अंगदान कर दिया खुशी का तोहफा, कौन बन सकता है जिंदगी का अनमोल दाता
विदिशा में राजकीय सम्मान के साथ अरविंद जैन की हुई अंतिम विदाई. देहदान-नेत्रदान कर जागरूकता का बने प्रेरक उदाहरण.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 11, 2025 at 2:55 PM IST
|Updated : August 11, 2025 at 3:05 PM IST
विदिशा: अंगदान महादान है जो किसी की जिंदगी को नयी उम्मीद और नया जीवन देता है. यह एक ऐसा दान है जो मृत्यु के बाद भी दूसरों को जिंदा रहने का मौका देता है. अंगदान से न केवल रोगी की जान बचती है, बल्कि उसके परिवार को भी खुशियों की रोशनी मिलती है. हर इंसान के पास यह मौका होता है कि वह अपने अंगों से किसी की जिंदगी संवार सके. आज हम आपको ऐसे ही लोगों के बारे में बताएंगे जिन्होंने अंगदान कर लोगों नई जिंदगी देने का काम किया है.
देश में अंगदान और देहदान की जागरूकता बढ़ाने के लिए जहां सरकारें विभिन्न योजनाएं चला रही हैं. मध्य प्रदेश शासन ने जुलाई 2025 को राज्य में अंगदान और देहदान को बढ़ावा देने के लिए विशेष "जीवन दान अभियान" शुरू करने की घोषणा की थी. जिसके तहत अंगदान पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने, संकल्प लेने वालों के परिवार को सरकारी स्तर पर सम्मानित करने और चिकित्सा संस्थानों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है. सामान्य प्रशासन को आदेश जारी किए की देहदान, अंगदान करने वाले नागरिकों को सम्मानित किया जाएगा.
मुख्यमंत्री की अंगदान-देहदान पहल से जुड़ता उदाहरण
वहीं समाज में कुछ लोग अपने जीवनकाल में ही ऐसी मिसाल पेश कर जाते हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनती हैं. सिरोंज निवासी अरविंद जैन ऐसे ही प्रेरणास्रोत बने, जिन्हें उनके निधन के बाद राजकीय सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ विदा किया गया. उनका पार्थिव शरीर विदिशा के अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज को चिकित्सा शिक्षा के लिए दान कर दिया गया. अरविंद जैन का यह कदम मुख्यमंत्री की पहल को सामाजिक स्तर पर मजबूती देता है और बताता है कि जागरूकता केवल सरकारी योजना से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत संकल्प से भी फैलती है.

8 साल पुराना संकल्प हुआ पूरा
अक्टूबर 2017 में विकास पचौरी फाउण्डेशन द्वारा सिरोंज में आयोजित एक निजी कार्यक्रम में अरविंद जैन, उनकी पत्नी शशि जैन और पुत्र अंशुल जैन ने मृत्यु उपरांत देहदान का संकल्प पत्र भरा था. इस वसीयत में उन्होंने स्पष्ट लिखा था कि मृत्यु के बाद उनका शरीर किसी मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया जाए, ताकि यह चिकित्सा विज्ञान और डॉक्टरों की पढ़ाई में काम आ सके. शनिवार रात स्वास्थ्य खराब होने पर भोपाल के एक निजी अस्पताल में अरविंद जैन का निधन हो गया.

संस्था ने निभाया वादा
परिवार के सदस्यों ने संस्था से संपर्क कर देहदान प्रक्रिया पूरी कराई. मेडिकल कॉलेज के ऐनाटॉमी विभाग में शोकसभा आयोजित हुई, जिसमें विदिशा विधायक मुकेश टंडन, प्रशासनिक अधिकारी और शहर के अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे. इस मौके पर अरविंद जैन को तिरंगा अर्पित कर राजकीय सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया.
विकास पचौरी फाउण्डेशन का मिशन
संस्था के सदस्य राजेश जैन ने बताया कि, ''अब तक 26 पार्थिव शरीर विभिन्न मेडिकल कॉलेजों को दान किए जा चुके हैं और 1500 से अधिक लोग इस मिशन से जुड़ चुके हैं. यह प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क है और केवल आधार कार्ड की प्रति देकर कोई भी व्यक्ति संकल्प ले सकता है. संस्था का मुख्यालय शेरपुरा, विदिशा में स्थित है, जहां आकर इच्छुक लोग किसी भी समय संकल्प पत्र भर सकते हैं.''

समाज के लिए संदेश
अरविंद जैन का जीवन और उनका अंतिम निर्णय यह संदेश देता है कि मृत्यु के बाद भी इंसान समाज के काम आ सकता है. उनका यह योगदान न केवल डॉक्टरों और मेडिकल विद्यार्थियों के लिए अनमोल है, बल्कि यह पूरे देश में देहदान और नेत्रदान की संस्कृति को नई दिशा देने वाला है.
माता-पिता ने पुत्र के अंग किए दान
कहते हैं, इंसान अपने कर्मों से अमर होता है. ग्राम पंचायत अतरिया के ग्राम बिछुआ निवासी सतेंद्र पिता रोहिणी प्रसाद यादव ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में भी मानवता की सबसे बड़ी मिसाल पेश की. सिवनी के घंसौर तहसील के अतरिया निवासी रोहिणी प्रसाद यादव के पुत्र सत्येंद्र का रोड एक्सीडेंट में निधन हो गया. माता-पिता ने तुरंत फैसला लेते हुए जबलपुर मेडिकल कॉलेज में अपने पुत्र के अंग दान कर कई ज़िंदगियों को नई सांसें दे दीं.

