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उत्तराखंड आए 153 शरणार्थियों को मिली भारतीय नागरिकता, इन देशों के लोग हैं शामिल

देशभर में सीएए यानी नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू होने के बाद उत्तराखंड में 153 लोगों को मिली नागरिकता, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के शरणार्थी शामिल

Citizenship Amendment Act 2019
जनगणना कार्य एवं नागरिक पंजीकरण कार्यालय उत्तराखंड (फोटो सोर्स- ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : February 23, 2026 at 3:41 PM IST

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देहरादून: देश में सीएए लागू होने के बाद विदेश से आए सैकड़ों हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता दी जा चुकी है. उत्तराखंड में भी सीएए लागू होने के बाद से अब तक पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए 153 हिंदू एवं सिख शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जा चुकी है. जबकि, अभी भी देहरादून में रह रहे करीब 40-50 शरणार्थियों के आवेदनों पर जांच की प्रक्रिया जारी है.

तमाम जांच प्रक्रिया के बाद दी जाती है नागरिकता: विदेश से आकर भारत में रह रहे शरणार्थियों को नागरिकता, राज्य और केंद्र सरकार के समन्वय से दी जाती है. क्योंकि, जब कोई शरणार्थी नागरिकता के लिए आवेदन करता है, तो उसके लिए विस्तृत रूप से जांच की जाती है. फिर जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद नागरिकता दी जाती है.

उत्तराखंड में अब तक 153 शरणार्थियों को दी जा चुकी नागरिकता

उत्तराखंड में अभी तक 153 लोगों को नागरिकता दी जा चुकी है. जिसमें से 6 लोग अफगानिस्तान जबकि, 147 लोग पाकिस्तान से उत्तराखंड आए थे. ये सभी लोग लंबे समय से उत्तराखंड में निवास कर रहे हैं. जिनमें से ज्यादातर हिंदू और कुछ लोग सिख समुदाय से हैं.

देहरादून समेत इन जिलों में बसे हैं शरणार्थी: मुख्य रूप से उत्तराखंड के देहरादून जिले में विदेशों से आए लोग बसे हुए हैं. इसके अलावा विदेश से आए कुछ लोग जो हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल और उत्तरकाशी जिलों में भी रह रहे हैं उनको भारत की नागरिकता दी गई है. अब वे भारतीय नागरिक कहलाएंगे.

क्या बोले सीएम पुष्कर धामी? वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार देश में सीएए का कानून लेकर आई. जिसके तहत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के उत्पीड़ित लोग हैं, उनको भारत में नागरिकता देने का बिल पास किया गया है.

"सीएए के तहत पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर चुके हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन समुदाय के लोगों को भारत में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिल रहा है. उत्तराखंड में भी 153 लोगों को नागरिकता दी गई है. यह कदम न केवल मानवीय मूल्यों को सशक्त करता है. बल्कि, वसुधैव कुटुंबकम की भावना को भी चरितार्थ करता है. साथ ही विश्व भर में रह रहे हिंदुओं को राष्ट्र गौरव से जोड़ता है."- पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

क्या है सीएए? बता दें कि सीएए (CAA) का पूरा नाम नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (Citizenship Amendment Act 2019) है. ये भारत के नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन करने वाला एक महत्वपूर्ण कानून है. ये अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान से आए उन अवैध प्रवासियों (Illegal Migrants) को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने का तेज रास्ता प्रदान करता है, जो हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय से हैं.

भारत सरकार ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के चलते भारत आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता दिए जाने को लेकर नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन करने का निर्णय लिया था. जिसके तहत 10 दिसंबर 2019 को सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल (CAB) लोकसभा से पारित किया गया. इसके अगले दिन यानी 11 दिसंबर 2019 को राज्यसभा से सीएए का बिल पास हुआ.

वहीं, 12 दिसंबर 2019 को इसे तत्कालीन राष्ट्रपति राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी मिली. जिसके बाद यह बिल नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) यानी कानून बन गया. जो 10 जनवरी 2020 से प्रभावी हो गया. जबकि, 11 मार्च 2024 में नागरिकता संशोधन कानून की अधिसूचना जारी हुई. जिसके बाद पूरे देश में लागू कर दिया गया. इस कानून के तहत 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने का फैसला लिया गया.

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