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बाल श्रम व बाल विवाह पर रोक, शिक्षा और सुरक्षा को प्राथमिकता, नई योजनाओं से बच्चों की मुस्कान और भविष्य संवारने की तैयारी: वर्णिका शर्मा

छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा से ETV भारत ने खास चर्चा की.

Varnika Sharma
वर्णिका शर्मा से खास बात (ETV Bharat Chhattisgarh)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : September 4, 2025 at 12:49 PM IST

6 Min Read
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रायपुर(प्रवीण कुमार सिंह): छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग की नई अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने पद संभालते ही स्पष्ट कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता बच्चों का अधिकार सुरक्षित रखना और उनके चेहरे की मुस्कान लौटाना है. उनकी कार्ययोजना तीन मुख्य बिंदुओं पर आधारित है.

  • पहला- बच्चों को शिक्षा, पोषण और सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना
  • दूसरा- बाल श्रम, बाल विवाह और असुरक्षित परिवेश पर रोक लगानाॉ
  • तीसरा- बच्चों की सक्रिय सहभागिता और उनकी आवाज को महत्व देना

इन बिंदुओं पर काम करने के लिए आयोग ने कई अहम पहल शुरू की हैं. बाल चौपाल, औचक निरीक्षण अभियान, एकल खिड़की व्यवस्था, कॉमिक्स पुस्तक, काउंसलिंग प्रोग्राम, रक्षक सिलेबस और मुख्यमंत्री बाल योजना. डॉ. शर्मा का मानना है कि बच्चों के साथ क्या होना चाहिए या क्या मिलना चाहिए इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है कि उनके साथ क्या नहीं होना चाहिए.

वर्णिका शर्मा से खास बात (ETV Bharat Chhattisgarh)

ETV भारत के वरिष्ठ संवाददाता प्रवीण कुमार सिंह से खास बातचीत में वर्णिका शर्मा ने अपनी चुनौतियों, प्राथमिकताओं और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की.

चुनौतियों से शुरुआत

सवाल – कार्यभार संभालने के बाद आपके सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?

जवाब – जब भी कोई व्यक्ति नई जगह पर आता है, तो उसे नए सिरे से सीखना और अभ्यास करना पड़ता है. समाज के विभिन्न वर्गों और ग्रामीण-शहरी इलाकों में काम करने का अनुभव मेरे पास है. शुरू से ही समझ आ गया था कि बच्चों के हित में बहुत काम करना बाकी है. इसलिए दिल से सद्भाव लेकर निरंतर कार्य करने की शुरुआत की.

प्राथमिकताएं और दृष्टिकोण

सवाल – आपकी प्राथमिकताएं क्या हैं?

जवाब – मेरी सोच है कि कोई भी काम "गर्भस्पर्शी नहीं बल्कि मर्मस्पर्शी" होना चाहिए. बच्चों के अधिकार सिर्फ शिक्षा, पोषण और वस्त्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके साथ क्या नहीं होना चाहिए, यह भी अहम है. बाल श्रम, बाल विवाह और असुरक्षित माहौल बच्चों का अधिकार नहीं है, और इन्हें रोकना आयोग की जिम्मेदारी है.

बाल श्रम और बाल विवाह पर सख्ती

सवाल – बाल श्रम और बाल विवाह रोकने के लिए आयोग क्या कर रहा है?

जवाब – बाल श्रम रोकने के लिए सिर्फ 12 जून तक सीमित अभियान नहीं बल्कि हर 15–20 दिन में औचक जांच अभियान चलाया जा रहा है. जिन बच्चों को रेस्क्यू किया जाता है, उनके माता-पिता को भी सरकारी योजनाओं की जानकारी और लाभ दिलाने की कोशिश की जाती है. बाल विवाह रोकने के लिए शॉर्ट फिल्मों, जागरूकता अभियान और संस्थाओं के सहयोग से काम हो रहा है, जिससे इस बार बाल विवाह के मामलों में बड़ी गिरावट आई है.

