कोटा: शहर के औद्योगिक क्षेत्र स्थित आईसीआईसीआई बैंक की एक मैनेजर ने श्रीराम नगर शाखा के ग्राहकों के खातों से 4.60 करोड़ रुपए चुरा लिए. बैंक की पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर साक्षी गुप्ता ने इस वारदात को साल 2020 से 2023 के बीच अंजाम दिया. उसने यह पैसा शेयर मार्केट में इन्वेस्ट कर दिया, लेकिन वहां अधिकांश पैसा डूब गया. इसकी जानकारी बैंक को उसके ट्रांसफर होने के बाद उस वक्त चली, जब एक ग्राहक अपनी एफडी की जानकारी करने आया. इस पर बैंक ने फरवरी 2025 में उद्योग नगर थाने में शिकायत दर्ज करवाई. पुलिस ने जांच के बाद आरोपी महिला बैंक मैनेजर गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया.
कोटा के उद्योगनगर थानाधिकारी जितेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि आरोपी साक्षी गुप्ता मूल रूप से रावतभाटा की निवासी है. वह विज्ञान नगर इलाके में रहती है. बैंक प्रबंधन ने इस संबंध में 18 फरवरी को मुकदमा दर्ज किया था. जिसमें बताया गया था कि करीब 43 ग्राहकों के 100 से ज्यादा खातों से निकासी की गई है. साक्षी गुप्ता ने गलत तरीके से रुपए निकालकर शेयर बाजार में लगा दिए. यहां तक कि ग्राहकाें के माेबाइल नंबर तक बदल दिए, ताकि ट्रांजेक्शन मैसेज से उन्हें पता नहीं चले. उसने ग्राहकों के डेबिट कार्ड, पिन और ओटीपी के गलत इस्तेमाल कर लेनदेन किए.
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ग्राहक एफडी की जानकारी लेने आया, तब चला पता: थानाधिकारी ने बताया कि इस घोटाले का पता तब चला, जब एक ग्राहक ने 1.50 लाख रुपए की एफडी के बारे में बैंक से जानकारी मांगी. खोजबीन करने पर पता चला कि ग्राहक के निर्देश के बिना यह राशि अन्य खाते में ट्रांसफर कर दी गई.
महिला के खाते से 3 करोड़ निकाले: आरोपी मैनेजर साक्षी गुप्ता ने 40 खाताें पर ओवरड्राफ्ट की सुविधा अवैध रूप से शुरू की. 31 ग्राहकों की एफडी समय से पहले मैच्योर कर दी और इसमें से 1 करोड़ 34 लाख 90 हजार 254 रुपए दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिए. इसी प्रकार साल 2023 में एक बुजुर्ग महिला के खाते से तीन करोड़ की निकासी कर ली गई. अधिकतर लेनदेन इंस्टा कियोस्क और डिजिटल बैंकिंग चैनलों से किए. उसने चार ग्राहकों के डेबिट कार्ड का इस्तेमाल कर एटीएम और इंटरनेट बैंकिंग से भी लेनदेन किए. यह सारा पैसा डिमैट अकाउंट में भेज दिया.
डीसीएम के कर्मचारी हुए धोखाधड़ी का शिकार: थानाधिकारी शेखावत ने बताया कि आरोपी मैनेजर ने जिन लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बनाया है, उनमें अधिकांश डीसीएम कार्मिक हैं. इनके खाते से लाखों रुपए की अवैध निकासी की गई है. बैंक के कॉरपोरेट ऑफिस से इस संबंध में फैक्ट्री प्रबंधन और पीड़ित ग्राहकों को भी बता दिया गया. इनमें से अधिकांश को इस घटनाक्रम के संबंध में जानकारी भी नहीं थी. इसके बारे में सुनते ही वे बैंक की तरफ दौड़े. अब बैंक इन लोगों की राशि फिर से लौटाने की कोशिश में जुटा हुआ है. वहीं, इस संबंध में बैंक ने आधिकारिक रूप से अपना पक्ष रखा है. इसमें आइसीआइसीआइ बैंक का कहना है कि ग्राहकों का हित हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है. धोखाधड़ी के सबंध में जानकारी मिलने के बाद हमने मुकदमा दर्ज कर दिया था. बैंक धोखाधड़ी के संबंध में जीरो टॉलरेंस की नीति से काम करता है, इसलिए इसमें शामिल कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया था. इस मामले में जितने भी ग्राहक हैं, उनके साथ हुई धोखाधड़ी के मामले में सभी क्लेम को सेटल कर दिया गया है.
बैंक ने 4.6 करोड़ की घोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करवाया था. इस मामले में आईसीआईसीआई बैंक की श्रीराम नगर ब्रांच के वर्तमान मैनेजर ने पूर्व मैनेजर साक्षी गुप्ता के खिलाफ शिकायत दी थी. उसने 43 ग्राहकों के 100 से अधिक खातों से अवैध रुपए निकासी कर शेयर मार्केट में इन्वेस्ट किए हैं. साक्षी को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया है.
- जितेंद्र सिंह शेखावत, थाना अधिकारी उद्योग नगर