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इथेनॉल मिश्रण का बड़ा लक्ष्य निर्धारित करने से पहले किया जाएगा आकलन: पेट्रोलियम मंत्री

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार उच्च लक्ष्य निर्धारित करने से पहले इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का 'मूल्यांकन' करेगी.

Union Petroleum Minister Hardeep Singh Puri
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी (फोटो - IANS Photo)
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By ETV Bharat Tech Team

Published : September 18, 2025 at 6:24 PM IST

4 Min Read
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हैदराबाद: केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार उच्च लक्ष्य निर्धारित करने से पहले इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का 'मूल्यांकन' करेगी. यह बयान E20 ईंधन के कारण इंजनों को नुकसान पहुंचने, ईंधन दक्षता कम होने और ईंधन की कीमतों में कोई कमी न होने को लेकर वाहन मालिकों की तीखी प्रतिक्रिया के बीच आया है. हालांकि सरकार का कहना है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाना पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित है, लेकिन वाहन उपयोगकर्ताओं का मानना ​​इससे उलट है.

ज्यादा मिश्रित इथेनॉल ईंधन की ओर बढ़ने की कोई योजना नहीं: पुरी
हाल ही में एक कार्यक्रम में बोलते हुए हरदीप पुरी ने कहा कि, "हमारा लक्ष्य 20 प्रतिशत मिश्रण का था, जिसके लिए लक्ष्य तिथि 2030 थी, और हमने इसे छह साल पहले ही पूरा कर लिया है. मैं यहीं विराम लगाता हूं. हम आकलन करेंगे कि हमें कहां जाना है. आप जो भी कहानियां सुनते हैं कि हम अब एक और छलांग लगाने जा रहे हैं, वगैरह, हम उस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं."

उन्होंने आगे कहा कि, "जैव ईंधन के इंजनों के लिए हानिकारक होने के बारे में आप जितनी भी कहानियां सुनते हैं, उनमें बहुत सारी 'BS' होती हैं - 'B' कैपिटल, 'S' कैपिटल. और मुझे नहीं पता कि इसका क्या मतलब है, लेकिन यह एक विशेषज्ञ है."

बता दें कि कुछ समय पहले ही रिपोर्ट्स सामने आई थीं कि सरकार पेट्रोल में 27 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने की योजना बना रही है. एक हालिया रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) को प्राथमिकता के आधार पर E27 ईंधन के लिए मानक तैयार करने का निर्देश दिया गया है.

लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि इसे लागू करने की योजना फिलहाल टाल दी जाएगी. बता दें कि सरकार ने देश भर के सभी पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को अनिवार्य कर दिया है, जिससे वाहन यूजर्स में भारी नाराजगी है. कुछ समय से वाहन चालक शिकायत कर रहे हैं कि यह ईंधन वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचाता है और इथेनॉल की संक्षारक नेचर के कारण इंजन की टूट-फूट भी बढ़ जाती है.

वाहन मालिकों ने बताया है कि पुराने वाहनों की ईंधन दक्षता में 15-20 प्रतिशत की गिरावट आई है. इन वाहनों को E20 ईंधन पर चलने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया था. इसके विपरीत, सरकार का दावा है कि फ्यूल एफिशिएंसी में यह गिरावट केवल 1-2 प्रतिशत है.

इतना ही नहीं, पेट्रोल की कीमतों पर इथेनॉल मिश्रण के प्रभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, और यह भी कि उच्च इथेनॉल मिश्रण के बावजूद पेट्रोल की कीमतों में कोई कमी क्यों नहीं आई है. पिछले तीन सालों से पेट्रोल की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं.

इसके अलावा, इथेनॉल के उत्पादन को लेकर भी चिंताएं जताई जा रही हैं, जिसके लिए पानी की ज्यादा जरूरत वाली फसलों की आवश्यकता होती है. हालांकि, सरकार का कहना है कि गन्ने या मक्के से 20 प्रतिशत इथेनॉल निकालने का कार्यक्रम एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य उत्सर्जन में कमी लाना और किसानों की आय बढ़ाना है.

तेल आयात पर निर्भरता कम करने के लिए जैव ईंधन आवश्यक
हरदीप पुरी ने अपने बयान में कहा कि "2014 में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का प्रतिशत 1.4 प्रतिशत था. पिछले दशक में यह बढ़कर 20 प्रतिशत हो गया है. तेल मंत्रालय ने भी E20 के इस्तेमाल को लेकर उठ रही आशंकाओं को खारिज करते हुए, इन दावों को निराधार बताया है."

पुरी ने कहा कि "कुछ पुराने वाहनों में रबर के कुछ पुर्जे और गास्केट बदलने की ज़रूरत पड़ सकती है, और इसे एक "सरल प्रक्रिया" बताया." कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए पेट्रोल में इथेनॉल के उच्च मिश्रण को शामिल करने की योजना के बारे में सरकार मुखर रही है.

पुरी ने कहा कि "भारत अपनी तेल ज़रूरतों को पूरा करने के लिए 88 प्रतिशत आयात पर निर्भर है, और उन्होंने जैव ईंधन और स्वच्छ ऊर्जा को 'समय की अनिवार्यता' बताया."