बिहार चुनाव से पहले क्यों हो गई कांग्रेस से अखिलेश सिंह की छुट्टी? जानें राहुल गांधी का हिडन प्लान
विधानसभा चुनाव से पहले बिहार कांग्रेस में बड़ा बदलाव हुआ. अखिलेश सिंह को अध्यक्ष पद से हटाकर राजेश राम को जिम्मा मिला, जानें कारण

Published : March 19, 2025 at 11:21 AM IST
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी ने एक कदम से सबको चौंका दिया है. राहुल गांधी के नेतृत्व वाली पार्टी कांग्रेस ने अखिलेश सिंह को अध्यक्ष पद से हटा दिया है.अखिलेश सिंह ना तो अपना कार्यकाल पूरा कर सके ना ही वह प्रदेश कमेटी बनाने में कामयाब हुए. राहुल गांधी ने अखिलेश सिंह को हटाकर एक तीर से कई निशान साधा है.
बिहार चुनाव से पहले अखिलेश सिंह की छुट्टी: साल 2022 में कांग्रेस पार्टी ने अखिलेश सिंह को बिहार प्रदेश का अध्यक्ष बनाया था, लेकिन 2025 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक झटके में अखिलेश सिंह को पद से हटा दिया गया. बिहार प्रदेश के नए प्रभारी कृष्णा अल्लावरू की ताजपोशी के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि बिहार कांग्रेस किसी दलित चेहरे को आगे कर सकती है और अखिलेश सिंह की जगह राजेश कुमार उर्फ राजेश राम को कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष बनाया है.
बिहार प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष श्री @rajeshkrinc जी को नई जिम्मेदारी के लिए बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं।
— Bihar Congress (@INCBihar) March 18, 2025
निवर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ @akhileshPdsingh जी के बतौर प्रदेश अध्यक्ष अतुलनीय योगदान के लिए कांग्रेस परिवार आभार प्रकट करती है। pic.twitter.com/BJI1Stvinh
लालू प्रसाद यादव के करीबी हैं अखिलेश: सवाल यह उठता है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अखिलेश सिंह को अध्यक्ष पद से क्यों हटाया गया. दरअसल अखिलेश सिंह, लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी माने जाते हैं और लालू प्रसाद यादव की पार्टी में लंबे समय तक रह चुके हैं. लालू प्रसाद यादव की मदद से अखिलेश सिंह राज्यसभा भेजे गए थे. कांग्रेस पार्टी के अंदर एक गुट का यह मानना था कि पार्टी को लालू प्रसाद यादव के साये से बाहर निकलना चाहिए और अखिलेश सिंह के रहते हुए यह संभव नहीं था.
अब तक लालू आवास पर नहीं गए नए बिहार प्रभारी: कांग्रेस पार्टी 2025 के विधानसभा चुनाव में लालू प्रसाद यादव के शर्तों पर राजनीति नहीं करेगी, यह संकेत साफ तौर पर मिल चुके हैं. नए प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू की ताजपोशी से संकेत मिलने लगे थे. नए प्रभारी लगभग 10 बार बिहार के दौरे पर आ चुके हैं लेकिन लालू आवास पर वह एक बार भी नहीं गए. कांग्रेस पार्टी विधानसभा चुनाव में अपने शर्तों पर समझौता करना चाहती है यह संकेत भी साफ है.
कन्हैया कुमार की बिहार की सियासत में सक्रिय एंट्री: कांग्रेस पार्टी बिहार की राजनीति में कन्हैया कुमार की सक्रिय एंट्री चाहती थी और इसकी कवायद लंबे समय से चल रही थी. अखिलेश सिंह के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए ऐसा संभव नहीं हो पा रहा था. कन्हैया कुमार और अखिलेश सिंह दोनों एक ही जाति के हैं और तेजस्वी यादव भी कन्हैया कुमार को पसंद नहीं करते हैं, इस वजह से अखिलेश सिंह को कुर्सी गंवानी पड़ी.
पप्पू यादव और अखिलेश सिंह के बीच थी अदावत: पप्पू यादव भी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के करीबी माने जाते हैं. पप्पू यादव की भी सक्रिय एंट्री अखिलेश सिंह के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए नहीं हो रही थी. दूसरे राज्यों में तो पप्पू यादव कांग्रेस पार्टी के लिए बैटिंग कर रहे थे, लेकिन बिहार में पप्पू यादव को लेकर अखिलेश सिंह सकारात्मक नहीं थे. अखिलेश सिंह के जाने के बाद पप्पू यादव की सक्रिय भागीदारी भी कांग्रेस पार्टी के राजनीति में देखने को मिल सकती है.
55% वोट पर राहुल गांधी की नजर: बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर राहुल गांधी एक्शन मोड में दिखाई दे रहे हैं. राहुल गांधी दो बार बिहार दौरे पर आ चुके हैं और तीसरी बार वह बिहार दौरे पर आने की तैयारी में है. कांग्रेस पार्टी की नजर दलित, अति पिछड़ा और पिछड़ा वोट बैंक पर है. कांग्रेस 55 परसेंट वोट बैंक को साधना चाहती है.
दलित महादलित को साधने की तैयारी: राजेश राम रविदास जाति से आते हैं और दलितों में रविदास की आबादी अच्छी खासी है . बिहार में, चमार (मोची, रविदास, चर्मकार, रोहिदास) जाति की कुल आबादी 68 लाख 69 हजार 664 है, जो राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 5.255% है. दलित आबादी की अगर बात कर ले तो बिहार में 15.9% दलित हैं.
दशरथ मांझी के पुत्र कांग्रेस में शामिल: दशरथ मांझी के पुत्र भागीरथ मांझी को कांग्रेस में शामिल कराया गया था. उससे पहले राहुल गांधी बिहार दौरे पर आए थे और स्वतंत्रता सेनानी जगलाल चौधरी की जयंती समारोह में शामिल हुए थे. राहुल गांधी ने दलितों को अपने पक्ष में करने की कोशिश की थी. इसके अलावा कांग्रेस पार्टी की ओर से जय बापू जय भीम जय संविधान कार्यक्रम किया जा रहा है.
एक्सपर्ट की राय: राजनीतिक विश्लेषक डॉक्टर संजय कुमार का मानना है कि कांग्रेस पार्टी अब बिहार में अपने शर्तों पर राजनीति करना चाहती है. विधानसभा चुनाव के दौरान सीटों का समझौता भी कांग्रेस पार्टी अपने शर्तों पर करेगी. अखिलेश सिंह को हटाने के पीछे भी उद्देश्य यही है कि कांग्रेस पार्टी बिहार में राष्ट्रीय जनता दल की बी टीम बनाकर रहना नहीं चाहती है. इसके अलावा अखिलेश सिंह की पप्पू यादव और कन्हैया कुमार से अदावत भी एक प्रमुख वजह रही.
"एक दलित चेहरे को आगे कर कांग्रेस पार्टी दलित वोट बैंक को अपने पक्ष में करना चाहेगी. नए प्रदेश प्रभारी बिहार आए लेकिन अब तक लालू परिवार से मुलाकात नहीं की. इसके संकेत भी साफ है कि कांग्रेस पार्टी बिहार के अंदर अपने तौर तरीकों से राजनीति को आगे बढ़ाएगी. आने वाले दिनों में कन्हैया कुमार और पप्पू यादव की सक्रियता और बढ़ सकती है."- संजय कुमार,राजनीतिक विश्लेषक
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