से युवा प्रतिभाओं, जीनियस बच्चों तथा असाधारण उपलब्धियों को सम्मानित करती है. जिसमें ग्रास्पिंग पावर, मेमोरी और विभिन्न क्षेत्रों के रिकॉर्ड शामिल हैं. दोनों संगठन ऑनलाइन आवेदन, वीडियो सत्यापन और मूल्यांकन के बाद रिकॉर्ड दर्ज करते हैं, जो व्यक्तियों को प्रेरित करते हैं और उनकी सफलता को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाते हैं.

ये भी पढ़ें-

'लड़की कैसे खेलेगी क्रिकेट?', BOYS टीम की कैप्टन बिहार की सलोनी ने धाकड़ प्रदर्शन से सबको चौंकाया

कान्स के रेड कार्पेट पर पहली बार बिहार की बेटी, रेणु पासवान लिख रही नया इतिहास