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जानिए नीतीश के उन 10 मंत्रियों के बारे में जिन्होंने पहली बार ली है मंत्री पद की शपथ

गुरुवार को पटना के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह हुआ. इसमें 10 नए मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली. पढ़ें खबर

Bihar New Minister
नए मंत्री बनने वाले चेहरे (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : November 20, 2025 at 9:09 PM IST

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पटना : नीतीश कुमार ने आज 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री की शपथ ली और एक रिकॉर्ड बनाया. बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को 243 सीटों में से 202 सीटों का प्रचंड जीत मिला है. आज भव्य तरीके से शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया.

बिहार में शपथ ग्रहण समारोह : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री की मौजूदगी में नीतीश कुमार के साथ 26 मंत्रियों ने शपथ ली. इस तरह मुख्यमंत्री को मिलाकर 27 मंत्री मंत्रिमंडल में हो गए हैं. वैसे 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं, अभी 9 मंत्री पद और खाली रखे गए हैं.

जदयू कोटे से बनाए गए सभी 8 मंत्री पुराने मंत्री हैं जिन्हें फिर से रिपीट किया गया है. नीतीश कुमार ने किसी नए चेहरे को मौका नहीं दिया है. वहीं भाजपा ने 14 मंत्रियों में से 7 नए चेहरे को जगह दी है. लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा से भी पहली बार मंत्री बनाए गए हैं.

बीजेपी में 7 नए चेहरे : बीजेपी कोटे से 14 मंत्री बनाए गए हैं. सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा के साथ 7 पुराने मंत्री को फिर से मौका दिया गया है. वहीं सात नए चेहरे को भी मौका बीजेपी ने दिया. जिसमें संजय टाइगर, लखींद्र रोशन, श्रेयसी सिंह, प्रमोद चंद्रवंशी, रमा निषाद, रामकृपाल यादव और अरुण शंकर प्रसाद शामिल हैं.

संजय सिंह टाइगर : सातों नए मंत्रियों में संजय टाइगर पहली बार बीजेपी के टिकट पर विधायक बने हैं. आरा से सीपीआई माले के कयामुद्दीन अंसारी को 19000 से अधिक वोटों से हराया है. संजय टाइगर भोजपुर जिले के बिहिया के पास अमराई गांव में जन्म लिए थे.

बड़े भाई रह चुके हैं MLA : चार भाइयों में सबसे छोटे संजय टाइगर के बड़े भाई धर्मपाल सिंह 1990 से 2000 तक जनता पार्टी और जनता दल से शाहपुर के दो बार विधायक रह चुके हैं. संजय टाइगर के पिता का नाम माधव सिंह है. जो महालेखापाल के कार्यालय में काम करते थे. संजय टाइगर ने 1993 में पटना के एन कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उसके बाद एलएलबी और पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई भी पूरी की है.

अब तक शादी नहीं की : संजय टाइगर की बीजेपी में संघ के माध्यम से राजनीति में एंट्री हुई है भाजपा के प्रखर प्रवक्ता और तेज तर्रार कार्यकर्ता के रूप में संजय टाइगर की पहचान होती है. संजय टाइगर ने समाज सेवा के लिए अब तक शादी नहीं की है.

आरा से चुने गए हैं विधायक : 2015 विधानसभा चुनाव में संजय टाइगर बीजेपी के टिकट पर संदेश से चुनाव लड़े थे लेकिन सफलता नहीं मिली, लेकिन इस बार आरा से लड़ते हुए संजय टाइगर 19581 वोटों से चुनाव जीते हैं. संजय टाइगर को कुल 94201 वोट मिला है. तेज तर्रार प्रवक्ता होने के कारण ही संजय सिंह को टाइगर की उपाधि से नवाजा गया है. बीजेपी ने संजय टाइगर को उनकी सेवा के लिए ही मंत्री पद से नवाजा है.

राम कृपाल यादव : राम कृपाल यादव दानापुर विधानसभा से इस बार चुनाव जीते हैं. दानापुर के बाहुबली रीतलाल यादव को हराया है. बीजेपी ने मंत्री बनाकर अब नई भूमिका तय की है. रामकृपाल यादव कभी लालू प्रसाद यादव के काफी करीबी रहे हैं. रामकृपाल यादव का जन्म 12 अक्टूबर 1957 को पटना जिले के साबरचक गांव में हुआ था.

रहा है लंबा राजनीतिक सफर : बीए ऑनर्स तक की पढ़ाई रामकृपाल यादव ने पटना से ही की है. छात्र आंदोलन में रामकृपाल यादव सक्रिय हुए और 1977 में राजनीतिक शुरुआत की थी. पटना नगर निगम के वार्ड संख्या 10 से पार्षद बने, पटना के उप महापौर बने. लालू प्रसाद यादव के काफी नजदीकी होने के कारण आरजेडी से 1993 में पहली बार बिहार विधान परिषद के सदस्य बनाए गए. 1993 में पहली बार लोकसभा के सदस्य बने, 1996 में दूसरी बार लोकसभा के लिए चुने गए. 1998 में धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष भी बनाए गए. 2004 में तीसरी बार लोकसभा के लिए चुने गए. 2010 में राज्यसभा के सदस्य भी बने.