इसकी सूचना जिला प्रशासन को लगते ही सामान्य प्रशासन तहसील घंसौर एसडीम बिसन सिंह और सिवनी से आई 1-8 के गार्डों के द्वारा मुक्तिधाम पर अंतिम विदाई देते हुए गॉड ऑफ अनार से सम्मानित किया गया. नम आँखों और गर्व से भरे दिलों के साथ अंतिम विदाई दी गई. प्रदेश शासन ने अंगदान करने वाले महान व्यक्तियों को गार्ड ऑफ ऑनर देने का विशेष निर्देश दिया है, ताकि उनकी निस्वार्थ सेवा हमेशा याद रखी जाए और समाज में प्रेरणा का संचार हो. सतेंद्र भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी दी हुई ज़िंदगी और उनकी मानवता हमेशा ज़िंदा रहेगी.
क्या कहना है डॉक्टर का
भोपाल में जय प्रकाश अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. आईके चुघ ने बताया कि, ''18 वर्ष या इससे अधिक आयु का डोनर जीवित व्यक्ति को अपनी एक किडनी या लीवर का एक हिस्सा दान कर सकता है. वहीं, किसी भी उम्र के ब्रेन डेड डोनर के 8 मुख्य अंगो को डोनेट किया जा सकता है. इसमें हार्ट, फेफड़े, लीवर, किडनी, पैक्रियाज, छोटी आंत, कार्निया, हड्डी, त्वचा और हार्ट वाल्व शामिल हैं.'' चुघ ने बताया कि, ''नई गाइड लाइन के अनुसार ऑर्गन डोनेशन को लेकर जागरुकता बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने मृत डोनर के शरीर को गॉर्ड आफ आनर से सम्मानित करने के निर्देश भी दिए गए हैं. नई गाइड लाइन में महिलाओं को आर्गन वेटिंग लिस्ट में प्राथमिकता देने की बात भी कही गई है.''
- AIIMS ने दो की जिंदगी को किया रोशन, 65 वर्षीय बुजुर्ग बोले-अंतिम इच्छा हुई पूरी
- अंगदान करने वालों को मोहन सरकार देगी गार्ड ऑफ ऑनर, परिजन होंगे सम्मानित
- मरकर भी जिंदा रहेंगे पूरन! ब्रेन डेड के बाद दान की किडनियां, जबलपुर में फिर बना ग्रीन कॉरिडोर
मध्य प्रदेश की अंगदान गाइडलाइन के मुख्य बिंदु
1. राज्य स्तर पर अंगदान नीति (2025 में लागू)
मध्य प्रदेश सरकार ने अंगदान को बढ़ावा देने के लिए एक नई नीति बनाई है. इस नीति के तहत, सबसे गंभीर स्थिति में मरीजों को पहले अंग मिलेंगे. यदि स्थानीय स्तर पर कोई उपयुक्त प्राप्तकर्ता नहीं मिलता है, तो अंगों को अन्य राज्यों में भेजा जा सकता है. महत्वपूर्ण बात यह है कि अंग प्राप्त करने के लिए निवास स्थान की कोई बाध्यता नहीं है, जिससे सभी को समान अवसर मिलते हैं.
2. राज्य सम्मान और पुरस्कार
मुख्यमंत्री ने फरवरी 2025 में घोषणा की कि जो व्यक्ति अंगदान की प्रतिज्ञा करेंगे, उन्हें उनके अंतिम संस्कार के दौरान राज्य सम्मान मिलेगा. इसके अलावा, अंगदाता या उनके परिवारों को राष्ट्रीय त्योहारों पर मरणोपरांत पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे, जिससे इस पुण्य कार्य को सामाजिक मान्यता मिलेगी.
क्या है अंगदान का प्रोसेस
1. जीवित दाता: नजदीकी रिश्तेदार (जैसे माता-पिता, भाई-बहन, संतान, दंपत्ति) अंगदान कर सकते हैं.
2. मृत दाता: मस्तिष्क मृतता या प्राकृतिक हृदय मृत्यु के बाद अंगदान संभव है, बशर्ते परिवार की सहमति प्राप्त हो.
3. सहमति प्रक्रिया: अंगदान के लिए परिवार की स्वीकृति आवश्यक है.
4. ऑथोराइजेशन कमेटी: यदि दाता और प्राप्तकर्ता के बीच रक्त संबंध नहीं हैं, तो राज्य द्वारा गठित ऑथोराइजेशन कमेटी से अनुमति प्राप्त करनी होती है.
अंगदान के वक्त इन नियमों का करें पालन
- अंगदान के लिए व्यक्ति की सहमति, स्वास्थ्य, और कानूनी नियमों का पालन जरूरी है.
- अंगदान के लिए मस्तिष्क मृतक (Brain Death) को कानूनी मृत्यु माना जाता है.
- जीवित दाता केवल कुछ अंग जैसे किडनी, लिवर का हिस्सा दान कर सकता है.
- दान के लिए परिवार की अनुमति जरूरी होती है.
- अगर आप अंगदान करना चाहते हैं तो अपने नजदीकी अस्पताल या राज्य के अंगदान संगठन से संपर्क करें. यह एक जीवनदायिनी सेवा है जो कई लोगों की जिंदगी बचा सकती है.

