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सैलानियों की शान बनकर उभरा सांभर, मेहमान परिंदों के दीदार के लिए पर्यटन को लग रहे हैं पंख

ऐतिहासिक सांभर झील और आसपास के इलाके में पर्यटन के लिहाज से बड़ी उम्मीद नजर आ रही है.

सांभर झील में पक्षी
सांभर झील में पक्षी (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : September 27, 2025 at 2:19 PM IST

7 Min Read
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जयपुर : 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस का ऐलान संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) की ओर से किया गया था. साल 1980 के बाद से पर्यटन को सुलभ बनाने के मकसद से इस दिन को तय किया गया है. यह मौका पर्यटन नीति के मुद्दों के लिए एक वैश्विक मंच भी प्रदान करता है. इसी कड़ी में बीते कुछ सालों में राजस्थान का सांभर कस्बा बर्ड वॉचिंग और पर्यटन के नए क्षेत्र के रूप में वैश्विक पटल पर उभरा है. स्थानीय कारोबारी और इस क्षेत्र से जुड़े लोग भी अब इलाके में नई उम्मीदों को तलाशने के साथ ही अवसर परवान चढ़ने की बात मानते हैं.

आने वाला सीजन सांभर को बनाएगा जन्नत : बर्ड वॉचिंग से जुड़े एक्सपर्ट गौरव दाधीच कहते हैं कि राजस्थान में केवलादेव नेशनल पार्क के बाद सांभर झील को रामसर साइट का दर्जा मिला हुआ है. करीब 90 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली इस झील में हर साल लाखों की तादाद में विदेशी परिंदे आते हैं. खास तौर पर लेसर और ग्रेटर फ्लेमिंगो के अलावा कई विदेशी प्रजातियों की डक्स यहां आती हैं. एक लिहाज से कहा जा सकता है कि ज्यादा तादाद में विदेशी परिंदों के अलावा बड़ी संख्या में अलग-अलग प्रजातियों के पक्षियों का सांभर आना होता है.

ऐतिहासिक सांभर झील से पर्यटन की उम्मीद (ETV Bharat Jaipur)

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उन्होंने उम्मीद जताई है कि इस साल बंपर बारिश के बाद झील में आए रिकॉर्ड पानी के कारण यह उम्मीद की जा रही है कि इस साल कई नई प्रजातियों के पक्षी भी यहां आएंगे, जो पर्यटन के साथ-साथ सांभर को बर्ड वॉचिंग का शौक रखने वालों की पसंद की जगहों में शुमार कर देंगे. उन्होंने कहा कि आने वाला सीजन सांभर में किसी जन्नत से कम नहीं होगा. जब एक साथ एक जगह पर धर्म, बर्ड वॉचिंग, सनराइज और सनसेट के नजारे पर्यटकों को लुभाएंगे. उन्होंने इस बात का भी दावा किया कि बीते कुछ सालों से सांभर में सैलानियों की तादाद में इजाफा हुआ है.

सांभर झील में दिखने वाली विदेशी पक्षी प्रजातियां
सांभर झील में दिखने वाली विदेशी पक्षी प्रजातियां (ETV Bharat GFX)

पर्यटन के लिहाज से सांभर फेस्टिवल : सांभर में पर्यटन को बढ़ाने की दिशा में काफी काम हो रहा है. हाल ही में नवरात्रि के दौरान शाकंभरी मंदिर के बाहर पर्यटन विभाग की तरफ से विशेष आयोजन किए गए, जबकि हर साल टूरिज्म कैलेंडर में सांभर फेस्टिवल के नाम से एक इवेंट भी दर्ज हो चुका है. राजस्थान पर्यटन विभाग के मुताबिक इस साल जनवरी में 24 से 28 तारीख तक आयोजित इस महोत्सव में 2 लाख से ज्यादा देसी-विदेशी सैलानी यहां पहुंचे थे. विभाग भी इनके आकर्षण को बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है.

सांभर झील में दिखने वाली विदेशी पक्षी प्रजातियां
सांभर झील में दिखने वाली विदेशी पक्षी प्रजातियां (ETV Bharat GFX)

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उप निदेशक उपेन्द्र सिंह शेखावत के मुताबिक सांभर फेस्टिवल में राजस्थानी सांस्कृतिक झलक के साथ-साथ एडवेंचर और धार्मिक कार्यक्रमों की झलक दिखती है. यह इलाका अब प्री-वेडिंग शूट और एस्ट्रो टूरिज्म के लिए भी प्रसिद्ध हो रहा है. इसके अलावा, सांभर इलाके में स्थित झपोक, सांभर साल्ट कैंपस, देवयानी तीर्थ सरोवर और मेला ग्राउंड जैसे स्थल महोत्सव के मुख्य आकर्षण होंगे.