RJD से BJP में गए : इसी बीच लालू प्रसाद यादव से दूरियां बढ़ने लगी और 2014 में टिकट नहीं मिलने के कारण बीजेपी से पाटलिपुत्र का चुनाव लड़े और चौथी बार भी जीते. केंद्र में मंत्री भी बनाए गए. बीजेपी ने 2019 में भी पाटलिपुत्र से रामकृपाल यादव को चुनाव लड़ाया और पांचवी बार चुनाव जीते, लेकिन इस बार रामकृपाल को केंद्र में मंत्री नहीं बनाया गया. 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने फिर से टिकट दिया लेकिन इस बार मीसा भारती से चुनाव हार गए.

बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में रामकृपाल यादव को दानापुर से उतरा और शानदार जीत हासिल की. बिहार सरकार में पहली बार मंत्री बनने का मौका रामकृपाल यादव को मिला है. रामकृपाल यादव की पत्नी का नाम किरण देवी है और दो पुत्र अभिषेक यादव और अभिमन्यु यादव है और एक पुत्री आरती हैं. रामकृपाल यादव सर्व सुलभ नेता माने जाते हैं और जनता के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं.

श्रेयसी सिंह : श्रेयसी सिंह को भाजपा ने पहली बार मंत्री बनाया है. दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह की पुत्री श्रेयसी जमुई विधानसभा से दूसरी बार चुनाव जीती हैं. श्रेयसी सिंह 2020 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुई थी. श्रेयसी सिंह का जन्म जमुई जिले के गिद्धौर में 29 अगस्त 1991 को हुआ था. परिवार का खेल और राजनीति में पहले से पकड़ रहा है. इस तरह से श्रेयसी सिंह को विरासत में राजनीति और खेल दोनों मिला है.

अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में पहचान : श्रेयसी सिंह की पहचान एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के तौर पर भी है. देश की प्रसिद्ध निशानेबाज हैं और कई प्रतियोगिताओं में देश के लिए पदक जीता है. राष्ट्रमंडल खेल में निशानेबाजी में स्वर्ण और रजत पदक जीता था. 2014 एशियाई खेलों में टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था.

2025 विधानसभा चुनाव में श्रेयसी सिंह ने राजद के मो. शमसाद आलम को 54498 वोटों से पराजित किया है. बीजेपी ने श्रेयसी सिंह को पहली बार मंत्री बनाया है. श्रेयसी सिंह के पिता स्वर्गीय दिग्विजय सिंह सांसद और केंद्र में मंत्री भी रह चुके हैं. दिग्विजय सिंह जनता दल, समता पार्टी और जदयू में भी रहे.

2009 में जब नीतीश कुमार ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो दिग्विजय सिंह ने 2009 में बांका से निर्दलीय चुनाव लड़ा और सांसद चुने गए. दिग्विजय सिंह केंद्र में चंद्रशेखर और अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में मंत्री रहे हैं. दिग्विजय सिंह के निधन के बाद 2010 में श्रेयसी सिंह की मां पुतुल देवी भी बांका से सांसद रही हैं. श्रेयसी सिंह खेल से राजनीति में आई.

लखेंद्र कुमार रोशन : लखेंद्र कुमार रोशन को भी बीजेपी ने मंत्रिमंडल में शामिल किया है. 2020 में पातेपुर से चुनाव जीतने वाले लखेंद्र कुमार रोशन चर्चा में तब आए थे जब 2023 में महागठबंधन की सरकार में विधानसभा में माइक तोड़ने पर इनको निलंबित कर दिया गया था. हालांकि बाद में निलंबन वापस वापस ले लिया गया था.

दलित समाज से आने वाले लखेंद्र कुमार रोशन का जन्म 2 जनवरी 1980 को हुआ था. पातेपुर सुरक्षित विधानसभा सीट से 2025 में दूसरी बार चुनाव जीते हैं. ग्रेजुएशन की पढ़ाई इन्होंने पूरी की है. बीजेपी ने लखेंद्र कुमार रोशन को प्रवक्ता भी बनाया था और पार्टी में संगठन में जिम्मेदारी भी दी थी. अब मंत्री के रूप में नई जिम्मारी इनको दी गई है. लखेंद्र कुमार रोशन लखेंद्र पासवान के नाम से भी जाने जाते हैं और तेज तर्रार वक्ता हैं.