शिक्षा और स्कूलों की स्थिति

सवाल – जर्जर स्कूल और अव्यवस्थित शिक्षा व्यवस्था पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

जवाब – अच्छे कामों की शुरुआत हो चुकी है. बरसात से पहले ही जिलाधीशों को पत्र भेजकर स्कूलों में हाइजीन, सुरक्षा और जर्जर भवनों पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं. किशोरियों के स्वास्थ्य को लेकर भी शिक्षा विभाग को विशेष निर्देश दिए गए हैं. लगातार औचक निरीक्षण किए जा रहे हैं और जहां भी लापरवाही मिली है, कार्रवाई हुई है.

एकल खिड़की व्यवस्था और योजनाओं का लाभ

सवाल – बच्चों को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए क्या पहल की गई है?

जवाब – हमने 16 जिलों का दौरा किया है और दंतेवाड़ा जैसे जिलों में "एकल खिड़की" व्यवस्था बेहतरीन ढंग से काम कर रही है. इसमें बच्चों और उनके माता-पिता को सभी योजनाओं की जानकारी और सहायता एक ही स्थान पर मिलती है. यह व्यवस्था धीरे-धीरे और जिलों तक बढ़ाई जाएगी.

रेस्क्यू और काउंसलिंग पर फोकस

सवाल – बच्चों के रेस्क्यू और पुनर्वास में क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

जवाब – सिर्फ रेस्क्यू कर माता-पिता को सौंपना पर्याप्त नहीं है. बच्चों की काउंसलिंग और शिक्षा पर ध्यान देना जरूरी है. इसी वजह से कई बच्चों को स्कूल वापस भेजा गया है. मंत्रालय स्तर पर भी वीडियो कॉन्फ्रेंस कर व्यवस्था को मजबूत किया गया है.

शिकायतें और त्वरित कार्रवाई

सवाल – बीते 3 महीनों में सबसे ज्यादा शिकायतें किस तरह की आईं?

जवाब – ज्यादातर शिकायतें शिक्षा से जुड़ी थीं. हमने औचक निरीक्षण और तकनीकी निगरानी से तेजी से कार्रवाई की है. कई मामलों में 25 मिनट के भीतर मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की गई. दोषी शिक्षकों को निलंबित किया गया और बच्चों को न्याय दिलाया गया.

वनांचल और गरीब परिवारों तक पहुंच

सवाल – क्या आयोग दूरस्थ इलाकों तक भी पहुंच रहा है?

जवाब – हां, कोंटा, सुकमा और कांकेर जैसे वनांचल क्षेत्रों तक जाकर डॉक्यूमेंट और आयुष्मान कार्ड बनवाए गए. सिकलिंग रोग से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए भी तुरंत कार्रवाई हुई. अब तक कई बच्चों को इलाज और शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित हुआ है.

स्कूलों में हिंसा और जागरूकता अभियान

सवाल – बच्चों में बढ़ती हिंसा और मारपीट को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

जवाब – हमने कॉमिक्स पुस्तक और ऑडियो-वीडियो प्रेजेंटेशन लॉन्च किए हैं, जिनमें बच्चों को सरल भाषा में जागरूक किया जा रहा है. साथ ही, स्कूलों में सिर्फ पढ़ाई नहीं बल्कि नैतिक मूल्यों पर भी ध्यान देने की अनुशंसा की गई है.

भविष्य की रूपरेखा – "रक्षक सिलेबस" और "मुख्यमंत्री बाल योजना"

सवाल – बाल संरक्षण आयोग की आगे की रूपरेखा क्या है?

जवाब – हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ का हर बच्चा मुस्कुराए. इसके लिए हमने रक्षक सिलेबस लॉन्च किया है, जिसे कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाएगा. साथ ही, मुख्यमंत्री बाल योजना के तहत बाल आश्रम के बच्चों को पुनर्वास और बेहतर भविष्य की दिशा दी जाएगी.

डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा "हमारे सारे बच्चे ही छत्तीसगढ़ की पहचान हैं. उनका बचपन सुरक्षित रहेगा तो प्रदेश मुस्कुराएगा. आप सभी से अनुरोध है कि किसी भी समस्या पर चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर जरूर संपर्क करें."

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