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शुरू हो रहा वैशाख मास, भक्ति से लेकर तर्पण और दान तक का विशेष समय, जानिए धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

वैशाख मास को त्रेतायुग की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. यह मास दान-पुण्य, तर्पण, श्रीविष्णु भक्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है.

VAISAKHA MONTH
वैशाख मास को माधव मास भी कहा जाता है (ETV Bharat Bikaner)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : April 11, 2025 at 4:09 PM IST

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बीकानेर: वैशाख मास का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. मान्यता है कि इसी दिन से त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी और सृष्टि रचियता ब्रह्माजी ने इस मास को सर्वश्रेष्ठ बताया है. हिन्दू पंचांग के अनुसार वैशाख कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से यह मास 13 अप्रैल रविवार से आरंभ होकर 12 मई वैशाख शुक्ल पूर्णिमा तक रहेगा.

बीकानेर के पंडित नितिन वत्स बताते हैं कि पुराणों में इस मास की महिमा विस्तार से बताई गई है. स्कंद पुराण के वैष्णव खण्ड में लिखा है- "न माधवसमो मासो न कृतेन युगं समम्. न च वेदसमं शास्त्रं न तीर्थं गंगया समम्.." अर्थात जैसे युगों में सतयुग, शास्त्रों में वेद, तीर्थों में गंगा का स्थान है, वैसे ही महीनों में वैशाख का स्थान सर्वोच्च है.

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नितिन वत्स बताते हैं कि इस महीने में दान-पुण्य और पितरों के तर्पण का विशेष महत्व है. गर्मी अधिक होने के कारण जीव-जंतुओं और पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करना पुण्यकारी माना जाता है. विशेष रूप से वैशाख अमावस्या पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, उपवास, पीपल पर जल चढ़ाना, दीपक जलाना और जरूरतमंदों को दान करना शुभ माना गया है.

वैशाख का धार्मिक महत्व: उन्होंने बताया कि वैशाख मास को माधव मास भी कहा जाता है, जो भगवान विष्णु का एक नाम है, इसलिए इस मास में भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा और 'ॐ माधवाय नमः' मंत्र का जप विशेष फलदायी होता है. अक्षय तृतीया, वरुथिनी एकादशी, मोहिनी एकादशी और वैशाख पूर्णिमा जैसे पर्वों का भी धार्मिक महत्व बताया गया है. स्वास्थ्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस मास का महत्व है. अधिक गर्मी के कारण तली-भुनी वस्तुओं से परहेज करना और एक समय भोजन करना शास्त्रों के अनुसार और वैज्ञानिक रूप से भी उचित बताया गया है.

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