रमा निषाद : बीजेपी ने रमा निषाद को इस बार नए चेहरे के रूप में मंत्री बनाया है. राम निषाद कैप्टन जय नारायण निषाद की बहू हैं और पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी हैं. अजय निषाद लोकसभा चुनाव में आरजेडी में शामिल हो गए थे और लोकसभा का चुनाव भी लड़े थे लेकिन हार गए. इस बार विधानसभा चुनाव से पहले फिर से बीजेपी में शामिल हो गए और अपनी पत्नी को भी बीजेपी का सदस्य बनाया.

रमा निषाद मुजफ्फरपुर जिले के औराई विधानसभा से पहली बार चुनाव जीती हैं. पहली बार में ही भाजपा ने उन्हें मंत्री बना दिया है. वैसे रमा निषाद हाजीपुर नगर परिषद की वार्ड पार्षद, उपाध्यक्ष और अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. रमा निषाद अपने ससुर की विरासत को आगे बढ़ा रही हैं. बीजेपी ने औराई विधानसभा में रामसूरत राय का टिकट काटकर रमा निषाद को टिकट दिया था. 57206 वोटो के अंतर से वीआईपी के उम्मीदवार भोगेंद्र सहनी को हराया है.

औराई क्षेत्र में पहली बार महिला विधायक बनीं हैं. 58 वर्षीय रमा निषाद 12वीं तक पास हैं. कैप्टन जय नारायण निषाद का मल्लाह जाति में अच्छी पकड़ है मुकेश सहनी के काट के रूप में बीजेपी ने इन्हें मंत्री बनाकर मैसेज देने की कोशिश की है.

अरुण शंकर प्रसाद : बीजेपी ने अरुण शंकर प्रसाद को नए मंत्री के रूप में मौका दिया है. अरुण शंकर प्रसाद मधुबनी के खजौली सीट से लगातार तीसरी बार विधानसभा का चुनाव जीते हैं. अरुण शंकर प्रसाद ने विधानसभा चुनाव में राजद के बृज किशोर यादव को 13126 वोटों से हराया है.

अरुण शंकर प्रसाद का जन्म 31 दिसंबर 1960 को हुआ था. 2010 में पहली बार विधायक बने. बीजेपी के मिथिलांचल के इलाके में कद्दावर नेता माने जाते हैं. वैश्य समाज से आते हैं. बीजेपी ने अरुण शंकर प्रसाद को पार्टी संगठन में भी जिम्मेवारियां दी है. अब मंत्री के रूप में नई भूमिका में नजर आएंगे.

प्रमोद चंद्रवंशी : बीजेपी ने प्रमोद चंद्रवंशी को पहली बार मंत्री बनाया है. अति पिछड़ा वर्ग से आने वाले प्रमोद चंद्रवंशी कभी नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में काम करते थे, लेकिन जदयू में मिली उपेक्षा से नाराज होकर 2023 में बीजेपी में शामिल हो गए. बीजेपी ने इन्हें एमएलसी बनाया और अब मंत्री पद भी दिया है. अति पिछड़ा वर्ग में उनकी अच्छी पकड़ है. बीजेपी ने मंत्री बनाकर एक मैसेज देने की कोशिश की है.

LJPR के दो मंत्री : बीजेपी के अलावा चिराग पासवान की पार्टी लोजपा रामविलास के दो विधायक को पहली बार मंत्री बनने का मौका मिला है. संजय कुमार और संजय सिंह को मंत्री बनाया गया है. संजय सिंह महुआ से विधायक चुने गए हैं. पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं. महुआ में लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को हराया है.

संजय सिंह 2020 में भी लोजपा के टिकट पर महुआ से चुनाव लड़े थे लेकिन राजद के राकेश रोशन से चुनाव हार गए थे. इस बार राकेश रोशन और तेज प्रताप दोनों को संजय सिंह ने हराया है. इसलिए पार्टी की तरफ से मंत्री बनाकर इनाम दिया गया है.

उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को भी पहली बार मंत्री बनाया गया है. दीपक प्रकाश अभी किसी सदन में सदस्य नहीं है. ऐसे में माना जा रहा है कि दीपक प्रकाश को विधान परिषद का सदस्य बनाया जाएगा, क्योंकि चार विधान परिषद का सीट खाली हो रहा है. 4 एमएलसी मंत्री बन गए हैं तो उन्हीं में से एक पर दीपक प्रकाश को भेजा जाएगा.

37 वर्षीय दीपक प्रकाश इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है. महनार प्रखंड के नारायणपुर डेढ़पुरा पंचायत के निवासी हैं. दीपक प्रकाश की मां स्नेहलता सासाराम से विधायक चुनी गई हैं और पिता उपेंद्र कुशवाहा, कुशवाहा समाज के बड़े नेता माने जाते हैं. फिलहाल राज्यसभा के सांसद हैं. उपेंद्र कुशवाहा कई दल में रह चुके हैं. सांसद और केंद्र में मंत्री भी रहे हैं. विधायक और एमएलसी भी रहे हैं. अब परिवार की दूसरी पीढ़ी राजनीति में नई भूमिका निभाने वाली है.

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