NASA की जेम्स वेब टेलिस्कोप ने खोजा पहला 'ब्लैक होल स्टार', वैज्ञानिकों ने रखा नाम ‘द क्लिफ’
जेम्स वेब टेलिस्कोप ने एक नई, रहस्यमयी खगोलीय वस्तु खोजी है, जिसमें ब्लैक होल और स्टार दोनों की विशेषताएं मौजूद हैं.


Published : September 26, 2025 at 4:14 PM IST
हैदराबाद: नासा की जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (JWST) ने हाल ही में ब्रह्मांड में में एक ऐसी चीज देखी है, जो अभी तक की वैज्ञानिक समझ को चैलेंज कर रहा है. इस नई, चमकदार और रहस्यमयी ऑब्जेक्ट वैज्ञानिकों ने ‘The Cliff’ नाम दिया है. इसकी बनावट, आकार और व्यवहार इतने अनोखे हैं कि इसे किसी भी मौजूदा कैटेगिरी में नहीं रखा जा सकता है. इस कारण वैज्ञानिकों ने इस नई चीज ‘The Cliff’ के लिए एक नई कैटेगिरी बनाई है, जिसका नाम ब्लैक होल स्टार रखा है.
एक नई स्टडी के अनुसार, द क्लिफ की सबसे खास बात है कि इसके बिल्कुल केंद्र यानी बीच में एक ब्लैक होल है, जो आसपास की गैसों को काफी तेजी से निगलता जा रहा है. हालांकि, इसके चारों ओर दिखने वाला चमकदार गैसीय आवरण, किसी तारे जैसा दिखता है. आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि ब्लैक होल और तारे एक-दूसरे के विपरित होते हैं, लेकिन यहां दोनों का मेल एक ही ऑब्जेक्ट में देखा गया है, वैज्ञानिकों की अभी तक की सोच और रिसर्च को चुनौती दे रहा है और उन्हें उससे भी आगे सोचने पर मजबूर कर रहा है.
नासा की जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (JWST) ने हाल ही में ब्रह्मांड में में एक ऐसी चीज देखी है, जो अभी तक की वैज्ञानिक समझ को चैलेंज कर रहा है. इस नई, चमकदार और रहस्यमयी ऑब्जेक्ट वैज्ञानिकों ने ‘The Cliff’ नाम दिया है. इसकी बनावट, आकार और व्यवहार इतने अनोखे हैं कि इसे किसी भी मौजूदा कैटेगिरी में नहीं रखा जा सकता है. इस कारण वैज्ञानिकों ने इस नई चीज ‘The Cliff’ के लिए एक नई कैटेगिरी बनाई है, जिसका नाम ब्लैक होल स्टार रखा है.

द क्लिफ ने वैज्ञानिकों को किया कंफ्यूज़
द क्लिफ की सबसे खास बात है कि इसके बिल्कुल केंद्र यानी बीच में एक ब्लैक होल है, जो आसपास की गैसों को काफी तेजी से निगलता जा रहा है. हालांकि, इसके चारों ओर दिखने वाला चमकदार गैसीय आवरण, किसी तारे जैसा दिखता है. आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि ब्लैक होल और तारे एक-दूसरे के विपरित होते हैं, लेकिन यहां दोनों का मेल एक ही ऑब्जेक्ट में देखा गया है, वैज्ञानिकों की अभी तक की सोच और रिसर्च को चुनौती दे रहा है और उन्हें उससे भी आगे सोचने पर मजबूर कर रहा है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ब्लैक होल गैस को इतनी तेजी से खींच रहा है वह गर्म होकर एक होकर एक चमकती हुई खोल में बदल जाती है. यह खोला इतना कॉम्पैक्ट है कि दूर से देखने पर यह किसी तारे जैसा ही लगता है कि इसके अंदर एक ब्लैक होल एक्टिव है. इसकी स्पेक्ट्रल विशेषताएं भी सामान्य सुपरमैसिव ब्लैक होल्स या एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लियस से अलग हैं.
अगर वैज्ञानिकों की यह खोज सही साबित होती है, तो ब्लैक होल स्टार्स की वजह से वैज्ञानिक ब्रह्मांड की शुरुआत, बड़े-बड़े अंतरिक्षीय पिंडों के बनने की प्रक्रिया और ग्रैवेटी और रोशनी के बीच के रिश्ते को बेहतर समझने में मदद कर सकते हैं. JWST (जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप) की इंफ्रारेड टेक्नोलॉजी से ऐसे और भी रहस्यमयी ऑब्जेक्ट्स की जांच की जा रही है. इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि वहां मौजूद गैस कैसी है, उसका घनत्व कितना है और वह किस रफ्तार से हिल रही है.
वैज्ञानिकों ने ‘द क्लिफ’ पर लगातार नज़र बना रखी है और वो इस तरह के अन्य ऑब्जेक्ट्स को भी ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं. अगर वैज्ञानिकों को ऐसे और भी ऑब्जेक्ट्स मिलते हैं तो ऐसा माना जा सकता है कि ब्लैक होल स्टार्स कोई यूनिक या दु्र्लभ चीज़ नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की एक नई और बड़ी कैटेगिरी है, जो अभी तक वैज्ञानिकों की नज़र में नहीं आई थी.

