ETV Bharat / state

फिर याद आयी दशरथ मांझी और फगुनिया की प्रेम कहानी, सांसों की डोर टूटी तो पहाड़ तोड़ डाला

पत्नी प्रेम ने दशरथ मांझी को माउंटेन मैन बना दिया, लेकिन जब वह पहाड़ तोड़ने निकले तो सभी उन्हें पागल समझते थे. रत्नेश की रिपोर्ट.

Mountain Man Dashrath Manjhi
दशरथ मांझी (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 13, 2025 at 7:18 PM IST

7 Min Read
Choose ETV Bharat

गया: प्यार की यह अद्भुत कहानी बिहार के गया जिले के गहलौर घाटी की है. गहलौर के दशरथ मांझी ने अपनी पत्नी के प्रेम में ऐसा जुनून दिखाया कि दुनिया हैरान रह गई. गया के पहाड़ी क्षेत्र के गहलौर गांव की यह कहानी आज प्यार करने वालों के लिए एक उदाहरण है. साथ ही यह परिभाषा भी कि सच्चा प्रेम क्या होता है. दशरथ मांझी अपने हाथों से 22 सालों तक उस पहाड़ की चट्टानों को काटते रहे, जहां उनकी पत्नी 'फगुनिया' की मौत हुई थी.

कुछ ऐसी थी दशरथ मांझी-फगुनिया की लव स्टोरी : दशरथ मांझी के माउंटन मैन बनने का सफर उनकी पत्नी फगुनिया के ज़िक्र किए बिना अधूरा है. साल 1959, दशरथ दशरथ मांझी एक मजदूर थे. पहाड़ों पर जाकर काम करते थे. पत्नी फाल्गुनी देवी (फगुनिया देवी) उनके लिए रोज उबड़ खाबड़ पहाड़ के रास्ते खाना और पानी लेकर आया करती थी. वर्ष 1959, उस दिन रोज की तरह पत्नी फाल्गुनी देवी अपने पति दशरथ मांझी के लिए खाना और पानी लेकर पहाड़ के रास्ते जा रही थी. उसी वक्त उनका पैर फिसला.

यहीं से शुरू हुआ दशरथ मांझी का इंतकाम : फाल्गुनी का घड़ा फूटा और गंभीर चोट लगी. नजदीक का अस्पताल करीब 55 किलोमीटर दूर था. गहलौर और जिद्दी पहाड़ की वजह से मांझी की फगुनिया को वक्त पर इलाज नहीं मिल सका और वो चल बसीं. इस घटना से बाबा दशरथ मांझी काफी आहत हुए. इसके बात यहीं से शुरू हुआ दशरथ मांझी का इंतकाम.

Mountain Man Dashrath Manjhi
ईटीवी भारत GFX (ETV Bharat)

मांझी ने छेनी हथौड़ी उठाई, पहाड़ काटना शुरू किया : पत्नी से दिलो जान से प्रेम करने वाले दशरथ मांझी ने फाल्गुनी की मौत के बाद दृढ़ संकल्प लिया, कि वे पहाड़ काटकर रास्ता बनाएंगे. पत्नी के दुनिया से चले जाने का गम था, मांझी टूट चुके थे. ऐसे वक्त में अपनी सारी ताकत बटोरी और छेनी-हथौड़ी से पहाड़ पर वार करने का फैसला लिया.

'मुझे लोग पागल कहते थे' : यह सब इतना आसान नहीं था. लोग उन्हें पागल कहकर बुलाते थे. जब दशरथ मांझी जिंदा थे तो उस वक्त एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि 'जब मैंने पहाड़ तोड़ना शुरू किया तो गांव वालों ने कहा कि मैं पागल हो गया हूं, लेकिन उनके तानों ने मेरा हौसले को टूटने नहीं दिया बल्कि और बढ़ा दिया'.

Mountain Man Dashrath Manjhi
360 फीट ऊंचा पहाड़ काट डाला (ETV Bharat)

दिल में एक ही बात, पहाड़ से बदला लेना है : साल 1960 से 1982 के बीच दशरथ मांझी के दिल और दिमाग में बस एक ही बात थी कि पत्नी फगुनिया की मौत का बदला पहाड़ से लेना है. दिन, सप्ताह, महीने, 1 साल नहीं बल्कि पूरे 22 साल तक छेनी और हथौड़ी पहाड़ को काटने के लिए चलाई और 360 फीट ऊंचा और 30 फीट चौड़ा पहाड़ काट डाला.

Mountain Man Dashrath Manjhi
ईटीवी भारत GFX (ETV Bharat)

बेटे भागीरथ ने कहा, 22 साल की मेहनत थी : माउंटेन मैन दशरथ मांझी के बेटे भागीरथ मांझी ने बताया कि बाबा दशरथ ने पत्नी की मौत के बाद जो छेनी हथौड़ी खरीदी, वह अपनी तीन बकरियां को बेचकर लिया था. इसके बाद बकरी बेच कर खरीदी गई छेनी हथौड़ी से अपने दृढ़ संकल्प को पूरा करने में जुट गए. बिना किसी की मदद के अकेले ही 22 सालों तक गहलौर पहाड़ से खुद लड़ते रहे और फिर सुगम रास्ता बनाकर ही दम लिया, जिससे 55 किलोमीटर की दूरी अब 15 किलोमीटर रह गई है.

