पालक, लाल साग और सब्जी से हर्बल गुलाल बना रहीं महिलाएं, अमेरिका तक है इसकी डिमांड, जानिए कैसे होता है तैयार?
बिहार में सब्जी और फूलों से जीविका की दीदियां हर्बल गुलाल बना रही हैं. जिसकी अमेरिका तक डिमांड है, जानें कैसे होता है तैयार...

Published : March 7, 2025 at 5:19 PM IST
गया: होली का त्योहार काफी नजदीक आ गया है और बाजार रंग-बिरंगे गुलालों से सज गया है. ऐसा ही खास गुलाल बिहार के गया में बनता है. ये प्राकृतिक और सुगंधित गुलाल देश ही नहीं विदेश तक जाना जाता है. हरी सब्जियों और फूलों से जीविका की दीदियां गुलाल बनाने में जुटी हुई है. इस गुलाल की डिमांड देश के कई राज्यों से बड़े पैमाने पर होती है. इसकी धमक अमेरिका तक है.
जीविका की दीदियां बना रही हर्बल गुलाल: गया के ढुंंगेश्वरी में जीविका की दीदीयां हरी सब्जियों और फूलों के मिश्रण से हर्बल गुलाल बना रही है. यह गुलाल पूरी तरह से प्राकृतिक होता है. इसमें किसी प्रकार का केमिकल यूज नहीं किया जाता है. जीविका की महिलाओं की मानें, तो यहां बनने वाले इस सुगंधित प्राकृतिक गुलाल की डिमांड बिहार, झारखंड दिल्ली, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से आती है. जिसे वे महिलाएं बनाकर सप्लाई करती हैं. वहीं यह गुलाल विदेश में भारतीय मूल के लोगों के बीच काफी डिमांड में रहती है.
2021 में शुरू किया था गुलाल बनाने का कारोबार: ढुंगेश्वरी में जीविका की मुन्नी देवी, राधा देवी समेत कई महिलाएं प्राकृतिक गुलाल बनाने में जुटी हुई है. यह हर्बल गुलाल इनके द्वारा साल 2021 से तैयार किया जा रहा है. प्रतिदिन हजारों पैकेट प्राकृतिक गुलाल बनाए जा रहे हैं. पिछले एक महीने से ही गुलाल बनाने का काम शुरू कर दिया जाता है. इसकी बिक्री अंतर्राष्ट्रीय स्थली बोधगया के अलावे बौद्धों के प्रसिद्ध स्थल ढुंंगेश्वरी और गया के मार्केट में इन महिलाओं के द्वारा खुद की जाती है. ढुंगेश्वरी एक प्रसिद्ध स्थल है. ऐसे में यहां काफी संख्या में विदेशी पहुंचते हैं और इस प्राकृतिक गुलाल को वह काफी पसंद करते हैं.

पालक, सीम, परास ऐसे होता है गुलाल तैयार: मुन्नी देवी ने बताया कि पालक का साग, सीम, परास, गेंदा के फूलों से बनने वाले इस प्राकृतिक गुलाल में कोई केमिकल का मिश्रण नहीं होता है. ऐसे में इस गुलाल को जितना भी लगाया जाए, उसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है. स्किन पूरी तरह से सुरक्षित रहती है. यही वजह है कि आज जहां बाजारों में बड़े तादाद में केमिकल युक्त गुलाल उपलब्ध हैं, तो इसके बीच इस हर्बल गुलाल की मार्केट में डिमांड बढ़ गई है.

"होली में बड़ा रोजगार मिलता है. प्राकृतिक गुलाल देश ही नहीं विदेशों तक जाता है. वर्ष 2021 से प्राकृतिक गुलाल हम लोग बना रहे हैं. इस सीजन में हमें काम से फुर्सत नहीं मिलती है और अच्छी कमाई हो जाती है. वहीं खुशी होती है कि लोगों के बीच बिना केमिकल का गुलाल जाता है. इस हर्बल गुलाल से त्वचा को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता. ये काफी सुगंधित होता है और पूरी तरह से यह प्राकृतिक रूप से तैयार किया जाता है."-मुन्नी देवी, जीविका और प्रेरणा संस्था से जुड़ी महिला

महिलाओं को मिला बड़ा मार्केट और रोजगार: होली नजदीक आते ही हर्बल गुलाल बनाने में जुटी महिलाओं के चेहरे पर खुशी है. क्योंकि उन्हें एक बड़ा मार्केट-बड़ा रोजगार मिलता है. कम पैसों में ही हर्बल गुलाल तैयार हो जाता है लेकिन इसके दाम बाजार में सामान्य तौर पर बिकने वाले गुलाल से काफी अधिक होते हैं. इसका कारण है कि इस गुलाल की डिमांड बहुत ज्यादा रहती है.

जीविका से जुड़ी मिलाएं: मार्केटिंग अच्छी होने के कारण इस हर्बल गुलाल को अच्छा दाम मिल जाता है. वहीं लोग अपने स्वास्थ्य की चिंता करते हुए इस प्राकृतिक गुलाल को ही खरीदना पसंद करते हैं. इस प्राकृतिक गुलाल को बनाने में जुटी ढुंंगेश्वरी की मुन्नी देवी बताती हैं कि वह जीविका से जुड़ी हुई है. इसके साथ ही वह प्रेरणा संस्था से जुड़ी हुई है.