शांकभरी माता मंदिर
शांकभरी माता मंदिर (ETV Bharat Jaipur)

इन्हें भी हैं बड़ी उम्मीद : सांभर झील में स्थित ऐतिहासिक शांकभरी माता मंदिर ट्रस्ट के मैनेजर अजय कुमार जोपट बताते हैं कि करीब चार दशक के बाद झील में पानी की प्रचुर मात्रा देखने को मिली है. हाल में इसमें पानी की काफी मात्रा है, जो अभी से इसे लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रही है. नवरात्रि के दौरान मंदिर में लोगों की ज्यादा संख्या आने लगी है. इस साल मंदिर के नजदीक फ्लेमिंगो पक्षियों की मौजूदगी ने धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ बर्ड वॉचिंग को पसंद करने वाले लोगों की संख्या में इजाफा कर दिया है. मंदिर में शाहपुरा से आए आदित्य खारोल का कहना है कि मंदिर के करीब विदेशी मेहमान परिंदों को देखकर उन्हें काफी अच्छा लगा है, वे अब इस बारे में बाकी लोगों को भी बताएंगे.

सैलानियों की शान बनकर उभरा सांभर
सैलानियों की शान बनकर उभरा सांभर (ETV Bharat Jaipur)

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सांभर में पर्यटन से जुड़ी गतिविधियां : महोत्सव के दौरान सांभर टाउन हेरिटेज वॉक के माध्यम से पर्यटक शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से रूबरू होते हैं. इसी तरह से रंगोली और पेंटिंग प्रतियोगिताएं स्थानीय कला को मंच प्रदान करती हैं, जिसमें हर आयु वर्ग के लोग उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं. पारंपरिक घुड़सवारी, ऊंट सवारी और ऊंट गाड़ी की सैर पर्यटकों को रेगिस्तानी जीवन शैली का अनुभव कराती हैं. रात के वक्त आसमान में सितारों का नजारा और एस्ट्रो टूरिज्म की गतिविधियां आकाशगंगा और तारों की दुनिया से रूबरू करवाती है. इसके साथ ही, सांभर की मशहूर नमक प्रसंस्करण इकाइयों का दौरा पर्यटकों को नमक उत्पादन की पारंपरिक प्रक्रिया से अवगत करवाता है. यह महोत्सव न सिर्फ मनोरंजन का जरिया है, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत, कला और प्राकृतिक सौंदर्य का जीवंत प्रतीक भी बन रहा है.

परिंदों के दीदार के लिए आ रहे पर्यटक
परिंदों के दीदार के लिए आ रहे पर्यटक (ETV Bharat Jaipur)

सांभर में पर्यटन गतिविधियां :

  1. पक्षी अवलोकन : प्रकृति प्रेमियों के लिए सांभर के साल्ट लेक में पक्षी अवलोकन का अनुभव क्षेत्र की जैव विविधता को दिखाता है.
  2. सांभर टाउन हेरिटेज वॉक : इस वॉक के दौरान सैलानी सांभर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को करीब से देख सकेंगे.
  3. पेंटिंग और रंगोली प्रतियोगिताएं : स्थानीय कला और रंगोली प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा.
  4. घुड़सवारी और ऊंट सवारी : महोत्सव में पारंपरिक घुड़सवारी, ऊंट सवारी और ऊंट गाड़ी की सवारी का आनंद लिया जा सकेगा.
  5. सितारों का अवलोकन और एस्ट्रो टूरिज्म : रात के समय में सितारों को देखने का अवसर मिलेगा, साथ ही एस्ट्रो टूरिज्म से जुड़ी गतिविधियां भी होंगी.
  6. नमक प्रसंस्करण टूर : सांभर की प्रसिद्ध नमक फैक्ट्रियों का दौरा किया जा सकेगा.

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पर्यटन कारोबारियों को भी उम्मीद : पर्यटन कारोबारी संजय कौशिक ने बताया कि सरकारी स्तर पर बीते कुछ समय से सांभर में पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों के विस्तार में काफी काम हो रहा है. सांभर फेस्टिवल को लेकर काफी प्रचार करने की जरूरत है. जयपुर से 80 किलोमीटर की दूरी पर इस जगह के प्रचार से राजस्थान के पर्यटन क्षेत्र की संभावनाओं में और इजाफा होगा. इस तरह से प्राकृतिक वातावरण में धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, एस्ट्रो टूरिज्म के साथ-साथ एडवेंचर से जुड़ी गतिविधियां लोगों का आकर्षण बढ़ाएंगी. प्रकृति प्रेमियों के लिए झील में आने वाले विदेशी पक्षी इस अनुभव में चार चांद लगाएंगे.

लेसर फ्लेमिंगो
लेसर फ्लेमिंगो (ETV Bharat)

संजय कौशिक ने बताया कि इस साल पर्यटन दिवस की थीम 'पर्यटन और सतत परिवर्तन' रखी गई है. यह थीम साफ बताती है कि हमारी यात्राएं अब सिर्फ मनोरंजन नहीं हैं, बल्कि ये सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय बदलाव लाने का एक सशक्त जरिया बनकर सामने आएगी. सांभर जैसी जगह इस थीम पर मुफीद साबित होती है. वहीं, स्थानीय कलाकार पप्पू नाथ ने बताया कि 40 साल बाद जीरी में इतनी अधिक मात्रा में पानी आया है, जिसके कारण इस बार बड़ी संख्या में सैलानी यहां आ रहे हैं.