Mountain Man Dashrath Manjhi
बीच में दशरथ मांझी के बेटे भागीरथी मांझी (ETV Bharat)

"आज लाखों लोगों के लिए यह सड़क है. मां फाल्गुनी के प्रेम में बाबा दशरथ ने छेनी हथौड़ी उठाई थी. आज यह प्रेम का बड़ा उदाहरण है. बाबा दशरथ ने यह भी सोचा, कि हमारी एक फाल्गुनी ही नहीं, इससे कई ऐसी हजारों फाल्गुनी पीड़ित होगी. वे फाल्गुनी से अकूत प्रेम तो करते ही थे, समाज के लोगों को भी काफी प्यार करते थे. आज समाज के लाखों लोगों के लिए यह सड़क है." - भागीरथ मांझी, माउंटेन मैन दशरथ मांझी के बेटे

मांझी की समाधि स्थल को ताजमहल मानते हैं लोग : गया के गहलौर घाटी की पहचान आज देश ही नहीं, बल्कि विदेश तक है. गहलौर घाटी में प्रेम की परिभाषा को समझने के लिए देश से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग आते हैं. देश विदेश से आने वाले यहां की प्रेम कहानी जानकर हैरान रह जाते हैं. ऐसी अद्भुत प्रेम कहानी की पटकथा लिख देने वाले दशरथ मांझी के समाधि स्थल को नमन करना नहीं भूलते. कई तो ऐसे हैं, जो इस प्रेम कहानी को शाहजहां और मुमताज की प्रेम के प्रतीक ताजमहल से भी बड़ा मानते हैं.

Mountain Man Dashrath Manjhi
दशरथ मांझी का समाधि स्थल (ETV Bharat)

"यहां घूमने आए हैं. दशरथ मांझी ने अपने प्यार के लिए पहाड़ काट दिया. देखकर बहुत अच्छा लग रहा है. इतना मेहनत कोई नहीं कर सकता है. अकेले के लिए यह असंभव वाली बात है."- सूर्यदेव विश्वकर्मा, पर्यटक

दशरथ मांझी को नीतीश कुमार ने दी दुनिया में पहचान : प्रेम की अद्भुत परिभाषा गढ़ने वाले दशरथ मांझी के निधन के बाद गहलौर घाटी में आमिर खान से लेकर एक से एक बड़ी सिने हस्तियां और राजनीतिक दलों ने नेता भी पहुंचे. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें पुरस्कृत किया. इतना ही नहीं, उनके नाम से डाक टिकट भी जारी हुआ. अस्पताल और पुलिस स्टेशन बने. समाज के विकास पूरक कई योजनाएं चली.

2015 में रिलीज 'मांझी: द माउंटेन मैन' : फगुनिया के लिए दशरथ मांझी के इस मजबूत इरादों को सिनेमा और किताबों में भी उतारा गया. साल 2015 में रिलीज 'मांझी: द माउंटेन मैन' को आज 10 साल पूरे हो गए हैं. इस फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी, राधिका आप्टे लीड रोल में थे. एक रिपोर्ट की माने तो केतन मेहता के डायरेक्शन में इस फिल्म ने 12.53 करोड़ की कमाई की थी.

दुनिया से चले गए मांझी.. लेकिन यादों से नहीं : 17 अगस्त 2007, जब 73 साल की उम्र वो दशरथ मांझी ने दुनिया को अलविदा कहा तो उनके पीछे रह गई गहलौर घाटी के पहाड़ पर लिखी वो प्रेम कहानी, जो आने वाली कई पीढ़ियों को सबक देती रहेगी. गहलौर घाटी के इन रास्तों से जब लोग गुजरते है तो दशरथ और फगुनिया को जरूर याद करते है.

ये भी पढ़ें : 70 की उम्र में पहाड़ और पथरीले जंगल के बीच नहर खोदने में जुटे 'कैनाल मैन', हजारों किसानों की तकदीर 'सींचने' का लक्ष्य

ये भी पढ़ें : केरल के 'दशरथ मांझी'... पहाड़ में खोद डाली 88 मीटर लंबी सुरंग, देखने को उमड़ रही भीड़

ये भी पढ़ें : मिलिए बिहार के ट्री मैन सत्येंद्र मांझी से,दशरथ मांझी से प्रेरित होकर बंजर जमीन पर लगाए 15 हजार पौधे

ये भी पढ़ें : माउंटेन मैन दशरथ मांझी की राह पर बांका के लोग, सरकार ने नहीं सुनी गुहार तो खुद बना डाली 500 मीटर लंबी सड़क