क्या है गुलाल बनाने की प्रक्रिया: हर्बल गुलाल बनाने के लिए पालक के साग, सीम, गेंदा, परास के फूलों का उपयोग किया जाता है. सबसे पहले हरी सब्जियों या फूलों को उबाला जाता है और उससे रंग निकाल लिया जाता है. इसके बाद खाने में उपयोग होने वाले अरारोट में मिक्स किया जाता है. अरारोट मिक्स करने में काफी मेहनत लगती है. मिक्स करने के बाद उसे सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है. यह जब सूख जाता है तो उसे पल्वराइजर मशीन में डाल देते हैं और इस तरह से पूरी तरह से प्राकृतिक गुलाल बनकर तैयार हो जाता है.

अमेरिका में इस गुलाल की है सबसे ज्यादा डिमांड: ढुंंगेश्वरी में काफी तादाद में विदेशियों का आना लगा रहाता है. विभिन्न देशों से यहां पर्यटक आते हैं. विदेशी पर्यटकों को यहां के मार्केट में यह प्राकृतिक हर्बल गुलाल मिल जाता है, जिसे वह भारतीय मूल के लोगों के लिए ले जाना नहीं भूलते हैं. बता दें कि 2021 से जीविका की महिलाएं इस प्राकृतिक गुलाल को बना रही है, तो विदेशियों को इसके बारे में जानकारी रहती है और बोधगया गया पहुंचने वाले विदेशियों के माध्यम से भी यह गुलाल अलग-अलग देश में जाता है. यह भारतीय गुलाल सबसे अधिक अमेरिका ले जाया जाता है.

वन विभाग के सहयोग से सप्लाई हो रहा गुलाल: क्लाइमेट चेंज और वन पर्यावरण संरक्षण को लेकर भारत और अमेरिकी सरकार वन बचाने की योजना पर काम कर रही है. ऐसे में जंगली क्षेत्र से जुड़े लोगों को रोजगार पूरक ट्रेनिंग दी गई है, जिसमें प्राकृतिक गुलाल बनाना भी शामिल है. भारत और अमेरिका सरकार के करार को साकार बनाने के लिए वन विभाग की सहयोगी संस्था प्रेरणा काम करती है. इसके माध्यम से यहां का गुलाल अमेरिकी एंबेसी तक पहुंचता है और वहां से भारतीय मूल के विदेशियों के वो मिलता है. अमेरिका के अलावा अन्य देशों में भी इसे सप्लाई की योजना रहती है.

क्या है इस गुलाल की कीमत: राधा देवी बताती हैं कि गुलाल के रंग अलग-अलग बनाए जाते हैं. पालक और सीम से हरे रंग के प्राकृतिक गुलाल बनते हैं. वहीं गेंदा के फूल से पीले तो परास के फूल से लाल-गुलाबी गुलाल तैयार हो रहे हैं. पूरी तरह से प्राकृतिक गुलाल की डिमांड को देखकर ढुंगेश्वरी की महिलाएं ज्यादा से ज्यादा संख्या में इसकी रोजाना पैकेजिंग कर रही है. 50 ग्राम गुलाल 20 रुपये के छोटे पैकेट में उपलब्ध है. वहीं बड़े पैकेट में 100 ग्राम गुलाल 50 रुपए में मिल जाते हैं. यह बड़े पैकिंग वाले गुलाल ही विदेश तक जाते हैं. वहीं स्थानीय मार्केट में छोटे-छोटे पैकिंग में मिलने वाले गुलाल बेचे जाते हैं.
"हम लोग पिछले महीने से इस गुलाल को बना रहे हैं. इस गुलाल की मांग ज्यादा होती है. हम लोग पालक, सीम, गेंदा के फूल और परास के फूल से इसे बनाते हैं. ऑरगेनिक होने के कारण इस गुलाल की डिमांड काफी है. हम लोगों को बड़ा रोजगार होली के समय में मिलता है. 2021 से हम लोग इसे बना रहे हैं. यह देश और विदेश तक जाता है."-राधा देवी, जीविका की महिला

प्राकृतिक गुलाल है सबसे बेस्ट: वहीं मगध विश्वविद्यालय के बॉटनी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अमित कुमार सिंह बताते हैं, कि प्राकृतिक गुलाल सबसे बेस्ट होता है. इस गुलाल के उपयोग से लोगों की बॉडी को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता. त्वचा पूरी तरह से सुरक्षित रहती है. आंख को भी नुकसान नहीं होता है. वहीं उपयोग करने वाले साइड इफेक्ट से भी बचते हैं. ऐसे में केमिकल युक्त गुलाल के बजाय प्राकृतिक गुलाल अपनाना चाहिए.
"होली जैसे पर्व में केमिकल युक्त रंग गुलाल मार्केट में छाए रहते हैं. केमिकल युक्त रंग गुलाल के उपयोग से शरीर को बड़ा नुकसान हो सकता है. खासकर आंख और स्कीन के लिए, इस तरह बड़े विकल्प के रूप में हर्बल गुलाल है, जो लोगों को सेफ रखता है."- अमित कुमार सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, मगध विश्वविद्यालय बोधगया
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