औरंगजेब की कहानी से जुड़ी परंपरा, बादशाह ने अपनी दाढ़ी से साफ की श्रीनाथजी मंदिर की सीढ़ियां - BADSHAAH KI SAVARI
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Published : March 14, 2025 at 10:46 PM IST
राजसमंद : नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर में धुलंडी पर वर्षों पुरानी परंपरा अनुसार "बादशाह की सवारी" निकाली जाती है. इस सवारी में बादशाह बना व्यक्ति मुगल वेशभूषा, नकली दाढ़ी-मूंछ और आंखों में काजल लगाकर पालकी में सवार होता है. मंदिर मंडल बैंड-बाजे के साथ सवारी की अगवानी करता है. सवारी मंदिर की परिक्रमा कर श्रीनाथजी के मंदिर पहुंचती है, जहां बादशाह बने व्यक्ति द्वारा सूरजपोल की नौ सीढ़ियों को दाढ़ी से साफ करने की रस्म निभाई जाती है. इसके बाद मंदिर मंडल द्वारा बादशाह को वस्त्र व आभूषण भेंट किए जाते हैं और उपस्थित लोग उसे खरी-खोटी सुनाते हैं. यह परंपरा औरंगजेब के समय की घटना से जुड़ी है, जब मंदिर में प्रवेश करते ही उसकी दृष्टि चली गई थी. क्षमायाचना के बाद उसकी आंखें ठीक हुईं, और पश्चाताप के तौर पर उसने मंदिर की सीढ़ियां साफ की थीं. इसके बाद औरंगजेब की मां ने मंदिर को बहुमूल्य हीरा भेंट किया, जो आज भी श्रीनाथजी की दाढ़ी में सुशोभित है.
राजसमंद : नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर में धुलंडी पर वर्षों पुरानी परंपरा अनुसार "बादशाह की सवारी" निकाली जाती है. इस सवारी में बादशाह बना व्यक्ति मुगल वेशभूषा, नकली दाढ़ी-मूंछ और आंखों में काजल लगाकर पालकी में सवार होता है. मंदिर मंडल बैंड-बाजे के साथ सवारी की अगवानी करता है. सवारी मंदिर की परिक्रमा कर श्रीनाथजी के मंदिर पहुंचती है, जहां बादशाह बने व्यक्ति द्वारा सूरजपोल की नौ सीढ़ियों को दाढ़ी से साफ करने की रस्म निभाई जाती है. इसके बाद मंदिर मंडल द्वारा बादशाह को वस्त्र व आभूषण भेंट किए जाते हैं और उपस्थित लोग उसे खरी-खोटी सुनाते हैं. यह परंपरा औरंगजेब के समय की घटना से जुड़ी है, जब मंदिर में प्रवेश करते ही उसकी दृष्टि चली गई थी. क्षमायाचना के बाद उसकी आंखें ठीक हुईं, और पश्चाताप के तौर पर उसने मंदिर की सीढ़ियां साफ की थीं. इसके बाद औरंगजेब की मां ने मंदिर को बहुमूल्य हीरा भेंट किया, जो आज भी श्रीनाथजी की दाढ़ी में सुशोभित है.

